चलती दुरंतो एक्सप्रेस में नर्स मीनू भैसारे ने कराई सुरक्षित डिलीवरी, माँ-बच्चा दोनों सुरक्षित
सारांश
मुख्य बातें
बॉम्बे हॉस्पिटल एंड मेडिकल रिसर्च सेंटर की स्टाफ नर्स मीनू भैसारे ने 3 जून की देर रात चलती नागपुर-मुंबई दुरंतो एक्सप्रेस में एक गर्भवती महिला की सफल और सुरक्षित डिलीवरी कराई। किसी अस्पताल की चारदीवारी के बाहर, बिना सर्जिकल उपकरणों के, रात के अंधेरे में चलती ट्रेन में यह काम कर दिखाना नर्सिंग पेशे की असाधारण मिसाल बन गई है।
कैसे शुरू हुई वह रात
अस्पताल की ओर से जारी बयान के अनुसार, मीनू भैसारे उस रात ट्रेन की कोच एस5, सीट नंबर 22 पर यात्रा कर रही थीं। रात लगभग 2 बजे उसी कोच में सवार नौ महीने की गर्भवती अंजुम को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। यात्रियों ने तत्काल चिकित्सा सहायता पाने की कोशिश की, लेकिन ट्रेन भुसावल जंक्शन से आगे निकल चुकी थी और आगे कोई निर्धारित स्टॉप नहीं था। रेलवे कर्मचारियों ने बताया कि मेडिकल मदद पहुँचने में कम से कम 30 मिनट लगेंगे।
जब हर पल मायने रखता था
भैसारे ने तुरंत गर्भवती महिला की जाँच की और पाया कि बच्चेदानी की थैली पहले ही फट चुकी थी और बच्चे का सिर बाहर आने लगा था — यानी डिलीवरी में कुछ ही क्षण बचे थे। उन्होंने बिना देरी किए जिम्मेदारी संभाली। साथ यात्रा कर रहे यात्रियों की मदद से महिला की निजता का पूरा ध्यान रखते हुए उन्होंने चलती ट्रेन में सुरक्षित प्रसव कराया।
बच्चे के जन्म के बाद भैसारे ने एक साफ धागे से गर्भनाल को क्लैंप किया। सर्जिकल उपकरण उपलब्ध न होने पर एक यात्री ने चाकू दिया, जिसे गर्भनाल काटने से पहले भलीभाँति साफ किया गया। इसके बाद उन्होंने माँ को साफ कपड़े पहनने में सहायता की, नवजात को साफ किया और यह सुनिश्चित किया कि शिशु को स्तनपान के लिए सुरक्षित रूप से माँ के पास रखा जाए।
चालिसगांव में मिली राहत
रेलवे अधिकारियों ने चालिसगांव रेलवे स्टेशन पर चिकित्सा टीम का इंतजाम किया, जहाँ माँ और नवजात शिशु को आगे की जाँच और देखभाल के लिए सुरक्षित सौंप दिया गया। बाकी यात्रियों ने इसके बाद मुंबई के लिए अपनी यात्रा जारी रखी।
नर्स और अस्पताल की प्रतिक्रिया
इस घटना पर बात करते हुए मीनू भैसारे ने कहा, 'एक नर्स के तौर पर मेरी पहली प्राथमिकता माँ और बच्चे दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था। उस पल में हिचकिचाहट की कोई गुंजाइश नहीं थी — बस आत्मविश्वास और सहानुभूति के साथ काम करने की जिम्मेदारी थी।' उन्होंने अपनी सह-यात्री राजश्री नेवारे और सभी साथी यात्रियों का विशेष आभार व्यक्त किया, जिनके सहयोग और प्रोत्साहन से यह डिलीवरी सफल हो सकी।
बॉम्बे हॉस्पिटल एंड मेडिकल रिसर्च सेंटर के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. राजकुमार पाटिल ने कहा, 'मीनू भैसारे की मिसाल कायम करने वाली प्रतिक्रिया नर्सिंग पेशे के उच्चतम मानकों को दर्शाती है। दबाव में शांत रहकर फैसला लेने की उनकी क्षमता और मरीज-देखभाल के प्रति अटूट समर्पण हमारे अस्पताल के मूल मूल्यों की प्रतिध्वनि है। हमें उनकी निस्वार्थ सेवा पर गर्व है।'
आगे क्या
यह घटना उस व्यापक सच्चाई को रेखांकित करती है कि भारत के व्यस्त रेल नेटवर्क पर चिकित्सा आपात स्थितियाँ कभी भी सामने आ सकती हैं। गौरतलब है कि भारतीय रेलवे की लंबी दूरी की ट्रेनों में प्रशिक्षित चिकित्साकर्मियों की उपस्थिति अनिवार्य नहीं है। मीनू भैसारे जैसे स्वास्थ्यकर्मियों की सतर्कता और साहस ही ऐसी परिस्थितियों में जीवनरक्षक साबित होती है।