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अयोध्या राम मंदिर दान चोरी: नई SIT के गठन पर साधु-संतों ने जताई राहत, जल्द जांच की उम्मीद

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अयोध्या राम मंदिर दान चोरी: नई SIT के गठन पर साधु-संतों ने जताई राहत, जल्द जांच की उम्मीद

सारांश

सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर राम मंदिर दान चोरी मामले में नई SIT का गठन हुआ है। जगद्गुरु परमहंस आचार्य, वरुण दास और इकबाल अंसारी समेत साधु-संतों ने इसका स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि यह SIT बिना दबाव के मंदिर की साख बहाल करेगी।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर अयोध्या राम मंदिर दान चोरी मामले में नई SIT का गठन किया गया है।
जगद्गुरु परमहंस आचार्य और तपस्वी छावनी के वरुण दास ने SIT गठन का स्वागत करते हुए निष्पक्ष जाँच की उम्मीद जताई।
इकबाल अंसारी ने कहा कि अयोध्या के अधिकारियों को स्थानीय मामलों की जानकारी है और वे सही जाँच करेंगे।
संत धर्मदास महाराज ने हनुमानगढ़ी के संतों को ट्रस्ट की धार्मिक समिति में शामिल करने की माँग की; ज़रूरत पड़ने पर सर्वोच्च न्यायालय जाने की चेतावनी दी।
महंत दिनेन्द्र दास महाराज ने बताया कि ट्रस्ट बैठक में पूजा-पाठ रामानंदी संप्रदाय की परंपराओं के अनुसार करने का निर्णय लिया गया।

अयोध्या के राम मंदिर में हुई कथित वित्तीय अनियमितता की जाँच के लिए सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर गठित नई विशेष जाँच दल (SIT) का साधु-संत समुदाय ने 26 जुलाई को खुलकर स्वागत किया है। संतों को उम्मीद है कि यह SIT बिना दबाव के निष्पक्ष जाँच करेगी और मंदिर की साख पर लगे इस दाग को जल्द मिटाएगी।

संतों की प्रतिक्रिया

जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने कहा, 'सर्वोच्च न्यायालय ने भारतीय संस्कृति के गौरव और मर्यादा को देखते हुए अयोध्या धाम में स्थित राम मंदिर में हुई वित्तीय अनियमितता के कलंक को मिटाने के लिए SIT का गठन किया है। हम लोग इस फैसले का स्वागत करते हैं। इस SIT में शामिल वरिष्ठ अधिकारियों से अपेक्षा करते हैं कि ईमानदारी से अपने कर्तव्य का निर्वहन करें और वित्तीय अनियमितता का कलंक जल्द से जल्द दूर करें।'

तपस्वी छावनी के वरुण दास ने कहा, 'पुरानी SIT ने जाँच करके कुछ रिपोर्ट दे दी है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर एक नई SIT का गठन हुआ है। राम मंदिर के अंदर जो गबन हुआ है, उसकी जाँच के लिए बनी SIT का हम स्वागत करते हैं। आशा है कि यह SIT बिना किसी दबाव में आए उचित जाँच करेगी।'

इकबाल अंसारी का बयान

इकबाल अंसारी ने भी राम मंदिर दान चोरी मामले की जाँच हेतु SIT गठन को एक सकारात्मक कदम बताया। उन्होंने भरोसा जताया कि अयोध्या के अधिकारियों को स्थानीय मामलों की पूरी जानकारी है और वे सही ढंग से जाँच करेंगे।

ट्रस्ट और धार्मिक समिति पर विवाद

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य महंत दिनेन्द्र दास महाराज ने बताया कि ट्रस्ट की एक बैठक में यह तय किया गया कि मंदिर की रीतियाँ और पूजा-पाठ रामानंदी संप्रदाय की परंपराओं के अनुसार ही किए जाएँगे।

