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ट्रंप ईरान से 'खराब समझौता' नहीं करेंगे: वित्त मंत्री बेसेंट ने रखी तीन अटल शर्तें

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ट्रंप ईरान से 'खराब समझौता' नहीं करेंगे: वित्त मंत्री बेसेंट ने रखी तीन अटल शर्तें

सारांश

ट्रंप प्रशासन ने साफ कर दिया है — ईरान के साथ समझौता होगा, लेकिन तीन शर्तों पर कोई समझौता नहीं: परमाणु कार्यक्रम का खात्मा, संवर्धित यूरेनियम की वापसी, और होर्मुज में खुली शिपिंग। वित्त मंत्री बेसेंट के बयान ने वार्ता की नाज़ुक स्थिति और ट्रंप के अंतिम अधिकार को एक साथ उजागर किया।

मुख्य बातें

अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने 29 मई 2026 को कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ईरान से कोई 'खराब समझौता' स्वीकार नहीं करेंगे।
तीन अनिवार्य शर्तें: ईरान का परमाणु कार्यक्रम समाप्त हो, अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम सौंपा जाए, और होर्मुज जलडमरूमध्य में मुक्त शिपिंग सुनिश्चित हो।
बेसेंट ने 60 दिन के सीजफायर विस्तार या किसी अस्थायी समझौते की पुष्टि करने से इनकार किया।
प्रतिबंधों में ढील केवल तभी दी जाएगी जब ईरान अमेरिका की प्रमुख शर्तें पूरी करे।
बेसेंट ने चेतावनी दी कि बातचीत विफल होने पर अमेरिका का धैर्य असीमित नहीं है।

अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने 29 मई 2026 को व्हाइट हाउस में पत्रकारों से स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ किसी भी 'खराब समझौते' को स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने तीन अनिवार्य शर्तें गिनाईं — ईरान का परमाणु कार्यक्रम समाप्त हो, अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम सौंपा जाए, और होर्मुज जलडमरूमध्य में निर्बाध शिपिंग सुनिश्चित हो। बेसेंट ने यह भी पुष्टि करने से इनकार किया कि कोई अस्थायी समझौता हो चुका है।

मुख्य शर्तें और अमेरिकी रुख

बेसेंट ने कहा, 'टीमें लगातार बातचीत कर रही हैं और राष्ट्रपति ट्रंप ने यह बहुत स्पष्ट कर दिया है। ईरान को अपना अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम सौंपना होगा। उसे परमाणु हथियार बिल्कुल नहीं रखने हैं और होर्मुज जलडमरूमध्य में मुक्त आवागमन जरूरी है।' उन्होंने यह भी जोड़ा, 'वह (ट्रंप) कोई खराब समझौता नहीं करेंगे — वह अमेरिकी लोगों के लिए एक बेहतरीन समझौता करेंगे।'

सीजफायर और परमाणु वार्ता पर चुप्पी

60 दिन के संभावित सीजफायर विस्तार और परमाणु वार्ता की स्थिति पर पूछे जाने पर बेसेंट ने कोई जानकारी देने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, 'राष्ट्रपति से पहले कुछ भी कहना हमेशा गलती होती है। सब कुछ इस पर निर्भर करता है कि राष्ट्रपति क्या निर्णय लेते हैं।' यह बयान संकेत देता है कि वार्ता अभी भी संवेदनशील दौर में है और अंतिम निर्णय पूरी तरह ट्रंप के हाथ में है।

दबाव की रणनीति और प्रतिबंधों में ढील

वित्त मंत्री ने तर्क दिया कि हालिया अमेरिकी सैन्य और आर्थिक दबाव के कारण ईरान बातचीत की मेज पर आया है। उन्होंने कहा, 'इस प्रशासन ने वह किया है जो कोई और प्रशासन नहीं कर सका — हमने ईरानियों को उनके परमाणु कार्यक्रम पर बात करने के लिए तैयार किया है।' बेसेंट ने स्पष्ट किया कि प्रतिबंधों में कोई भी ढील तभी दी जाएगी जब ईरान अमेरिका की प्रमुख शर्तें पूरी करेगा।

