13 सितंबर 2026
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जेएसएससी नियुक्ति घोटाला: सीआईडी जांच पर बाबूलाल मरांडी के गंभीर आरोप, सीबीआई जांच की मांग

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जेएसएससी नियुक्ति घोटाला: सीआईडी जांच पर बाबूलाल मरांडी के गंभीर आरोप, सीबीआई जांच की मांग

सारांश

झारखंड जेएसएससी नियुक्ति घोटाले में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सीआईडी पर बड़े आरोप लगाए हैं — बड़े नेताओं और अफसरों को बचाने के लिए बयानों से नाम हटाए जा रहे हैं। मरांडी ने सीबीआई जांच और सभी डिजिटल साक्ष्यों की सुरक्षा की माँग मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से की है।

मुख्य बातें

नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने 13 सितंबर 2026 को आरोप लगाया कि सीआईडी जांच में प्रभावशाली नेताओं व अफसरों के नाम बयानों से हटवाए जा रहे हैं।
जांच के छोटे अधिकारियों ने कथित तौर पर नाम न उजागर करने की शर्त पर मरांडी को शिकायतें दी हैं।
अनुराग गुप्ता की भूमिका को लेकर जांच की शुरुआती दिशा पर भी सवाल उठाए गए; छात्र-विरोध के बाद ही कार्रवाई में बदलाव आया।
मनोज कौशिक की अगुआई में चल रही सीआईडी जांच पर आरोप — छोटे आरोपी पकड़े जा रहे हैं, बड़े सरगना बच रहे हैं।
मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से सीबीआई जांच की अनुशंसा और मूल वीडियो रिकॉर्डिंग व डिजिटल साक्ष्यों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की माँग की।
नियुक्ति परीक्षाओं में अनियमितता का सीधा असर झारखंड के बेरोज़गार युवाओं और छात्रों के भविष्य पर बताया गया।

झारखंड में जेएसएससी नियुक्ति घोटाले की जांच कर रही सीआईडी पर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने 13 सितंबर 2026 को गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि जांच में शामिल अधिकारियों पर प्रभावशाली नेताओं, वरिष्ठ अफसरों या उनके कथित बिचौलियों से जुड़े नामों को बयानों में दर्ज न करने का दबाव बनाया जा रहा है।

क्या हैं मरांडी के आरोप

मरांडी के अनुसार, जांच से जुड़े कुछ छोटे अधिकारियों ने नाम उजागर न करने की शर्त पर उन्हें ऐसी शिकायतें सौंपी हैं। उन्होंने दावा किया कि पूछताछ के दौरान यदि कोई व्यक्ति रिश्वत के लेन-देन में किसी बड़े नेता, अधिकारी या बिचौलिए की भूमिका का ज़िक्र करता है, तो कथित तौर पर उस हिस्से को बयान से हटाने का दबाव बनाया जाता है।

नेता प्रतिपक्ष ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि ये शिकायतें सही साबित होती हैं, तो यह जांच की आड़ में सच्चाई दबाने और प्रभावशाली लोगों को बचाने का अत्यंत गंभीर मामला है।

जांच की पुरानी दिशा पर भी सवाल

मरांडी ने सीआईडी की जांच की शुरुआती दिशा को लेकर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि पहले अनुराग गुप्ता की भूमिका को लेकर जांच को कथित तौर पर गलत दिशा में ले जाने, साक्ष्य नष्ट करने और नियुक्ति घोटाले से इनकार करने जैसे गंभीर सवाल उठे थे। गौरतलब है कि छात्रों और बेरोज़गार युवाओं के तीव्र विरोध के बाद ही सीआईडी की कार्रवाई के तेवर बदले।

उन्होंने सवाल किया कि जांच के शुरुआती रुख की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए — आखिर दबाव पड़ने से पहले जांच क्यों सुस्त थी।

मनोज कौशिक की अगुआई में चल रही जांच पर आपत्ति

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि अब मनोज कौशिक के नेतृत्व में जारी सीआईडी जांच को लेकर भी शिकायतें आ रही हैं कि छोटे आरोपियों को तो पकड़ा जा रहा है, लेकिन बड़े आरोपियों और कथित सरगनाओं को बचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इन आरोपों का जवाब केवल निष्पक्ष जांच और सुरक्षित साक्ष्यों के ज़रिए दिया जा सकता है।

सीबीआई जांच और साक्ष्य सुरक्षा की मांग

मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से बिना देरी किए पूरे मामले की सीबीआई जांच की अनुशंसा करने की माँग की है। साथ ही उन्होंने यह भी अपील की कि जांच से जुड़े मूल बयान, वीडियो रिकॉर्डिंग और सभी डिजिटल साक्ष्यों को बिना किसी काट-छाँट के सुरक्षित रखा जाए।

