14 जुलाई 2026
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ज्ञानवापी मध्यस्थता बैठक: हिंदू पक्ष बोला — 'ASI सर्वे से साबित, यह मंदिर है, हमें सौंपा जाए'

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ज्ञानवापी मध्यस्थता बैठक: हिंदू पक्ष बोला — 'ASI सर्वे से साबित, यह मंदिर है, हमें सौंपा जाए'

सारांश

ज्ञानवापी विवाद में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर वाराणसी में मध्यस्थता बैठक हुई। हिंदू पक्ष ने ASI सर्वे को आधार बनाते हुए परिसर सौंपने की माँग दोहराई, जबकि मुस्लिम पक्ष के पक्षकार व्यक्तिगत रूप से अनुपस्थित रहे। यह देश का सबसे संवेदनशील धार्मिक-कानूनी विवाद है।

मुख्य बातें

14 जुलाई 2026 को सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर वाराणसी कोर्ट में ज्ञानवापी मामले की मध्यस्थता बैठक आयोजित हुई।
हिंदू पक्षकार सीता साहू ने ASI सर्वे का हवाला देते हुए कहा कि परिसर मंदिर है और इसे हिंदू पक्ष को सौंपा जाए।
सोहनलाल आर्य ने मध्यस्थता प्रक्रिया की सफलता पर संदेह जताया, राम जन्मभूमि विवाद का उदाहरण दिया।
मुस्लिम पक्ष के पक्षकार व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हुए, केवल वकील भेजे गए।
हिंदू पक्ष का दावा है कि औरंगज़ेब ने मूल मंदिर तोड़ा था — यह विवाद का केंद्रीय ऐतिहासिक दावा है।

वाराणसी के बहुचर्चित ज्ञानवापी विवाद में 14 जुलाई 2026 को सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर मध्यस्थता बैठक आयोजित हुई। हिंदू पक्ष के सदस्य 'हर-हर महादेव' के नारे लगाते हुए वाराणसी कोर्ट के रिक्रिएशन रूम पहुँचे, जहाँ दोनों पक्षों के बीच बातचीत के ज़रिए विवाद सुलझाने का प्रयास किया जाना था। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच यह बैठक उस समय हुई जब ज्ञानवापी परिसर को लेकर कानूनी लड़ाई वर्षों से जारी है।

मध्यस्थता की पृष्ठभूमि

सर्वोच्च न्यायालय ने ज्ञानवापी से जुड़े चार प्रमुख मामलों में मध्यस्थता का निर्देश दिया था। इन चारों मामलों से जुड़े सभी पक्ष 14 जुलाई को वाराणसी कोर्ट में उपस्थित रहे। हालाँकि, मुस्लिम पक्ष की ओर से स्वयं पक्षकार नहीं, बल्कि केवल वकील उपस्थित हुए — एक तथ्य जिसे हिंदू पक्ष ने रेखांकित किया।

हिंदू पक्षकारों का पक्ष

हिंदू पक्षकार डॉ. सोहनलाल आर्य ने कहा, 'आज हम सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार मध्यस्थता में शामिल हो रहे हैं और पूरे उत्साह के साथ ऐसा कर रहे हैं। हालाँकि, हमारा स्पष्ट मानना है कि इस तरह की मध्यस्थता की कोशिशें आमतौर पर सफल नहीं रही हैं। राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान भी यही प्रक्रिया थी।'

हिंदू पक्षकार सीता साहू ने कहा, 'हम यहाँ आए हैं और कोर्ट के हर निर्देश का पालन कर रहे हैं। ASI सर्वे और कोर्ट द्वारा नियुक्त सर्वे से यह साबित हो चुका है कि यह एक मंदिर है। इसी कारण दूसरा पक्ष पीछे हट रहा है। उन्हें आना चाहिए और अगर उन्हें लगता है कि यह हिंदू मंदिर है, तो इसे सौंप देना चाहिए।' उन्होंने आगे जोड़ा कि 'सबूत हमारे पक्ष में हैं और हम न्यायालय के माध्यम से भी जीत सकते हैं — सत्य की जीत सुनिश्चित है।'

