बाबूलाल मरांडी का आरोप: झामुमो-कांग्रेस सरकार एमएमडीआर की आड़ में छात्र आंदोलन से भटका रही ध्यान
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने रांची में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश कार्यालय में सोमवार, 17 अगस्त को आयोजित प्रेसवार्ता में झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के नेतृत्व वाली राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक (एमएमडीआर) पर सत्तारूढ़ गठबंधन का विरोध महज राजनीतिक नाटक है, जिसका असली मकसद जेपीएससी और जेएसएससी की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलनरत छात्रों के मुद्दे से जनता का ध्यान भटकाना है।
छात्र आंदोलन और एमएमडीआर का कथित संबंध
मरांडी ने कहा कि झारखंड में छात्र पिछले कई दिनों से जेपीएससी और जेएसएससी भर्ती परीक्षाओं में कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के विरुद्ध सड़कों पर हैं। उनके अनुसार, राज्य सरकार इस संवेदनशील मुद्दे पर जवाब देने के बजाय एमएमडीआर संशोधन का विरोध आगे कर जनता का ध्यान बाँटने की कोशिश कर रही है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में युवाओं का रोजगार संकट राजनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील मुद्दा बन चुका है।
एमएमडीआर पर राज्य के आरोप खारिज
मरांडी ने स्पष्ट किया कि एमएमडीआर संशोधन विधेयक का उद्देश्य राज्यों का खनन राजस्व छीनना नहीं है। उन्होंने दावा किया कि रॉयल्टी, जिला खनिज फाउंडेशन (डीएमएफ), राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण ट्रस्ट (एनएमईटी), नीलामी प्रीमियम और जीएसटी में राज्यों की हिस्सेदारी पूर्ववत बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि खनन क्षेत्र से होने वाले कुल भुगतानों का करीब 90 प्रतिशत राज्यों को मिलता रहेगा।
आँकड़ों के हवाले से उन्होंने बताया कि 2014-15 से 2024-25 के बीच राज्यों का खनिज राजस्व करीब 354 प्रतिशत बढ़ा है — ₹25,206 करोड़ से बढ़कर ₹1,14,549 करोड़ हो गया। इसी अवधि में कुल खनिज राजस्व में राज्यों की हिस्सेदारी 60 प्रतिशत से बढ़कर 88 प्रतिशत से अधिक हो गई है।
झारखंड की खनन नीति पर सवाल
मरांडी ने झारखंड सरकार की खनिज नीति की तीखी आलोचना की। उन्होंने कहा कि पिछले छह वर्षों में राज्य में केवल चार खदानों की नीलामी हुई और उनमें से एक भी अभी तक उत्पादन में नहीं आ सकी। इसके विपरीत, ओडिशा में 35 खदानें संचालन में आईं और वहाँ करीब ₹87,000 करोड़ का नीलामी प्रीमियम प्राप्त हुआ।
गौरतलब है कि झारखंड के पास देश के करीब 40 प्रतिशत खनिज भंडार हैं, फिर भी राज्य इस संपदा का प्रभावी उपयोग नहीं कर पा रहा — यह विरोधाभास मरांडी के निशाने पर रहा। उन्होंने लौह अयस्क और कोयले पर लगाए गए उपकर को लेकर भी राज्य सरकार की नीति पर सवाल उठाए।
डीएमएफ फंड के उपयोग पर जवाब माँगा
मरांडी ने कहा कि झारखंड में डीएमएफ के तहत करीब ₹19,000 करोड़ जमा हैं, लेकिन सरकार यह स्पष्ट नहीं कर रही कि इस राशि का उपयोग खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए किस प्रकार किया जा रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि लघु खनिज, बालू और पत्थर पर एमएमडीआर संशोधन का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा और इन पर राज्यों का नियंत्रण पूर्ववत रहेगा।
संसद में JMM-कांग्रेस सांसदों की भूमिका पर सवाल
मरांडी ने संसद में एमएमडीआर संशोधन विधेयक पर JMM-कांग्रेस सांसदों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि राज्य सरकार इस विधेयक को झारखंड के हितों के विरुद्ध मानती है, तो उसे तथ्यों के साथ अपनी बात रखनी चाहिए — केवल राजनीतिक बयानबाजी से काम नहीं चलेगा। आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि राज्य सरकार छात्र आंदोलन और खनन राजस्व के मुद्दे पर क्या ठोस कदम उठाती है।