जेपीएससी घोटाले की सीबीआई जांच हो, झारखंड सरकार दोषियों को बचा रही है: बाबूलाल मरांडी
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने 27 जुलाई 2025 को रांची स्थित प्रदेश भाजपा कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में जेपीएससी 14वीं संयुक्त असैनिक सेवा परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर राज्य की हेमंत सोरेन सरकार पर कड़ा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि यह मामला कोई प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि सुनियोजित घोटाला है और राज्य सरकार सीआईडी जांच की आड़ में असली दोषियों को बचा रही है। मरांडी ने पूरे विवाद की जांच सीबीआई को सौंपने की माँग की।
मुख्य आरोप और घोटाले का स्वरूप
मरांडी के अनुसार, जेपीएससी 14वीं परीक्षा में प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार — तीनों स्तरों पर अभ्यर्थियों से अवैध वसूली की गई। उनका आरोप है कि राज्य में सरकारी नौकरियों के बदले बड़े पैमाने पर पैसे लिए जाते हैं और सरकार जानबूझकर विवादास्पद अधिकारियों को महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्त करती है, जिससे भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता प्रभावित होती है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि जनवरी 2025 में कर्नाटक के एक अभ्यर्थी ने तत्कालीन जेपीएससी अध्यक्ष को पत्र लिखकर ओएमआर शीट में कथित गड़बड़ी और परीक्षा से जुड़े एक व्यक्ति द्वारा पैसे वसूले जाने की शिकायत की थी, परंतु उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।
आयोग के अध्यक्ष के इस्तीफे पर सवाल
आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष एल. ख्यांग्ते के इस्तीफे का उल्लेख करते हुए मरांडी ने कहा कि केवल इस्तीफा पर्याप्त नहीं है। उन्होंने माँग की कि ख्यांग्ते के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर उनकी भूमिका की भी जांच की जाए। मरांडी ने यह भी कहा कि प्राथमिकी अब तक सार्वजनिक नहीं की गई है, जो जांच की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करती है।
सीआईडी जांच पर अविश्वास
मरांडी ने मामले की जांच प्रक्रिया पर भी आपत्ति जताई। उनके अनुसार, प्राथमिकी में भ्रष्टाचार निवारण कानून की धाराएं नहीं लगाई गई हैं और सामान्य धाराओं में दर्ज एफआईआर से आरोपियों को कानूनी लाभ मिल सकता है। उन्होंने पूर्व उदाहरण का हवाला देते हुए कहा कि जेएसएससी सीजीएल परीक्षा मामले में भी सीआईडी जांच से कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया था। उन्होंने सीआईडी के वरिष्ठ अधिकारियों से निष्पक्ष जांच की अपील करते हुए कहा कि जांच किसी राजनीतिक दबाव से प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री सोरेन से सीधी अपील
नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से सीधे आग्रह किया कि यदि सरकार की इस मामले में कोई संलिप्तता नहीं है, तो पूरे जेपीएससी विवाद की जांच सीबीआई को सौंपी जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं की गई, तो राज्य के युवा आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।
आगे क्या
यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड में परीक्षा घोटालों को लेकर युवाओं में पहले से असंतोष है। गौरतलब है कि जेएसएससी सीजीएल मामला अभी भी विवादों में है। सीबीआई जांच की माँग को लेकर भाजपा के राजनीतिक दबाव से सरकार की अगली प्रतिक्रिया और न्यायालय में किसी याचिका की संभावना पर अब सबकी निगाहें टिकी हैं।