राम मंदिर दान विवाद: SIT जांच से 15 दिन में सच आएगा सामने, आस्था अडिग — सुरेंद्र जैन
सारांश
मुख्य बातें
विश्व हिंदू परिषद (VHP) के वरिष्ठ नेता सुरेंद्र जैन ने 21 जून को गुरुग्राम में कहा कि अयोध्या राम मंदिर में दान से जुड़े कथित गड़बड़ी और चोरी के आरोपों की सच्चाई 15 दिनों के भीतर सामने आ जाएगी, क्योंकि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने स्वयं विशेष जांच दल (SIT) से जांच कराने की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आरोपों के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नहीं आई है।
मुख्य घटनाक्रम
जैन ने बताया कि जब अलग-अलग स्रोतों से आरोपों की पुष्टि होने लगी, तब संगठन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए उत्तर प्रदेश सरकार से SIT गठन की मांग की। उनके अनुसार, 'यदि आरोपों पर चर्चा बढ़ रही है तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। इसलिए हमने सरकार से SIT गठित करने की मांग की ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके।'
उन्होंने यह भी कहा कि 1984 में राम जन्मभूमि आंदोलन शुरू होने के बाद से ही विभिन्न स्तरों पर आरोप लगते रहे हैं — कभी मंदिर निर्माण रोकने के लिए, कभी आंदोलन को बदनाम करने के लिए। उनका दावा है कि समय-समय पर ये आरोप असत्य साबित हुए हैं।
श्रद्धालुओं की आस्था पर असर नहीं
जैन ने मंदिर में आने वाले दर्शनार्थियों की संख्या का हवाला देते हुए कहा कि आस्था अडिग है। उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार, 15 जून को लगभग 92,000 श्रद्धालु मंदिर पहुँचे। 16 जून को यह संख्या 82,250, 17 जून को 80,600 और 18 जून को 83,300 रही। जैन ने कहा, 'यदि लोगों का विश्वास डगमगाया होता तो मंदिर आने वालों की संख्या में गिरावट दिखाई देती, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।'
जांच का दायरा और रामालय ट्रस्ट का ज़िक्र
जैन ने कहा कि कथित तौर पर चांदी की छड़ों या अन्य सामग्री के गायब होने के संदर्भ में अलग-अलग संस्थाओं के नाम सामने आए हैं। उनके अनुसार, कुछ सामग्री उस समय रामालय ट्रस्ट को दिए जाने की बात कही जाती थी। इसलिए उन्होंने माँग की कि केवल श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ही नहीं, बल्कि आंदोलन के दौरान अस्तित्व में रहीं अन्य संस्थाओं और समितियों की भी जांच होनी चाहिए।
गौरतलब है कि जैन ने यह भी कहा कि आरोप लगाने वाले व्यक्ति ने बाद में कई प्रमुख संतों और आंदोलन के नेताओं के नाम लिए, जिससे आरोपों की मंशा पर भी संदेह पैदा हुआ।
ट्रस्ट पुनर्गठन की माँग खारिज
ट्रस्ट के पुनर्गठन की माँगों को खारिज करते हुए जैन ने कहा कि ट्रस्ट उन संतों और व्यक्तियों का संगठन है जिन्होंने मंदिर निर्माण के लिए अपना जीवन समर्पित किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ट्रस्ट के सदस्यों की नीयत और जीवन पर कोई गंभीर आरोप नहीं है। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दलों की ओर से ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट निगरानी और आगे की राह
सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में जांच की माँग पर जैन ने कहा, 'हमारे मन में कोई खोट नहीं है। इसलिए किसी भी स्तर की जांच से हमें कोई संकोच नहीं है।' उन्होंने कहा कि SIT रिपोर्ट आने के बाद यदि FIR दर्ज करने, अतिरिक्त जांच या किसी अन्य कानूनी कार्रवाई की आवश्यकता हुई तो उस पर भी विचार किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग गंभीर आरोप लगा रहे हैं, उन्हें अपने दावों के समर्थन में FIR दर्ज करानी चाहिए थी या अदालत का दरवाज़ा खटखटाना चाहिए था।