ऊर्जा बाज़ार और होर्मुज का महत्व

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है, जिससे वैश्विक तेल और एलएनजी का बड़ा हिस्सा गुजरता है। बेसेंट ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में तनाव के बावजूद ऊर्जा बाज़ार अपेक्षाकृत स्थिर बना हुआ है और शिपिंग बाधाएं समाप्त होने पर तेल कीमतों में गिरावट आ सकती है। उन्होंने अमेरिका के बढ़ते तेल उत्पादन को मौजूदा स्थिरता का श्रेय दिया।

धैर्य की सीमा और आगे की राह

ईरान द्वारा कथित मिसाइल हमलों और सीजफायर उल्लंघनों की रिपोर्टों पर बेसेंट ने कहा कि वाशिंगटन कूटनीतिक समाधान के लिए प्रतिबद्ध है और अब तक की सभी कार्रवाइयाँ रक्षात्मक रही हैं। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि यदि बातचीत से ठोस नतीजा नहीं निकला तो अमेरिका का धैर्य असीमित नहीं है। यह बयान संकेत देता है कि कूटनीति विफल होने पर वाशिंगटन के पास अन्य विकल्प भी खुले हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसे ट्रंप ने 2018 में रद्द किया था। असली सवाल यह है कि क्या वाशिंगटन की तीन शर्तें — संवर्धित यूरेनियम की वापसी, परमाणु कार्यक्रम का खात्मा, और होर्मुज में खुली शिपिंग — एक साथ हासिल करना किसी भी वार्ता में व्यावहारिक रूप से संभव है, या यह जानबूझकर इतनी ऊँची पट्टी है जो समझौते को असंभव बनाती है। होर्मुज की भूराजनीतिक संवेदनशीलता को देखते हुए, ऊर्जा बाज़ारों पर इस वार्ता का परिणाम भारत समेत तमाम तेल-आयातक देशों के लिए सीधे मायने रखता है।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमेरिका ने ईरान के साथ परमाणु समझौते के लिए क्या शर्तें रखी हैं?
अमेरिका ने तीन अनिवार्य शर्तें रखी हैं: ईरान अपना परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह समाप्त करे, अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम सौंपे, और होर्मुज जलडमरूमध्य में निर्बाध शिपिंग की गारंटी दे। वित्त मंत्री बेसेंट के अनुसार इन शर्तों पर कोई समझौता नहीं होगा।
क्या अमेरिका और ईरान के बीच कोई अस्थायी समझौता हो गया है?
वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने किसी अस्थायी समझौते की पुष्टि करने से स्पष्ट इनकार किया है। उन्होंने कहा कि कोई भी अंतिम निर्णय पूरी तरह राष्ट्रपति ट्रंप पर निर्भर करेगा।
होर्मुज जलडमरूमध्य इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त ऊर्जा मार्गों में से एक है, जिससे वैश्विक तेल और एलएनजी का बड़ा हिस्सा गुजरता है। इस जलमार्ग में किसी भी बाधा का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा कीमतों और सप्लाई चेन पर पड़ता है, जिसमें भारत जैसे तेल-आयातक देश भी शामिल हैं।
ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों में ढील कब मिलेगी?
बेसेंट ने स्पष्ट किया कि प्रतिबंधों में कोई भी ढील तभी दी जाएगी जब ईरान अमेरिका की सभी प्रमुख शर्तें पूरी करे — विशेष रूप से होर्मुज में खुली शिपिंग और संवर्धित यूरेनियम की वापसी। फिलहाल इसकी कोई समय-सीमा घोषित नहीं की गई है।
क्या ट्रंप प्रशासन ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई कर सकता है?
बेसेंट ने कहा कि अब तक की सभी अमेरिकी कार्रवाइयाँ रक्षात्मक रही हैं और वाशिंगटन कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता देता है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि बातचीत विफल होने पर अमेरिका का धैर्य असीमित नहीं है, जो सैन्य विकल्प को पूरी तरह नकारता नहीं है।
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