राम मंदिर दान विवाद: सुप्रीम कोर्ट में एफआईआर और सीबीआई जांच की मांग, SIT पर उठे सवाल
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय में एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड अनूप प्रकाश अवस्थी ने 15 जून को एक अर्जी दायर कर राम मंदिर दान कोष से जुड़ी कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच और एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देने की अपील की है। अर्जी में शीर्ष अदालत की सीधी निगरानी में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) जैसी किसी प्रमुख एजेंसी से जांच कराने पर विचार करने का आग्रह किया गया है।
याचिका में क्या मांगा गया है
अर्जी में सर्वोच्च न्यायालय से तीन प्रमुख राहतें माँगी गई हैं — पहली, अदालत की निगरानी में CBI जांच का आदेश; दूसरी, दान में प्राप्त धनराशि की सुरक्षा के लिए एक तंत्र स्थापित करना; और तीसरी, श्री राम जन्मभूमि मंदिर को मिले दान के संग्रह, हिसाब-किताब, कस्टडी, प्रबंधन और वितरण से जुड़े सभी पहलुओं की व्यापक जांच।
अर्जी में स्पष्ट किया गया है, 'मैं किसी व्यक्ति, संस्था या अथॉरिटी के बारे में पहले से कोई राय नहीं बनाना चाहता। न ही मेरा मकसद ट्रस्ट पर कोई आरोप लगाना है, जिसके सदस्यों ने बहुत अहम सेवा की है। हालांकि, आरोपों की गंभीरता और शामिल संस्था के असाधारण महत्व को देखते हुए, सामान्य मानकों से कहीं ज्यादा पारदर्शिता और विश्वसनीयता की जरूरत है।'
SIT पर क्यों उठे सवाल
अर्जी में तर्क दिया गया है कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) अपने आप में अपर्याप्त है। याचिकाकर्ता के अनुसार, जब तक जांच किसी संवैधानिक अदालत की निगरानी में न हो, तब तक श्रद्धालुओं का एक बड़ा वर्ग उसकी निष्पक्षता पर संदेह कर सकता है।
अर्जी में यह भी कहा गया कि 'करोड़ों श्रद्धालुओं की ओर से दिए गए दान से जुड़े आरोपों के बावजूद अभी तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है' और सामान्य आपराधिक प्रक्रिया न अपनाने से यह धारणा बन सकती है कि मामले को गंभीर आपराधिक विश्वासघात की बजाय महज प्रशासनिक अनियमितता के रूप में देखा जा रहा है।
आस्था से जुड़ा मामला
याचिकाकर्ता ने अर्जी में रेखांकित किया कि श्री राम जन्मभूमि मंदिर को दिए गए दान से जुड़ा विवाद किसी सामान्य वित्तीय गड़बड़ी तक सीमित नहीं है — यह देश-विदेश में करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से सीधे जुड़ा हुआ है। अर्जी के अनुसार, दान में कथित अनियमितताओं, हेराफेरी या धनराशि के गायब होने की खबरों ने भक्तों के बीच गहरी चिंता पैदा की है।
उत्तर प्रदेश SIT का गठन
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर राज्य सरकार ने पहले ही एक SIT गठित की है। इस टीम में लखनऊ के डिविजनल कमिश्नर विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक (लखनऊ रेंज) किरण एस. और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल हैं। रिपोर्टों के अनुसार, SIT को सात दिनों के भीतर प्रारंभिक रिपोर्ट और 15 दिनों के भीतर अंतिम रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।
आगे क्या होगा
सर्वोच्च न्यायालय इस अर्जी पर सुनवाई की तारीख तय करेगा। यह मामला ऐसे समय में आया है जब राम मंदिर दान कोष की पारदर्शिता को लेकर सार्वजनिक बहस तेज हो रही है। अदालत का रुख यह तय करेगा कि जांच राज्य स्तर पर SIT के दायरे में रहेगी या केंद्रीय एजेंसी के हाथ में जाएगी।