मुस्लिम पक्ष की अनुपस्थिति पर सवाल

हिंदू पक्षकारों ने इस बात पर आपत्ति जताई कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद मुस्लिम पक्ष के पक्षकार व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हुए और केवल वकीलों को भेजा गया। सीता साहू ने कहा कि यह हिचकिचाहट इसलिए है क्योंकि 'साक्ष्य और तथ्य हमारे पक्ष में हैं।'

ऐतिहासिक संदर्भ और दावे

हिंदू पक्ष का यह भी कहना है कि ज्ञानवापी मंदिर को मुगल शासक औरंगज़ेब द्वारा तोड़ा गया था। यह दावा इस विवाद के केंद्र में रहा है और अदालत में दायर याचिकाओं का आधार भी है। गौरतलब है कि यह मामला राम जन्मभूमि विवाद के बाद देश का सबसे संवेदनशील धार्मिक-कानूनी विवाद माना जाता है।

आगे क्या होगा

मध्यस्थता प्रक्रिया के नतीजे पर सभी की निगाहें टिकी हैं। यदि बातचीत विफल रहती है, तो मामला पुनः अदालती सुनवाई के रास्ते पर लौट सकता है। सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में चल रही यह प्रक्रिया देश के धार्मिक और कानूनी परिदृश्य पर दूरगामी असर डाल सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि मुस्लिम पक्ष के पक्षकारों की अनुपस्थिति संवाद की सीमाएँ उजागर करती है। राम जन्मभूमि की मध्यस्थता भी विफल हुई थी और अंततः अदालत ने फैसला दिया था — इतिहास की यह पुनरावृत्ति संकेत देती है कि न्यायिक मार्ग ही अंतिम निर्णायक बनेगा। असली सवाल यह है कि क्या मध्यस्थता प्रक्रिया तनाव कम करने का अवसर बन सकती है, या यह महज़ औपचारिकता बनकर रह जाएगी।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ज्ञानवापी मध्यस्थता बैठक क्यों हो रही है?
सर्वोच्च न्यायालय ने ज्ञानवापी से जुड़े चार प्रमुख मामलों में मध्यस्थता का निर्देश दिया है, ताकि दोनों पक्ष बातचीत के ज़रिए विवाद सुलझाने की कोशिश करें। यह बैठक 14 जुलाई 2026 को वाराणसी कोर्ट के रिक्रिएशन रूम में आयोजित की गई।
हिंदू पक्ष का ज्ञानवापी पर क्या दावा है?
हिंदू पक्ष का दावा है कि ASI सर्वे और कोर्ट द्वारा नियुक्त सर्वे से यह साबित हो चुका है कि ज्ञानवापी परिसर एक मंदिर है। पक्षकारों का यह भी कहना है कि मूल मंदिर मुगल शासक औरंगज़ेब ने तोड़ा था और परिसर हिंदू पक्ष को सौंपा जाना चाहिए।
मुस्लिम पक्ष मध्यस्थता में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित क्यों नहीं हुआ?
हिंदू पक्षकारों के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद मुस्लिम पक्ष के पक्षकार स्वयं नहीं आए और केवल वकीलों को भेजा। इस अनुपस्थिति का कारण अभी तक मुस्लिम पक्ष की ओर से सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं किया गया है।
क्या ज्ञानवापी मध्यस्थता सफल होने की संभावना है?
हिंदू पक्षकार डॉ. सोहनलाल आर्य ने खुद कहा है कि ऐसी मध्यस्थता आमतौर पर सफल नहीं रही हैं और राम जन्मभूमि विवाद में भी यही हुआ था। यदि मध्यस्थता विफल रहती है, तो मामला पुनः अदालती सुनवाई के मार्ग पर लौट सकता है।
ज्ञानवापी विवाद की पृष्ठभूमि क्या है?
ज्ञानवापी मस्जिद वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर के निकट स्थित है। हिंदू पक्ष का दावा है कि मुगल शासक औरंगज़ेब ने मूल मंदिर तोड़कर वहाँ मस्जिद बनाई थी। यह मामला देश का सबसे संवेदनशील धार्मिक-कानूनी विवादों में से एक है और सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में है।
राष्ट्र प्रेस
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