24 अगस्त 2026
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ईरान के खिलाफ 'आर्थिक डी-डे': अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट का सबसे बड़े आर्थिक अभियान का ऐलान

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ईरान के खिलाफ 'आर्थिक डी-डे': अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट का सबसे बड़े आर्थिक अभियान का ऐलान

सारांश

अमेरिका ने ईरान के खिलाफ 'आर्थिक डी-डे' का ऐलान कर दिया है — ट्रेजरी सेक्रेटरी बेसेंट ने इसे किसी भी दुश्मन के विरुद्ध अब तक का सबसे बड़ा आर्थिक हमला बताया। जवाब में ईरान ने होर्मुज़ स्ट्रेट से तेल निर्यात पूरी तरह बंद करने की चेतावनी दी, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों में हलचल मच सकती है।

मुख्य बातें

अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने 24 अगस्त को ईरान के खिलाफ अब तक के सबसे बड़े आर्थिक अभियान — 'आर्थिक डी-डे' — की घोषणा की।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 'ट्रुथ सोशल' पर चेतावनी दी कि ईरान का समर्थन करने वाले किसी भी देश पर 'अब तक की सबसे कड़ी आर्थिक कार्रवाई' होगी।
अभियान का लक्ष्य ईरान के सभी वित्तीय मार्गों और आर्थिक संसाधनों को अवरुद्ध कर तेहरान को वैश्विक अर्थव्यवस्था से काटना है।
ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसिन रेजाई ने होर्मुज़ स्ट्रेट और पर्शियन गल्फ से तेल निर्यात पूरी तरह बंद करने की धमकी दी।
बेसेंट ने कहा कि ट्रंप ने ईरान की लगभग सभी सैन्य उत्पादन सुविधाओं को नष्ट कर उसके परमाणु कार्यक्रम को गंभीर झटका दिया है।

अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने 24 अगस्त को घोषणा की कि अमेरिका ने ईरान के विरुद्ध अब तक का सबसे बड़ा आर्थिक अभियान शुरू करने की पूरी तैयारी कर ली है। इस अभियान का लक्ष्य ईरान के वित्तीय संसाधनों और आर्थिक मार्गों को पूरी तरह अवरुद्ध कर तेहरान को वैश्विक अर्थव्यवस्था से काट देना है।

बेसेंट का 'आर्थिक डी-डे' वाला बयान

बेसेंट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, "राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान की सैन्य क्षमताओं को काफी कमज़ोर कर दिया है, उसकी लगभग सभी सैन्य उत्पादन सुविधाओं को नष्ट कर दिया है और उसके परमाणु कार्यक्रम को गंभीर झटका पहुँचाया है। अब हम इस संघर्ष के निर्णायक चरण में पहुँच रहे हैं। अब एक तरह का आर्थिक 'डी-डे' शुरू होगा — यह किसी दुश्मन के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा आर्थिक हमला है।"

गौरतलब है कि 'डी-डे' शब्द का प्रयोग ऐतिहासिक रूप से द्वितीय विश्व युद्ध के निर्णायक सैन्य अभियान के लिए किया जाता है। बेसेंट का यह शब्द-चयन संकेत देता है कि वाशिंगटन इस बार की कार्रवाई को महज़ प्रतिबंधों से कहीं आगे की रणनीति के रूप में देख रहा है।

ट्रंप की चेतावनी: ईरान समर्थकों पर भी कार्रवाई

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट में कहा कि ईरान को समर्थन देने वाले किसी भी देश के खिलाफ 'अब तक की सबसे कड़ी आर्थिक कार्रवाई' की जाएगी। उन्होंने कहा, "यह अभूतपूर्व स्तर का आर्थिक युद्ध और अलगाव होगा।" ट्रंप ने भी इस कदम को 'आर्थिक डी-डे' की संज्ञा दी।

यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-ईरान के बीच तनाव पहले से ही चरम पर है और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय में गहरी चिंता बनी हुई है।

बेसेंट का रणनीतिक विश्लेषण

बेसेंट ने कहा कि इस्लामिक गणराज्य ईरान लंबे समय से सुरक्षा की गारंटी के नाम पर दबाव बनाकर अपने हित साधता रहा है। उनके अनुसार, ईरान की ताकत इस सोच से आती रही है कि वह जवाबी कार्रवाई ज़रूर करेगा, जबकि अमेरिका के कदमों को बातचीत के ज़रिए प्रभावित किया जा सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया, "राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व में अब वह दौर खत्म हो चुका है। जो लोग तेहरान का विरोध करने से डरते हैं, उन्हें वाशिंगटन की ताकत को भी कम नहीं आँकना चाहिए।"