उन्होंने कहा कि बयान दर्ज करने की पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग होनी चाहिए, ताकि किसी भी तरह की हेरफेर की संभावना खत्म हो सके।

युवाओं के भविष्य पर सीधा असर

मरांडी ने यह भी रेखांकित किया कि नियुक्ति परीक्षाओं में अनियमितता का असर सीधे छात्रों और बेरोज़गार युवाओं के भविष्य पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि मामले में केवल कथित घोटाले की ही नहीं, बल्कि जांच को प्रभावित करने या साक्ष्य दबाने की शिकायतों की भी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।

उनका कहना था कि जिन अधिकारियों के पुराने कार्यकाल से जुड़े गंभीर आरोप या प्रमाण सामने आते हैं, उनकी भी निष्पक्ष जांच ज़रूरी है। युवाओं के साथ हुए अन्याय की ज़िम्मेदारी तय होनी चाहिए और दोषियों के साथ-साथ उन्हें बचाने वालों की भूमिका की भी पड़ताल होनी चाहिए।

यह आरोप ऐसे समय में आए हैं जब झारखंड में नियुक्ति परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर छात्र संगठन लगातार सड़कों पर हैं। सीबीआई जांच की माँग अब राजनीतिक गलियारों से निकलकर जन आंदोलन का रूप लेती दिख रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

इनमें एक वैध संरचनात्मक चिंता है — भारत में राज्य-नियंत्रित जांच एजेंसियाँ अक्सर उन्हीं सरकारों के प्रति जवाबदेह होती हैं जिनके अधिकारियों की वे जांच कर रही होती हैं। जेएसएससी मामले में यदि बयानों से नाम हटाने का दबाव सच है, तो यह साक्ष्य-संरक्षण की नहीं, साक्ष्य-विनाश की प्रक्रिया है। सीबीआई जांच की माँग उचित है, लेकिन यह भी ध्यान रहे कि सीबीआई स्वयं केंद्र सरकार के अधीन है — असली सवाल यह है कि क्या कोई भी एजेंसी राजनीतिक संरक्षण के बिना निष्पक्ष जांच कर सकती है। झारखंड के युवाओं का भविष्य इस जवाबदेही पर टिका है।
RashtraPress
13 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जेएसएससी नियुक्ति घोटाला क्या है और इसमें सीआईडी की भूमिका क्या है?
जेएसएससी (झारखंड कर्मचारी चयन आयोग) नियुक्ति घोटाला झारखंड में सरकारी नियुक्ति परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं से जुड़ा मामला है। इसकी जांच राज्य की आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) कर रही है, जिस पर अब नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने पक्षपाती रवैये के आरोप लगाए हैं।
बाबूलाल मरांडी ने सीआईडी पर क्या आरोप लगाए हैं?
मरांडी का आरोप है कि जांच के दौरान पूछताछ में यदि कोई व्यक्ति किसी बड़े नेता, अफसर या बिचौलिए की भूमिका बताता है, तो उस हिस्से को बयान से हटाने का दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने यह जानकारी कुछ छोटे अधिकारियों से नाम न उजागर करने की शर्त पर मिली बताई है।
मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से क्या माँगें की हैं?
मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से बिना देरी के पूरे मामले की सीबीआई जांच की अनुशंसा करने की माँग की है। साथ ही उन्होंने सभी मूल बयान, वीडियो रिकॉर्डिंग और डिजिटल साक्ष्यों को बिना किसी काट-छाँट के सुरक्षित रखने की व्यवस्था सुनिश्चित करने की अपील भी की है।
जांच में अनुराग गुप्ता और मनोज कौशिक का नाम क्यों आया?
मरांडी के अनुसार, पहले अनुराग गुप्ता की भूमिका को लेकर जांच को कथित तौर पर गलत दिशा में ले जाने के आरोप लगे थे। बाद में छात्र-विरोध के बाद सीआईडी की कार्रवाई बदली। अब मनोज कौशिक के नेतृत्व में चल रही जांच पर आरोप है कि छोटे आरोपियों को पकड़ा जा रहा है और बड़े सरगनाओं को बचाया जा रहा है।
इस मामले का झारखंड के युवाओं पर क्या असर पड़ रहा है?
नियुक्ति परीक्षाओं में अनियमितता का सीधा असर उन छात्रों और बेरोज़गार युवाओं पर पड़ता है जिन्होंने वर्षों तैयारी की। मरांडी का कहना है कि यदि जांच निष्पक्ष नहीं हुई और दोषियों को बचाया गया, तो युवाओं के साथ हुए अन्याय की ज़िम्मेदारी कभी तय नहीं होगी।
राष्ट्र प्रेस
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