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सोमवार को बाबा महाकाल के दरबार में उमड़ी भक्तों की संख्या, चंद्र धारण कर सजे बाबा

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सोमवार को बाबा महाकाल के दरबार में उमड़ी भक्तों की संख्या, चंद्र धारण कर सजे बाबा

सारांश

उज्जैन के बाबा महाकालेश्वर मंदिर में सोमवार को भक्तों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। भस्म आरती में बाबा के दर्शन से भक्तों का मन आनंदित हो गया। जानिए कैसे इस विशेष अवसर पर आयोजित हुई आरती और क्या हैं इसके नए नियम।

मुख्य बातें

महाकालेश्वर मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी।
भस्म आरती का आयोजन विशेष महत्व रखता है।
भक्तों के लिए ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा उपलब्ध है।
बाबा के दर्शन से भक्तों का मन आनंदित हुआ।
गर्मियों में आरती के नियमों में बदलाव किया गया है।

उज्जैन, 20 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। उज्जैन के प्रसिद्ध बाबा महाकालेश्वर मंदिर में सोमवार को भक्तों की भीड़ उमड़ रही है। भक्त सुबह से ही बाबा के दर्शन के लिए लंबी कतारों में खड़े हैं, जो सामान्य दिनों की तुलना में अधिक है। आज की भस्म आरती में भक्तों ने बाबा के दोनों निराकार और साकार रूपों के दर्शन कर आनंद का अनुभव किया। मंदिर परिसर 'हर-हर महादेव' के जयकारों से गूंज उठा।

महाकालेश्वर में भस्म आरती से पहले वीरभद्र से आज्ञा लेकर मंदिर के कपाट खोले गए। इसके बाद बाबा को हरिओम जल चढ़ाया गया, जो कोटितीर्थ कुंड से लाया जाता है। इसके बाद पंचामृत से अभिषेक किया गया और बाबा का भव्य शृंगार किया गया। बाबा के मस्तक पर बेलपत्र और चंद्र धारण कराए गए त्रिपुर तिलक लगाया गया, और वस्त्र उड़ाने के बाद भस्म आरती संपन्न हुई।

सोमवार के दिन बड़ी संख्या में भक्त बाबा महाकाल के दरबार में पहुंचे और भस्म आरती में बाबा महाकाल का आशीर्वाद लिया। उल्लेखनीय है कि प्रतिदिन भस्म आरती के बाद बाबा का दिव्य शृंगार किया जाता है, जिसके दर्शन के लिए देश-विदेश से लोग आते हैं। हाल ही में अक्षय तृतीया के दिन बाबा का शृंगार शेषनाग के साथ किया गया था।

भस्म आरती महाकाल मंदिर की सबसे विशेष आरती मानी जाती है। इस आरती में बाबा साकार और निराकार दोनों रूपों में भक्तों को दर्शन देते हैं। बाबा का निराकार रूप जन्म और मृत्यु से परे माना जाता है, जबकि बाबा का साकार रूप सांसारिक होता है। इन दोनों रूपों के माध्यम से बाबा संसार के दो अलग-अलग पहलुओं को दर्शाते हैं। गर्मियों के चलते भस्म आरती के नियमों में बदलाव किए गए हैं।

अब भस्म आरती के लिए ऑनलाइन बुकिंग एक दिन पहले की जा सकेगी। पहले भक्त मंदिर के काउंटर पर जाकर भस्म आरती की टिकट लेते थे, लेकिन अब सीमित शुल्क के साथ एक दिन पहले ऑनलाइन टिकट प्राप्त की जा सकती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भक्तों की श्रद्धा और महाकालेश्वर की महिमा का भी परिचायक है। बाबा महाकाल का दर्शन करने के लिए भक्तों की भीड़ यह दर्शाती है कि उनकी आस्था कितनी प्रबल है।
RashtraPress
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भस्म आरती के लिए ऑनलाइन बुकिंग कैसे करें?
भस्म आरती के लिए ऑनलाइन बुकिंग एक दिन पहले की जा सकती है, जिसमें सीमित शुल्क लिया जाता है।
हरिओम जल क्यों चढ़ाया जाता है?
हरिओम जल कोटितीर्थ कुंड से लाया जाता है, जो बाबा महाकाल की पूजा में महत्वपूर्ण माना जाता है।
बाबा महाकाल का निराकार रूप क्या है?
बाबा का निराकार रूप जन्म और मृत्यु से परे माना जाता है, जो अनंतता का प्रतीक है।
बाबा महाकाल का शृंगार कैसे किया जाता है?
बाबा का शृंगार भांग, सूखे मेवे, बेलपत्र और चंद्र तिलक से किया जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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