14 जुलाई 2026
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ट्रंप की ईरान डील के लिए तीन अटल शर्तें: यूरेनियम सौंपो, परमाणु कार्यक्रम छोड़ो, होर्मुज खोलो

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ट्रंप की ईरान डील के लिए तीन अटल शर्तें: यूरेनियम सौंपो, परमाणु कार्यक्रम छोड़ो, होर्मुज खोलो

सारांश

ट्रंप प्रशासन ने ईरान के साथ किसी भी परमाणु समझौते के लिए तीन अटल शर्तें सार्वजनिक कर दी हैं। वित्त मंत्री बेसेंट ने साफ कहा — यूरेनियम सौंपो, परमाणु हथियार की कोशिश छोड़ो, होर्मुज खोलो। कूटनीति विफल हुई तो सैन्य कार्रवाई का रास्ता खुला है।

मुख्य बातें

अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने 29 मई 2026 को व्हाइट हाउस ब्रीफिंग में ट्रंप की तीन शर्तें सार्वजनिक कीं।
शर्तें: अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम सौंपना, परमाणु हथियार कार्यक्रम छोड़ना, होर्मुज जलडमरूमध्य में निर्बाध नौवहन बहाल करना।
60 दिनों के अस्थायी युद्धविराम समझौते की खबरों पर बेसेंट ने पुष्टि या खंडन से इनकार किया।
बेसेंट ने चेतावनी दी — कूटनीति विफल हुई तो सैन्य कार्रवाई का विकल्प फिर सक्रिय होगा।
बेसेंट के अनुसार अमेरिकी दबाव से आईआरजीसी , निर्वाचित सरकार और धर्मगुरुओं के बीच ईरानी आंतरिक संवाद बाधित हुआ है।

अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने 29 मई 2026 को व्हाइट हाउस में एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान स्पष्ट किया कि ट्रंप प्रशासन ने ईरान के साथ किसी भी परमाणु समझौते के लिए तीन अनिवार्य शर्तें तय की हैं — अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम सौंपना, परमाणु हथियार बनाने की कोशिश से बाज आना, और होर्मुज जलडमरूमध्य में निर्बाध नौवहन बहाल करना। बेसेंट ने यह भी चेतावनी दी कि यदि कूटनीति विफल रही तो सैन्य विकल्प फिर से मेज पर आ सकते हैं।

तीन शर्तें जो बनी हैं बातचीत की बुनियाद

बेसेंट ने मीडिया के सामने तीनों शर्तें विस्तार से रखीं। उन्होंने कहा, 'ईरान को अपना अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम सौंपना होगा। वे परमाणु हथियार बनाने का प्रयास नहीं कर सकते। होर्मुज जलडमरूमध्य में यातायात निर्बाध और खुला होना चाहिए।' उन्होंने जोड़ा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कोई कमज़ोर समझौता स्वीकार नहीं करेंगे — वह 'अमेरिकी जनता के लिए एक बेहतरीन समझौता' करेंगे। गौरतलब है कि ये शर्तें ट्रंप ने एक दिन पहले कैबिनेट बैठक में भी दोहराई थीं।

अस्थायी समझौते पर बेसेंट का मौन

पत्रकारों ने बार-बार पूछा कि क्या 60 दिनों के युद्धविराम विस्तार और परमाणु वार्ता जारी रखने पर कोई अंतरिम सहमति बन चुकी है, लेकिन बेसेंट ने इसकी पुष्टि या खंडन दोनों से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, 'सब कुछ इस बात पर निर्भर करता है कि राष्ट्रपति क्या करना चाहते हैं। राष्ट्रपति से आगे निकलने की कोशिश करना हमेशा एक गलती होती है।' यह सतर्क भाषा संकेत देती है कि वार्ता की स्थिति अभी भी संवेदनशील है।

दबाव की रणनीति को बताया सफल

बेसेंट ने दावा किया कि प्रशासन की सैन्य और आर्थिक दबाव की दोहरी रणनीति ने तेहरान को बातचीत की मेज पर वापस लाने में कामयाबी दिलाई है। उन्होंने कहा, 'राष्ट्रपति ट्रंप ने ऐसा काम किया है जो कोई और प्रशासन नहीं कर पाया — हमने ईरानियों को उनके परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत करने और शायद परमाणु कार्यक्रम न रखने की प्रतिबद्धता जताने के लिए राजी कर लिया है। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ।' साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रतिबंधों में कोई भी ढील ईरान की ठोस और सत्यापन-योग्य रियायतों से ही जुड़ी रहेगी।