वहीं, संत धर्मदास महाराज ने माँग की है कि राम मंदिर ट्रस्ट की धार्मिक समिति में हनुमानगढ़ी के संतों को भी शामिल किया जाए। उन्होंने मंदिर के बेहतर प्रबंधन पर ज़ोर देते हुए कहा कि ज़रूरत पड़ने पर वे सर्वोच्च न्यायालय का रुख करने से नहीं हिचकेंगे।

धर्मदास महाराज ने कहा, 'हमारी माँग है कि राम मंदिर और हनुमानगढ़ी में व्यवस्थाएँ ठीक से की जाएँ। मंदिर का निर्माण अभी भी चल रहा है और अगर ज़रूरत पड़ी, तो हम सुप्रीम कोर्ट से भी उचित निर्देश लेंगे।'

पृष्ठभूमि और महत्व

गौरतलब है कि राम मंदिर दान चोरी का मामला तब सुर्खियों में आया जब श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में वित्तीय अनियमितताओं की शिकायतें सामने आईं। इससे पहले गठित SIT ने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की थी, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने मामले की गहन और निष्पक्ष जाँच सुनिश्चित करने के लिए नई SIT के गठन का आदेश दिया। यह मामला ऐसे समय में और संवेदनशील हो जाता है जब अयोध्या में मंदिर निर्माण अभी भी जारी है और श्रद्धालुओं की आस्था दाँव पर है।

आगे की राह

संत समुदाय की नज़रें अब नई SIT की कार्यप्रणाली और उसके निष्कर्षों पर टिकी हैं। यदि जाँच में देरी हुई या निष्पक्षता पर सवाल उठे, तो संत धर्मदास महाराज के बयान के अनुसार मामला एक बार फिर सर्वोच्च न्यायालय तक जा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन धर्मदास महाराज की सुप्रीम कोर्ट जाने की चेतावनी बताती है कि संतों का धैर्य असीमित नहीं है — जाँच की गति और निष्पक्षता ही इस विश्वास को बनाए रखेगी।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अयोध्या राम मंदिर दान चोरी मामला क्या है?
यह मामला श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में कथित वित्तीय अनियमितताओं और दान राशि के गबन से जुड़ा है। शिकायतें सामने आने के बाद पहले एक SIT गठित की गई थी, जिसने अपनी रिपोर्ट दी, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने गहन जाँच के लिए नई SIT के गठन का आदेश दिया।
नई SIT का गठन किसके आदेश पर हुआ?
नई SIT का गठन सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर किया गया है। पहली SIT की रिपोर्ट के बाद भी मामला न्यायालय के संज्ञान में बना रहा और शीर्ष अदालत ने निष्पक्ष जाँच सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया।
साधु-संतों ने नई SIT का स्वागत क्यों किया?
जगद्गुरु परमहंस आचार्य और वरुण दास जैसे संतों का मानना है कि राम मंदिर में हुई वित्तीय अनियमितता भारतीय संस्कृति और मंदिर की मर्यादा पर कलंक है। उन्हें उम्मीद है कि नई SIT बिना किसी दबाव के ईमानदारी से जाँच करेगी और इस कलंक को दूर करेगी।
संत धर्मदास महाराज की क्या माँगें हैं?
संत धर्मदास महाराज ने माँग की है कि राम मंदिर ट्रस्ट की धार्मिक समिति में हनुमानगढ़ी के संतों को शामिल किया जाए और मंदिर की व्यवस्थाएँ बेहतर की जाएँ। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उचित कदम नहीं उठाए गए तो वे सर्वोच्च न्यायालय का रुख करेंगे।
राम मंदिर में पूजा-पाठ की परंपरा को लेकर क्या निर्णय हुआ है?
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य महंत दिनेन्द्र दास महाराज के अनुसार, ट्रस्ट की बैठक में यह तय किया गया कि मंदिर की सभी रीतियाँ और पूजा-पाठ रामानंदी संप्रदाय की परंपराओं के अनुसार ही किए जाएँगे।
राष्ट्र प्रेस
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