पुतिन बीजिंग पहुंचे: चीन के 25वें राजकीय दौरे पर शी जिनपिंग से होगी अहम वार्ता
सारांश
मुख्य बातें
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 19 मई 2025 की रात बीजिंग पहुंचे, जहाँ वे 19-20 मई तक चीन के राजकीय दौरे पर रहेंगे। यह पुतिन का चीन का 25वाँ दौरा है और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के निमंत्रण पर आयोजित इस यात्रा में दोनों नेता द्विपक्षीय संबंधों को और गहरा करने पर केंद्रित वार्ता करेंगे।
दौरे का महत्व और पृष्ठभूमि
यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब चीन-रूस व्यापक रणनीतिक साझेदारी की स्थापना की 30वीं वर्षगांठ और चीन-रूस मैत्री एवं सहयोग संधि (Treaty of Good-Neighbourliness and Friendly Cooperation) पर हस्ताक्षर की 25वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है। चीनी विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों राष्ट्रपति द्विपक्षीय संबंध, विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग और परस्पर हित के अंतरराष्ट्रीय व क्षेत्रीय मुद्दों पर विचार साझा करेंगे।
गौरतलब है कि यह पहली बार है जब पुतिन ने किसी विदेश यात्रा से पूर्व वीडियो भाषण जारी किया। इस कदम को दोनों देशों के बीच बढ़ते राजनयिक महत्व का संकेत माना जा रहा है।
पुतिन के वीडियो भाषण की मुख्य बातें
यात्रा से पहले जारी वीडियो संदेश में पुतिन ने कहा, 'रूस-चीन संबंध सच में एक ऐसे स्तर पर पहुंच गए हैं, जो पहले कभी नहीं हुआ।' उन्होंने कहा कि नियमित पारस्परिक यात्राएँ और उच्च-स्तरीय शिखर सम्मेलन दोनों देशों के संबंधों की असीमित संभावनाओं को साकार करने का अनिवार्य हिस्सा हैं।
पुतिन ने यह भी स्पष्ट किया कि रूस-चीन मित्रता किसी तीसरे पक्ष के विरुद्ध नहीं है, बल्कि यह शांति और साझा समृद्धि के लक्ष्य पर आधारित है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों का घनिष्ठ रणनीतिक समन्वय वैश्विक मंच पर स्थिरता की भूमिका निभाता है।
बीजिंग वार्ता का एजेंडा
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के अनुसार, दोनों पक्ष इस अवसर का उपयोग द्विपक्षीय संबंधों को और मज़बूत बनाने के लिए करेंगे, ताकि वैश्विक स्थिरता और सकारात्मक ऊर्जा को बल मिले। बातचीत में राजनीतिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और लोगों के बीच आपसी संपर्क के विस्तार पर ज़ोर दिया जाएगा।
पुतिन ने कहा, 'हम मिलकर वह सब कुछ कर रहे हैं जिससे द्विपक्षीय सहयोग और गहरा हो सके और हमारे देशों का पूरा विकास हो सके।' उन्होंने संप्रभुता और राष्ट्रीय एकता की सुरक्षा के मुद्दों पर परस्पर समर्थन की प्रतिबद्धता भी दोहराई।
वैश्विक संदर्भ और आगे की राह
यह यात्रा ऐसे भूराजनीतिक माहौल में हो रही है जब पश्चिमी देशों के साथ रूस के संबंध तनावपूर्ण हैं और चीन अपनी मध्यस्थ भूमिका को रेखांकित करता रहा है। आलोचकों का कहना है कि यह साझेदारी पश्चिमी दबाव के जवाब में और गहरी होती जा रही है। दोनों देशों के बीच व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और सैन्य-तकनीकी सहयोग के विस्तार की उम्मीद इस दौरे से जुड़ी है। आने वाले दिनों में इस वार्ता के नतीजे वैश्विक कूटनीतिक समीकरणों पर असर डाल सकते हैं।