18 अगस्त 2026
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जेएसएससी परीक्षा रद्द: बाबूलाल मरांडी बोले — सीबीआई जांच के बिना छात्रों को न्याय नहीं

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जेएसएससी परीक्षा रद्द: बाबूलाल मरांडी बोले — सीबीआई जांच के बिना छात्रों को न्याय नहीं

सारांश

जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द करना सरकार की सफाई नहीं, बल्कि मरांडी की नज़र में यह असली सवाल से बचने की कोशिश है। नेपाल और पश्चिम बंगाल तक फैले कथित पेपर लीक नेटवर्क की सीबीआई जांच की मांग के साथ BJP ने झारखंड के छात्र आंदोलन को राजनीतिक धार दे दी है।

मुख्य बातें

बाबूलाल मरांडी ने 18 अगस्त 2026 को कहा कि जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द करना पर्याप्त नहीं, सीबीआई जांच ज़रूरी है।
उन्होंने हेमंत सोरेन सरकार पर आरोप लगाया कि वह जांच का दायरा सीमित रखकर कथित बिचौलियों को बचा रही है।
कथित पेपर लीक का नेटवर्क नेपाल , पश्चिम बंगाल और झारखंड के विभिन्न स्थानों तक फैला बताया गया।
जेएसएससी अध्यक्ष और पूर्व जांच अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए।
मरांडी ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर आरोप लगाया कि वे राज्य सरकार की साझेदारी के कारण छात्रों की आवाज़ नहीं उठा रहे।
BJP ने घोषणा की कि वह सीबीआई जांच का आदेश होने तक यह मुद्दा उठाती रहेगी।

झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने 18 अगस्त 2026 को स्पष्ट कहा कि जेएसएससी-सीजीएल और टीडीपीएल एजेंसी के माध्यम से आयोजित परीक्षाओं को रद्द करने का राज्य सरकार का फैसला समस्या का समाधान नहीं है। उनके अनुसार, जब तक पूरे मामले की सीबीआई जांच नहीं होती, तब तक झारखंड के छात्रों को वास्तविक न्याय नहीं मिल सकता।

मुख्य घटनाक्रम

रांची स्थित भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश कार्यालय में मीडिया को संबोधित करते हुए मरांडी ने आरोप लगाया कि हेमंत सोरेन की सरकार ने छात्रों को दिग्भ्रमित करने के उद्देश्य से कैबिनेट में परीक्षाएं रद्द करने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि सरकार एक ओर इस फैसले का श्रेय लेना चाहती है, और दूसरी ओर मामले को अदालत में ले जाकर न्यायिक प्रक्रिया की आड़ में छिपने की कोशिश कर सकती है।

मरांडी ने कहा, 'बच्चों की एक ही मांग रही है कि पूरे मामले की सीबीआई जांच हो। आखिर सरकार सीबीआई जांच से क्यों भाग रही है?' उन्होंने जेपीएससी और जेएसएससी की नियुक्तियों में कथित अनियमितताओं और नौकरियों की खरीद-फरोख्त में प्रभावशाली लोगों की संलिप्तता की स्वतंत्र जांच को अनिवार्य बताया।

कथित गड़बड़ियों का दायरा

नेता प्रतिपक्ष ने नेपाल, पश्चिम बंगाल और झारखंड के विभिन्न स्थानों पर अभ्यर्थियों को कथित तौर पर प्रश्नपत्र पहले से उपलब्ध कराए जाने और तैयारी कराए जाने के आरोपों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में आम अभ्यर्थियों के लिए साक्ष्य जुटाना अत्यंत कठिन है, इसलिए किसी स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी से जांच कराना अपरिहार्य है।

मरांडी ने जेएसएससी के अध्यक्ष और पूर्व जांच अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि जिन अधिकारियों और पदाधिकारियों की भूमिका को लेकर प्रश्न उठ रहे हैं, उनके विरुद्ध भी ठोस कार्रवाई होनी चाहिए। उनके अनुसार, राज्य सरकार जांच का दायरा सीमित रखकर अपने लोगों और कथित बिचौलियों को बचाने का प्रयास कर रही है।

