जेपीएससी-जेएसएससी विवाद: बाबूलाल मरांडी ने 8 घंटे में 20 पोस्ट, 3 फेसबुक लाइव — छात्र आंदोलन को बताया 'अगस्त क्रांति'
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड में जेपीएससी-जेएसएससी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरुद्ध जारी छात्र आंदोलन के बीच नेता प्रतिपक्ष एवं भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता बाबूलाल मरांडी ने सोमवार, 10 अगस्त को डिजिटल मोर्चे पर सरकार पर तीखा हमला बोला। शाम साढ़े चार बजे तक उन्होंने अपने सोशल मीडिया हैंडल से करीब 20 पोस्ट साझा किए और तीन बार फेसबुक लाइव के ज़रिए आंदोलन तथा सरकारी कार्रवाई पर अपनी प्रतिक्रिया दर्ज कराई।
हिरासत का मुद्दा
मरांडी ने बताया कि सुबह मुख्यमंत्री आवास के घेराव के दौरान उन्हें और BJP के कई विधायकों एवं नेताओं को हिरासत में लिया गया। उनके अनुसार, BJP विधायक छात्रों की मांगों को लेकर मुख्यमंत्री से मिलने जा रहे थे, परंतु मुख्यमंत्री आवास के बाहर ही उन्हें रोक दिया गया और बाद में खेलगांव स्थित कैंप जेल में डिटेन कर दिया गया।
छात्रों पर पुलिस कार्रवाई का विरोध
मरांडी ने आरोप लगाया कि अपने हक और अधिकार की मांग कर रहे युवाओं पर पुलिस ने लाठियाँ बरसाईं और कई छात्र घायल हुए हैं। उन्होंने सरकार पर संवेदनहीनता का आरोप लगाते हुए कहा कि बारिश के बीच छात्रों को धरना स्थल पर टेंट लगाने की अनुमति नहीं दी गई और इसके बाद प्रदर्शनकारियों पर वाटर कैनन का इस्तेमाल किया गया।
सरकार पर 'तानाशाही' का आरोप
मरांडी ने सरकार पर 'तानाशाही' का आरोप लगाते हुए कहा कि आंदोलन को दबाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा, "पानी की बौछार से छात्रों की आवाज़ दबने वाली नहीं है।" उन्होंने इस छात्र संघर्ष को 'अगस्त क्रांति' की संज्ञा दी और कहा कि BJP का संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक छात्रों को न्याय नहीं मिलता।
सीबीआई जांच की मांग
छात्र पिछले 15 दिनों से जेपीएससी और जेएसएससी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और नौकरी बेचे जाने के आरोपों की सीबीआई जांच की माँग कर रहे हैं। मरांडी ने इस माँग को दोहराते हुए कहा कि जब तक यह माँग पूरी नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा। यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड में भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता को लेकर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं।
आगे क्या
गौरतलब है कि राज्य सरकार की ओर से अभी तक सीबीआई जांच की माँग पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। रांची में छात्र आंदोलन जारी है और राजनीतिक दबाव बढ़ने के साथ आने वाले दिनों में सरकार के रुख पर सभी की निगाहें टिकी हैं।