सैन्य विकल्प अभी भी मेज पर

बेसेंट ने कूटनीति को प्राथमिकता देने की बात कही, लेकिन साथ ही चेतावनी भी दी। उनके शब्दों में, 'अगर राष्ट्रपति ट्रंप को लगता है कि उन्हें शांति समझौता नहीं मिल सकता, तो फिर सैन्य कार्रवाई शुरू हो जाएगी।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब कथित युद्धविराम उल्लंघन की खबरें सामने आई हैं और क्षेत्रीय तनाव बना हुआ है।

ईरानी नेतृत्व में आंतरिक दरारें

बेसेंट ने यह भी दावा किया कि अमेरिकी दबाव के कारण तेहरान की आंतरिक निर्णय प्रक्रिया बाधित हुई है। उनके अनुसार, 'ईरानी सरकार तीन स्तंभों पर टिकी है — निर्वाचित सरकार, आईआरजीसी और धर्मगुरु — और इन तीनों के बीच संवाद स्थापित करने में समस्या आ रही है।' यह टिप्पणी संकेत देती है कि वाशिंगटन ईरान की आंतरिक राजनीतिक जटिलताओं को भी वार्ता की गणना में शामिल कर रहा है। आगे की बातचीत का स्वरूप काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि तेहरान इन तीन शर्तों पर कितनी जल्दी और किस हद तक सहमति जताता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस बार सार्वजनिक मंच से इन्हें 'डील-ब्रेकर' के रूप में पेश करना एक सोची-समझी कूटनीतिक चाल है। अस्थायी समझौते पर जानबूझकर बनाए गए रहस्य से वाशिंगटन दोनों तरफ दबाव बनाए रखना चाहता है — ईरान पर भी और अपने घरेलू आलोचकों पर भी। असली सवाल यह है कि क्या ट्रंप प्रशासन सत्यापन तंत्र के बिना किसी समझौते को स्वीकार करेगा, जैसा कि 2015 के JCPOA में विवाद का मुख्य बिंदु था। होर्मुज की शर्त विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग पाँचवाँ हिस्सा नियंत्रित करती है — यह माँग आर्थिक है उतनी ही जितनी सामरिक।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ट्रंप प्रशासन ने ईरान डील के लिए कौन-सी तीन शर्तें रखी हैं?
ट्रंप प्रशासन ने तीन शर्तें तय की हैं — ईरान को अपना अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम सौंपना होगा, परमाणु हथियार बनाने की किसी भी कोशिश को छोड़ना होगा, और होर्मुज जलडमरूमध्य में निर्बाध नौवहन बहाल करना होगा। ये शर्तें वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने 29 मई 2026 को व्हाइट हाउस ब्रीफिंग में सार्वजनिक कीं।
क्या अमेरिका और ईरान के बीच कोई अस्थायी समझौता हो चुका है?
वित्त मंत्री बेसेंट ने इस सवाल का सीधा जवाब देने से इनकार कर दिया। 60 दिनों के युद्धविराम विस्तार की खबरों पर उन्होंने न पुष्टि की, न खंडन — केवल यह कहा कि 'सब कुछ राष्ट्रपति के फैसले पर निर्भर है।'
अगर ईरान से कूटनीतिक समझौता नहीं हुआ तो क्या होगा?
बेसेंट ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि कूटनीति विफल रही तो सैन्य कार्रवाई का विकल्प फिर से सक्रिय हो जाएगा। उनके शब्दों में, 'अगर राष्ट्रपति ट्रंप को लगता है कि शांति समझौता नहीं मिल सकता, तो सैन्य कार्रवाई शुरू हो जाएगी।'
होर्मुज जलडमरूमध्य की शर्त इतनी अहम क्यों है?
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल व्यापार का एक अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग है और ईरान इस पर रणनीतिक नियंत्रण रखता है। अमेरिका इस जलमार्ग को बाधा-मुक्त रखना चाहता है ताकि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार निर्बाध बना रहे।
बेसेंट ने ईरान की आंतरिक राजनीति के बारे में क्या कहा?
बेसेंट ने दावा किया कि अमेरिकी दबाव के कारण ईरानी नेतृत्व की निर्णय प्रक्रिया बाधित हुई है। उनके अनुसार निर्वाचित सरकार, आईआरजीसी और धर्मगुरुओं के बीच आपसी संवाद में समस्याएँ आ रही हैं।
राष्ट्र प्रेस
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