न्यायिक जोखिम और आगे की चुनौती

मरांडी ने आगाह किया कि परीक्षा रद्द होने के बाद चयनित अभ्यर्थी अदालत का रुख कर सकते हैं। ऐसे में अदालत सरकार और जांच एजेंसी से कथित गड़बड़ी के साक्ष्य माँग सकती है। उन्होंने कहा कि यदि मौजूदा जांच एजेंसी ही अदालत में रिपोर्ट पेश करती है, तो पहले की जांच में उठे सवालों के कारण छात्रों के सामने फिर से कानूनी उलझनें पैदा हो सकती हैं।

राजनीतिक प्रतिक्रिया

मरांडी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी निशाना साधा और आरोप लगाया कि कांग्रेस राज्य सरकार की साझेदार होने के कारण छात्र हितों के इस मुद्दे पर प्रभावी आवाज़ नहीं उठा रही। उन्होंने झारखंड के छात्रों और युवाओं से सीबीआई जांच की मांग पर अडिग रहने की अपील करते हुए कहा कि BJP तब तक यह मुद्दा उठाती रहेगी, जब तक सीबीआई जांच का आदेश नहीं होता।

आगे क्या होगा

यह मामला ऐसे समय में और उलझा है जब झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता पहले से सवालों के घेरे में है। गौरतलब है कि राज्य में भर्ती प्रक्रियाओं में अनियमितता के आरोप नए नहीं हैं — यह कई वर्षों से चली आ रही शिकायतों की कड़ी में एक और अध्याय है। अब सभी की निगाहें इस पर हैं कि सरकार सीबीआई जांच की मांग पर क्या रुख अपनाती है और न्यायालय में मामला किस दिशा में जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह मूल प्रश्न को टालता है — कथित पेपर लीक नेटवर्क में कौन शामिल था और उसे किसने संरक्षण दिया? झारखंड में भर्ती घोटालों की यह कोई पहली कड़ी नहीं है; जेपीएससी विवाद से लेकर अब तक राज्य की परीक्षा प्रणाली की साख बार-बार सवालों में रही है। मरांडी की सीबीआई मांग विपक्ष की रणनीतिक चाल भी है, लेकिन इसमें एक वैध सार्वजनिक हित का सवाल भी छिपा है — क्या राज्य की एजेंसी उन्हीं अधिकारियों की जांच कर सकती है जिन पर खुद संदेह है? जब तक जांच की स्वतंत्रता और पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं होती, लाखों ईमानदार अभ्यर्थियों का भरोसा बहाल करना मुश्किल रहेगा।
RashtraPress
18 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द क्यों की गई?
झारखंड सरकार ने जेएसएससी-सीजीएल और टीडीपीएल एजेंसी के माध्यम से आयोजित परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के आरोपों के बाद इन्हें रद्द किया। छात्रों ने पेपर लीक और नियुक्तियों में अनियमितता का आरोप लगाया था।
बाबूलाल मरांडी सीबीआई जांच की मांग क्यों कर रहे हैं?
मरांडी का कहना है कि कथित पेपर लीक नेटवर्क नेपाल , पश्चिम बंगाल और झारखंड के कई स्थानों तक फैला है, जिसकी जांच राज्य एजेंसी के लिए संभव नहीं। उनके अनुसार, केवल एक स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी ही पूरे नेटवर्क और इसमें शामिल प्रभावशाली लोगों की भूमिका उजागर कर सकती है।
परीक्षा रद्द होने के बाद चयनित अभ्यर्थियों का क्या होगा?
मरांडी ने आगाह किया है कि परीक्षा रद्द होने के बाद चयनित अभ्यर्थी अदालत का रुख कर सकते हैं। ऐसे में अदालत सरकार और जांच एजेंसी से कथित गड़बड़ी के साक्ष्य माँग सकती है, जिससे छात्रों के सामने नई कानूनी उलझनें पैदा हो सकती हैं।
कांग्रेस और राहुल गांधी पर मरांडी का क्या आरोप है?
मरांडी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस झारखंड में सत्तारूढ़ गठबंधन की साझेदार है, इसलिए वह छात्र हितों के इस मुद्दे पर प्रभावी आवाज़ नहीं उठा रही। उन्होंने राहुल गांधी को इस मामले में चुप्पी के लिए जिम्मेदार ठहराया।
BJP का इस मामले में क्या रुख है?
BJP ने स्पष्ट किया है कि वह झारखंड के छात्रों के साथ खड़ी है और जब तक पूरे मामले की सीबीआई जांच का आदेश नहीं होता, तब तक यह मुद्दा उठाती रहेगी। मरांडी ने छात्रों से भी इस मांग पर अडिग रहने की अपील की।
राष्ट्र प्रेस
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