25 अगस्त 2026
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ईरान के खिलाफ अमेरिका का आर्थिक 'डी-डे': बेसेंट बोले — तेहरान को पूरी तरह अकेला करेंगे, नेतन्याहू ने दी बधाई

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ईरान के खिलाफ अमेरिका का आर्थिक 'डी-डे': बेसेंट बोले — तेहरान को पूरी तरह अकेला करेंगे, नेतन्याहू ने दी बधाई

सारांश

अमेरिका ने ईरान के खिलाफ आर्थिक 'डी-डे' का ऐलान किया — ट्रेजरी सेक्रेटरी बेसेंट ने तेहरान की हर वित्तीय जीवनरेखा काटने की कसम खाई। तीसरे देशों को भी चेतावनी दी गई। इजराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने ट्रंप और बेसेंट को बधाई देते हुए इसे 'उचित कदम' बताया।

मुख्य बातें

अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने 25 अगस्त 2026 को ईरान के खिलाफ बड़े आर्थिक अभियान की घोषणा की।
अभियान को द्वितीय विश्व युद्ध के 'डी-डे' से जोड़ते हुए कहा गया कि लक्ष्य तेहरान को पूरी तरह अलग-थलग करना है।
बेसेंट ने चेतावनी दी कि ईरान से वित्तीय संबंध रखने वाले तीसरे देशों को भी परिणाम भुगतने होंगे।
राष्ट्रपति ट्रंप की नीति को 'खतरे को नियंत्रित करना नहीं, बल्कि पूरी तरह खत्म करना' बताया गया।
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक्स पर पोस्ट कर ट्रंप और बेसेंट को नए प्रतिबंधों के लिए बधाई दी।

अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने 25 अगस्त 2026 को ईरान के खिलाफ एक बड़े आर्थिक अभियान की घोषणा की, जिसे उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध के 'डी-डे' से जोड़ते हुए 'दुनिया भर में ईरान के वित्तीय संबंधों पर हमला' बताया। वॉशिंगटन से जारी इस अभियान का लक्ष्य तेहरान की हर आर्थिक जीवनरेखा को काटकर उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पूरी तरह अलग-थलग करना है।

अभियान की घोषणा और बेसेंट का बयान

स्कॉट बेसेंट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'द्वितीय विश्व युद्ध में डी-डे उस ऐतिहासिक अभियान की शुरुआत थी, जिसमें हमने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर दुश्मन को उसके ठिकानों से, यहाँ तक कि तीसरे देशों में मौजूद ठिकानों से भी, निशाना बनाया और वहाँ से पीछे हटने पर मजबूर किया था। आज उसी भावना के साथ हम दुनिया भर में ईरान के वित्तीय संबंधों के खिलाफ एक बड़ा आर्थिक अभियान शुरू कर रहे हैं।'

बेसेंट ने स्पष्ट किया कि इस अभियान का उद्देश्य 'इस दमनकारी शासन को सहारा देने वाली हर आर्थिक जीवनरेखा को काट देना है, जब तक कि तेहरान पूरी तरह अकेला न पड़ जाए।' यह बयान ट्रंप प्रशासन की ईरान नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत देता है।

ट्रंप की नीति: 'खत्म करना है, संभालना नहीं'

बेसेंट ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐसा कदम उठाया है जिसे उनके पूर्ववर्ती लंबे समय से टालते रहे थे। उनके अनुसार, ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका अब केवल ईरान से जुड़े खतरे को नियंत्रित करने की कोशिश नहीं कर रहा, बल्कि उसे 'पूरी तरह खत्म करने की दिशा में काम कर रहा है।'

यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु वार्ता लंबे समय से अटकी हुई है और मध्य-पूर्व में तनाव चरम पर है। गौरतलब है कि ट्रंप के पहले कार्यकाल में भी 'अधिकतम दबाव' की नीति अपनाई गई थी, और यह अभियान उसी रणनीति का विस्तार माना जा रहा है।

तीसरे देशों को भी चेतावनी

बेसेंट ने साफ शब्दों में कहा कि जो देश या संस्थाएँ 'खुद को तेहरान से जोड़कर रखेंगे, उन्हें एक कमजोर पड़ते और अलग-थलग होते जा रहे शासन के साथ अलगाव का सामना करना पड़ेगा।' दूसरी ओर, जो अमेरिका के साथ खड़े होंगे, उन्हें 'साझेदारी के फायदे मिलेंगे।'

