जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षा धांधली: 100 से अधिक अभ्यर्थियों से पूछताछ, सीआईडी जांच का दायरा विस्तृत
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधली की जांच रांची में तेज़ी से विस्तृत होती जा रही है। सीआईडी-एसआईटी ने मुख्य आरोपी अभय तिवारी से पूछताछ और उसके कथित खुलासों के आधार पर अब तक 100 से अधिक अभ्यर्थियों से पूछताछ की है। मंगलवार, 26 अगस्त 2025 को भी लगभग 20 अभ्यर्थियों को पूछताछ के लिए नोटिस जारी किए गए।
मुख्य आरोपी की पृष्ठभूमि और कथित भूमिका
अभय तिवारी पूर्व में गोड्डा जिले के पोड़ैयाहाट में ब्लॉक सप्लाई ऑफिसर के पद पर तैनात था। सरकारी सेवा में आने से पहले वह परीक्षा आयोजन से जुड़ी आउटसोर्सिंग एजेंसी टीडीपीएल में मार्केटिंग मैनेजर के रूप में कार्यरत था। जांच के अनुसार, उसने कथित सेटिंग के ज़रिए खुद पाँच से अधिक परीक्षाओं में सफलता हासिल की थी। उसके भाई अक्षय तिवारी और पत्नी सुषमा कुमारी की गिरफ्तारी भी हो चुकी है, और दोनों से कथित आर्थिक लेनदेन व परीक्षा धांधली से जुड़े संपर्कों की जानकारी जुटाई जा रही है।
कथित रेट कार्ड: किस परीक्षा में कितनी रकम
पूछताछ के दौरान अभय तिवारी ने कथित तौर पर प्रतियोगी परीक्षाओं में चयन के लिए होने वाले सौदों का चौंकाने वाला ब्यौरा दिया है। उसके बयानों के अनुसार, सिविल सेवा परीक्षा में प्रारंभिक परीक्षा पास कराने के लिए करीब ₹5 लाख, मुख्य परीक्षा के लिए ₹10 लाख और अंतिम चयन के लिए ₹40 से ₹60 लाख तक वसूले जाते थे। फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर के लिए ₹20 से ₹25 लाख और असिस्टेंट कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट के लिए ₹30 से ₹35 लाख तक की रकम लिए जाने का दावा किया गया है। ये सभी आरोप अभी जांच के दायरे में हैं और सीआईडी द्वारा सत्यापित किए जा रहे हैं।
तकनीकी नेटवर्क की जांच
जांच एजेंसी इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर संदिग्ध अभ्यर्थियों, बिचौलियों और परीक्षा केंद्रों से जुड़े लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है। पीजीटी शिक्षक भर्ती परीक्षा में कथित तौर पर सॉफ्टवेयर और रिमोट एक्सेस के ज़रिए परीक्षार्थियों को मदद पहुँचाने की जानकारी भी सामने आई है। एजेंसी इस पूरे तकनीकी नेटवर्क और इसमें शामिल लोगों की भूमिका की गहन जांच कर रही है।
आयोग के अधिकारियों पर आरोप
जांच एजेंसी जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांगते सहित आयोग से जुड़े अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है। अभय तिवारी ने पूछताछ में कथित तौर पर दावा किया है कि टीडीपीएल को ठेका दिलाने के एवज में तत्कालीन जेपीएससी अध्यक्ष को ₹2 करोड़ दिए गए। जेपीएससी के पूर्व सदस्यों और जेएसएससी के सचिव सुधीर कुमार गुप्ता से भी पूछताछ की जा चुकी है। गौरतलब है कि ये सभी दावे अभी आरोपी के बयानों पर आधारित हैं और जांच जारी है।
विपक्ष की माँग और आगे की राह
विपक्षी दलों और छात्र संगठनों ने इस मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से कराने की माँग लगातार उठाई है। यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता पहले से ही सवालों के घेरे में है। सीआईडी-एसआईटी की जांच में जैसे-जैसे नए नाम और तथ्य सामने आएंगे, यह मामला और बड़ा रूप ले सकता है।