बेसेंट ने यह भी कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने ऐसी परिस्थितियाँ बना दी हैं जिनसे सरकार की हर एजेंसी, हर कानूनी अधिकार और ऐसे कदमों का इस्तेमाल किया जा सके जिनके बारे में कई लोगों को लगता था कि उन्हें कभी लागू नहीं किया जाएगा।

ईरान की पलटवार चेतावनी

अमेरिकी बयानों के जवाब में ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसिन रेजाई ने सोशल मीडिया पर कहा, "अगर आर्थिक युद्ध जारी रहता है, तो एक भी बूंद तेल का निर्यात नहीं होगा — न होर्मुज़ स्ट्रेट के ज़रिए और न ही पर्शियन गल्फ के किसी अन्य हिस्से से।" रेजाई ने यह भी चेतावनी दी कि ईरान, ईरानी जनता के खिलाफ अमेरिकी आर्थिक युद्ध में किसी भी देश की भागीदारी या समर्थन को युद्ध की कार्रवाई मानेगा।

होर्मुज़ स्ट्रेट से होकर दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग पाँचवाँ हिस्सा गुज़रता है, इसलिए ईरान की यह धमकी वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों के लिए गंभीर निहितार्थ रखती है।

आगे क्या होगा

अमेरिका के इस आर्थिक अभियान के तहत ईरान के उन सभी वित्तीय मार्गों और संसाधनों को बंद करने की योजना है जो तेहरान की सरकार को आर्थिक सहारा देते हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यदि अमेरिका इस अभियान को पूरी तरह लागू करता है तो वैश्विक तेल आपूर्ति, खाड़ी क्षेत्र की स्थिरता और ईरान के सहयोगी देशों के साथ अमेरिकी संबंधों पर दूरगामी असर पड़ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

चाहे वह समझौता हो या पूर्ण आर्थिक पतन। लेकिन असली जोखिम होर्मुज़ स्ट्रेट पर है: दुनिया के तेल व्यापार का पाँचवाँ हिस्सा वहाँ से गुज़रता है, और ईरान की धमकी को खारिज करना आसान नहीं। यह अभियान उन देशों को भी दबाव में डालता है जो ईरान के साथ व्यापार करते हैं — चीन और भारत समेत — और उनके सामने एक कठिन कूटनीतिक चुनाव रखता है। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक रही है वह यह है कि 'अलगाव' की सफलता उन देशों के रुख पर निर्भर करती है जो अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद ईरान से तेल खरीदते रहे हैं।
RashtraPress
24 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमेरिका का ईरान के खिलाफ 'आर्थिक डी-डे' क्या है?
यह अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट द्वारा 24 अगस्त को घोषित वह अभियान है जिसमें ईरान के सभी वित्तीय मार्गों और आर्थिक संसाधनों को बंद कर तेहरान को वैश्विक अर्थव्यवस्था से पूरी तरह काटने की योजना है। बेसेंट ने इसे किसी भी दुश्मन के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा आर्थिक हमला बताया।
ट्रंप ने ईरान समर्थक देशों को क्या चेतावनी दी?
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 'ट्रुथ सोशल' पर कहा कि ईरान को समर्थन देने वाले किसी भी देश के खिलाफ 'अब तक की सबसे कड़ी आर्थिक कार्रवाई' की जाएगी और इसे 'अभूतपूर्व स्तर का आर्थिक युद्ध और अलगाव' करार दिया।
ईरान ने अमेरिकी अभियान के जवाब में क्या कहा?
ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसिन रेजाई ने चेतावनी दी कि यदि आर्थिक युद्ध जारी रहा तो होर्मुज़ स्ट्रेट और पर्शियन गल्फ से एक भी बूंद तेल का निर्यात नहीं होगा। उन्होंने यह भी कहा कि इस अभियान में किसी देश की भागीदारी को ईरान युद्ध की कार्रवाई मानेगा।
होर्मुज़ स्ट्रेट से तेल निर्यात बंद होने पर क्या असर होगा?
होर्मुज़ स्ट्रेट से दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग पाँचवाँ हिस्सा गुज़रता है। यदि ईरान इसे बंद करता है तो वैश्विक तेल आपूर्ति में भारी व्यवधान आ सकता है, जिसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कीमतों और तेल आयात करने वाले देशों — भारत समेत — पर पड़ेगा।
अमेरिका ने ईरान की सैन्य क्षमताओं को कितना कमज़ोर किया है?
बेसेंट के दावे के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका ने ईरान की लगभग सभी सैन्य उत्पादन सुविधाओं को नष्ट कर दिया है और उसके परमाणु कार्यक्रम को गंभीर झटका पहुँचाया है। हालाँकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक उपलब्ध नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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