पुतिन के भारत दौरे से मिलेगा बड़ा अंतरराष्ट्रीय बूस्ट: पश्चिम एशिया विशेषज्ञ वाइएल अव्वाद
सारांश
मुख्य बातें
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इस वर्ष सितंबर 2026 में भारत आने वाले हैं, जहाँ वे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 में भाग लेंगे। पश्चिम एशिया मामलों के विशेषज्ञ वाइएल अव्वाद के अनुसार, यह यात्रा वैश्विक भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि को नई मज़बूती देगी। अव्वाद ने ओस्लो से यह बात कही।
विशेषज्ञ की राय: क्यों है यह दौरा अहम
अव्वाद ने कहा, "मुझे लगता है कि यह एक बहुत ज़रूरी दौरा है, खासकर दुनियाभर में भू-राजनीतिक हालात में तेज़ी से हो रहे बदलावों को देखते हुए — चाहे वह रूस-यूक्रेन युद्ध हो या पश्चिम एशिया में चल रहा संघर्ष। इससे भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बड़ा बूस्ट मिलेगा, क्योंकि इसे एक उभरती हुई अर्थव्यवस्था और सैन्य शक्ति के तौर पर पहचाना जा रहा है।"
यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक मंच पर अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को और सुदृढ़ करने की कोशिश में है। गौरतलब है कि ब्रिक्स का विस्तार हाल के वर्षों में तेज़ी से हुआ है और इस मंच पर पुतिन की उपस्थिति भारत की मेज़बानी को वैश्विक महत्व देती है।
रूस-भारत संबंध: रणनीतिक साझेदारी की गहराई
अव्वाद ने रूस-भारत संबंधों की प्रकृति पर कहा, "रूस के लिए भारत के साथ संबंध बहुत, बहुत ज़रूरी हैं और वे भारत को अपने रणनीतिक संसाधनों में से एक मानते हैं। वे भारत के साथ अपने संबंधों के किसी भी पहलू पर समझौता नहीं करना चाहते। इसलिए वे भारत को ऊर्जा आपूर्ति के साथ-साथ तकनीक देने और तकनीक हस्तांतरण में बहुत सहयोगी रहे हैं। जब भारत को उनकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत थी, तब रूस ने कभी मुँह नहीं मोड़ा।"
विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद रूस ने भारत को रियायती दरों पर कच्चा तेल उपलब्ध कराया है, जो दोनों देशों के बीच व्यावहारिक सहयोग का प्रमाण है।
फारस की खाड़ी संकट और भारत की आपूर्ति श्रृंखला पर असर
अव्वाद ने फारस की खाड़ी में जारी तनाव का भारत पर पड़ने वाले प्रभाव को रेखांकित करते हुए कहा, "फारस की खाड़ी में आपूर्ति श्रृंखला में रुकावटें पहले से ही आ रही हैं और हम जानते हैं कि दुनिया के पाँचवें हिस्से का व्यापार वहीं से होता है। भारत चल रहे युद्ध और उसके प्रभाव से सबसे ज़्यादा प्रभावित होने वालों में से एक है।"
उन्होंने आगे जोड़ा, "अभी बाज़ार अमेरिकी राष्ट्रपति या ईरान से आने वाले बयानों के अनुसार प्रतिक्रिया करते हैं और उतार-चढ़ाव साफ़ दिखते हैं। इसीलिए भारत अपने संसाधनों को विविधतापूर्ण बनाना चाहता है — खासकर रूस और अन्य देशों के साथ साझेदारी के ज़रिये।"
आगे क्या
पुतिन का यह दौरा सितंबर 2026 में प्रस्तावित है। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेज़बानी भारत के लिए न केवल कूटनीतिक बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस दौरान द्विपक्षीय बैठकें भी संभव हैं, जिनमें ऊर्जा, रक्षा और तकनीक हस्तांतरण के मुद्दे प्रमुख रह सकते हैं।