जेपीएससी-जेएसएससी भर्ती घोटाला: बाबूलाल मरांडी ने मांगी सीबीआई जांच, अधिकारियों की बर्खास्तगी की अपील
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने 3 अगस्त को आरोप लगाया कि झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) के ज़रिए राज्य में खुलेआम नौकरियाँ बेची गई हैं। उन्होंने इस पूरे मामले की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जाँच कराने और दोषी अधिकारियों की तत्काल गिरफ्तारी की माँग की है।
क्या हैं आरोप
मरांडी ने सोमवार को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर जारी पोस्ट में दावा किया कि दलालों ने अभ्यर्थियों को नेपाल, बिहार और पश्चिम बंगाल ले जाकर 135 से 150 प्रश्न रटवाए, जिनमें से कथित तौर पर करीब 120 प्रश्न परीक्षा में हूबहू पूछे गए। उनका आरोप है कि परीक्षा केंद्रों पर इंटरनेट सेवा जानबूझकर बंद करवाकर इस धांधली को अंजाम दिया गया।
मरांडी ने यह भी दावा किया कि जेएसएससी ने 26,000 आचार्य नियुक्ति परीक्षा का परिणाम एक साथ जारी करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से घोषित किया, और इसके पीछे कथित रूप से पैसों का लेन-देन था।
जाँच टीम बदले जाने का आरोप
नेता प्रतिपक्ष ने दावा किया कि सीआईडी की तत्कालीन जाँच अधिकारी संध्या रानी और निधि पांडेय की प्रारंभिक जाँच सही दिशा में आगे बढ़ रही थी, जिसकी पुष्टि पुरानी डायरी से भी होती है। उनका आरोप है कि सच्चाई सामने आने से रोकने के लिए राज्य सरकार ने जाँच टीम बदल दी।
मनोज कौशिक पर निशाना
मरांडी ने आरोप लगाया कि सरकार ने मनोज कौशिक को सीआईडी का एडीजी नियुक्त कर जाँच को प्रभावित करने का प्रयास किया। उनके अनुसार, हजारीबाग के पुलिस अधीक्षक रहते हुए कौशिक पर कोयले के अवैध कारोबार से जुड़े आरोप लगे थे और इस संबंध में लंबित एसीबी जाँच को सरकार ने कथित तौर पर दबाकर रखा है। उन्होंने कहा कि ऐसे अधिकारियों के माध्यम से सरकार दोषियों को संरक्षण दे रही है।
छात्र आंदोलन को समर्थन की अपील
मरांडी ने झारखंड की जनता से छात्रों के आंदोलन को तन, मन और धन से समर्थन देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई झारखंड के भविष्य को बचाने की लड़ाई है। गौरतलब है कि भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर राज्य में छात्र लंबे समय से आंदोलनरत हैं।
क्या होगा आगे
मरांडी ने माँग की है कि जेपीएससी और जेएसएससी के अध्यक्ष, परीक्षा नियंत्रक और सचिव को तत्काल बर्खास्त किया जाए, संबंधित अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हो और पूरे मामले की सीबीआई जाँच सुनिश्चित की जाए। यह देखना बाकी है कि राज्य सरकार इन माँगों पर क्या रुख अपनाती है।