14 जुलाई 2026
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धनबाद जज उत्तम आनंद हत्याकांड: झारखंड हाईकोर्ट ने राहुल व लखन वर्मा की उम्रकैद बरकरार रखी

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धनबाद जज उत्तम आनंद हत्याकांड: झारखंड हाईकोर्ट ने राहुल व लखन वर्मा की उम्रकैद बरकरार रखी

सारांश

झारखंड हाईकोर्ट ने जज उत्तम आनंद हत्याकांड में दोषी राहुल वर्मा और लखन वर्मा की उम्रकैद बरकरार रखी। 2021 में सीसीटीवी में कैद इस घटना ने पूरे देश को हिला दिया था और न्यायपालिका की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए थे।

मुख्य बातें

झारखंड हाईकोर्ट ने 14 जुलाई 2026 को राहुल वर्मा और लखन वर्मा की उम्रकैद की सजा बरकरार रखी।
न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय की खंडपीठ ने दोनों की आपराधिक अपीलें खारिज कीं।
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश उत्तम आनंद की 28 जुलाई 2021 को मॉर्निंग वॉक के दौरान ऑटो से टक्कर मारकर हत्या की गई थी।
CBI विशेष अदालत ने 6 अगस्त 2022 को दोनों को उम्रकैद और प्रत्येक पर ₹25,000 जुर्माना सुनाया था।
दोनों पर IPC धारा 302, 201 और 34 के तहत दोष सिद्ध हुआ था।

झारखंड हाईकोर्ट ने 14 जुलाई 2026 को धनबाद के चर्चित जज उत्तम आनंद हत्याकांड में दोषी ठहराए गए राहुल वर्मा और लखन वर्मा की उम्रकैद की सजा को यथावत बनाए रखा। न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने दोनों दोषियों की आपराधिक अपीलें खारिज करते हुए धनबाद सीबीआई अदालत के फैसले में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

मुख्य घटनाक्रम

मंगलवार को सुनाए गए इस फैसले में अदालत ने इस घटना को न्यायपालिका पर सीधा हमला करार दिया। दोनों दोषियों ने निचली अदालत की सजा को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में अपील दाखिल की थी। सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने मामले का निचली अदालत का पूरा रिकॉर्ड (एलसीआर) मंगाया और पक्षकारों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद अपील खारिज कर दी। दोषियों की ओर से अधिवक्ता सब्यसाची ने पैरवी की।

हत्याकांड की पृष्ठभूमि

28 जुलाई 2021 की सुबह धनबाद में मॉर्निंग वॉक के दौरान अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश उत्तम आनंद को एक ऑटो ने टक्कर मार दी थी। गंभीर रूप से घायल होने के बाद उनकी मौत हो गई। यह घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई, जिसके बाद मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया और जाँच केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) को सौंपी गई।

गौरतलब है कि सीसीटीवी फुटेज में ऑटो का न्यायाधीश को जानबूझकर टक्कर मारना स्पष्ट रूप से दिखाई दिया था, जिसने इस मामले को दुर्घटना से हत्या की श्रेणी में ला दिया और पूरे देश में न्यायिक सुरक्षा पर बहस छेड़ दी।

सीबीआई अदालत का मूल फैसला

सीबीआई की विशेष अदालत ने 28 जुलाई 2022 को ऑटो चालक लखन वर्मा और उसके साथी राहुल वर्मा को हत्या का दोषी ठहराया था। इसके बाद 6 अगस्त 2022 को दोनों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई और प्रत्येक पर ₹25,000 का जुर्माना भी लगाया गया। दोनों के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या), धारा 201 (साक्ष्य मिटाने का प्रयास) और धारा 34 (समान आशय) के तहत आरोप तय किए गए थे। विशेष अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि दोनों दोषी जीवन के अंतिम समय तक कारावास में रहेंगे।

न्यायपालिका की सुरक्षा पर असर

यह मामला देश में न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा के संदर्भ में सबसे अधिक चर्चित रहा है। यह ऐसे समय में आया था जब न्यायाधीशों की सुरक्षा को लेकर पहले से ही चिंताएँ व्यक्त की जा रही थीं। सर्वोच्च न्यायालय ने भी इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया था और जाँच की निगरानी की थी।

आगे की स्थिति

हाईकोर्ट के इस ताज़ा फैसले के बाद दोनों दोषियों की उम्रकैद की सजा अब पूरी तरह से पुष्ट हो गई है। यदि दोषी इस फैसले को चुनौती देना चाहते हैं, तो उनके पास सर्वोच्च न्यायालय में अपील का विकल्प शेष रहेगा। यह फैसला न्यायपालिका की स्वतंत्रता और न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जाँच सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में हुई और फिर भी अपील प्रक्रिया वर्षों तक चली। असली सवाल यह है कि क्या इस फैसले के बाद न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा के लिए ठोस संस्थागत सुधार होंगे, या यह मामला केवल एक नज़ीर बनकर रह जाएगा। न्यायपालिका पर हमलों की बढ़ती घटनाओं के संदर्भ में यह फैसला ज़रूरी था, लेकिन पर्याप्त नहीं।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जज उत्तम आनंद हत्याकांड क्या है?
28 जुलाई 2021 को धनबाद में मॉर्निंग वॉक के दौरान अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश उत्तम आनंद को एक ऑटो ने जानबूझकर टक्कर मारी थी, जिससे उनकी मौत हो गई। यह घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद होने के बाद राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आई और जाँच CBI को सौंपी गई।
झारखंड हाईकोर्ट ने इस मामले में क्या फैसला सुनाया?
14 जुलाई 2026 को न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय की खंडपीठ ने दोषी राहुल वर्मा और लखन वर्मा की आपराधिक अपीलें खारिज कर दीं और CBI की विशेष अदालत द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा बरकरार रखी।
राहुल वर्मा और लखन वर्मा को पहले कब और किस अदालत ने दोषी ठहराया था?
धनबाद की CBI विशेष अदालत ने 28 जुलाई 2022 को दोनों को हत्या का दोषी ठहराया और 6 अगस्त 2022 को उम्रकैद की सजा सुनाई। दोनों पर IPC की धारा 302, 201 और 34 के तहत आरोप सिद्ध हुए थे।
इस मामले में दोषियों पर क्या-क्या दंड लगाए गए?
दोनों दोषियों — राहुल वर्मा और लखन वर्मा — को उम्रकैद की सजा सुनाई गई, जो जीवन के अंतिम समय तक लागू रहेगी। इसके अतिरिक्त प्रत्येक पर ₹25,000 का जुर्माना भी लगाया गया था।
क्या दोषी अब सर्वोच्च न्यायालय में अपील कर सकते हैं?
हाईकोर्ट के फैसले के बाद दोषियों के पास सर्वोच्च न्यायालय में अपील दायर करने का विकल्प शेष है। हालाँकि, हाईकोर्ट ने घटना को न्यायपालिका पर हमला करार दिया है, जो किसी भी आगामी अपील में महत्त्वपूर्ण पहलू होगा।
राष्ट्र प्रेस
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