यह चेतावनी विशेष रूप से उन देशों के लिए अहम है जो ईरानी तेल खरीदते हैं या ईरान के साथ वित्तीय लेन-देन रखते हैं। आलोचकों का कहना है कि इस तरह की द्वितीयक प्रतिबंध नीति कई देशों के साथ अमेरिका के व्यापारिक संबंधों को भी प्रभावित कर सकती है।

नेतन्याहू की प्रतिक्रिया

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक्स पर पोस्ट कर राष्ट्रपति ट्रंप और ट्रेजरी सेक्रेटरी बेसेंट को बधाई दी। नेतन्याहू ने लिखा, 'राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट को ईरानी शासन के खिलाफ लगाए गए नए प्रतिबंधों के लिए बधाई। आपने इस कठोर और दमनकारी तानाशाही सरकार पर और उसकी आक्रामक गतिविधियों को जारी रखने में मदद करने वालों पर उचित रूप से भारी कीमत लगाई है। यह कदम उन लोगों के लिए एक मजबूत संदेश है जो इस शासन का सहयोग कर रहे हैं कि उन्हें भी इसके परिणामों का सामना करना पड़ सकता है।'

नेतन्याहू की यह प्रतिक्रिया इस बात की पुष्टि करती है कि अमेरिका-इजराइल के बीच ईरान नीति पर तालमेल गहरा हो रहा है। आगे देखना होगा कि ईरान और उसके सहयोगी इस आर्थिक दबाव का किस तरह जवाब देते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

भारत और तुर्की जैसे देश जो ईरानी तेल खरीदते हैं, उन पर दबाव बढ़ेगा, जिससे अमेरिका के साथ उनके व्यापारिक संबंध भी तनावग्रस्त हो सकते हैं। नेतन्याहू की त्वरित बधाई यह भी दर्शाती है कि इजराइल इस अभियान को अपनी क्षेत्रीय सुरक्षा रणनीति का हिस्सा मानता है। असली सवाल यह है कि क्या आर्थिक अलगाव तेहरान की नीति बदल सकता है — या यह उसे और कट्टर बना देगा, जैसा पिछले दशक के अनुभव से संकेत मिलता है।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमेरिका का ईरान के खिलाफ आर्थिक 'डी-डे' अभियान क्या है?
यह अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट द्वारा 25 अगस्त 2026 को घोषित एक बड़ा आर्थिक अभियान है, जिसका लक्ष्य दुनिया भर में ईरान के वित्तीय संबंधों को काटकर तेहरान को पूरी तरह अलग-थलग करना है। बेसेंट ने इसे द्वितीय विश्व युद्ध के 'डी-डे' की भावना से जोड़ा।
इस अभियान में तीसरे देशों को चेतावनी क्यों दी गई?
बेसेंट ने स्पष्ट किया कि जो देश या संस्थाएँ ईरान से वित्तीय संबंध बनाए रखेंगी, उन्हें भी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है। यह तथाकथित 'द्वितीयक प्रतिबंध' नीति है, जो ईरान के व्यापारिक साझेदारों पर भी दबाव डालती है।
नेतन्याहू ने इस अभियान पर क्या कहा?
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक्स पर पोस्ट कर राष्ट्रपति ट्रंप और ट्रेजरी सेक्रेटरी बेसेंट को नए प्रतिबंधों के लिए बधाई दी। उन्होंने इसे ईरानी शासन और उसके सहयोगियों को 'उचित भारी कीमत' चुकाने पर मजबूर करने वाला कदम बताया।
ट्रंप की ईरान नीति पिछले अमेरिकी राष्ट्रपतियों से कैसे अलग है?
बेसेंट के अनुसार, पिछले राष्ट्रपति ईरान के खतरे को केवल 'संभालने या नियंत्रित करने' की कोशिश करते थे, जबकि ट्रंप का लक्ष्य इस खतरे को 'पूरी तरह खत्म करना' है। यह नीति ट्रंप के पहले कार्यकाल की 'अधिकतम दबाव' रणनीति का और अधिक आक्रामक विस्तार मानी जा रही है।
इस आर्थिक अभियान का भारत जैसे देशों पर क्या असर पड़ सकता है?
जो देश ईरानी तेल खरीदते हैं या ईरान के साथ वित्तीय लेन-देन रखते हैं, उन पर अमेरिकी दबाव बढ़ सकता है। बेसेंट की चेतावनी के अनुसार, ऐसे देशों को अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है, जिससे उनके अमेरिका के साथ व्यापारिक संबंध भी प्रभावित हो सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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