अयोध्या राम मंदिर दान चोरी: नई SIT के गठन पर साधु-संतों ने जताई राहत, जल्द जांच की उम्मीद
सारांश
मुख्य बातें
अयोध्या के राम मंदिर में हुई कथित वित्तीय अनियमितता की जाँच के लिए सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर गठित नई विशेष जाँच दल (SIT) का साधु-संत समुदाय ने 26 जुलाई को खुलकर स्वागत किया है। संतों को उम्मीद है कि यह SIT बिना दबाव के निष्पक्ष जाँच करेगी और मंदिर की साख पर लगे इस दाग को जल्द मिटाएगी।
संतों की प्रतिक्रिया
जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने कहा, 'सर्वोच्च न्यायालय ने भारतीय संस्कृति के गौरव और मर्यादा को देखते हुए अयोध्या धाम में स्थित राम मंदिर में हुई वित्तीय अनियमितता के कलंक को मिटाने के लिए SIT का गठन किया है। हम लोग इस फैसले का स्वागत करते हैं। इस SIT में शामिल वरिष्ठ अधिकारियों से अपेक्षा करते हैं कि ईमानदारी से अपने कर्तव्य का निर्वहन करें और वित्तीय अनियमितता का कलंक जल्द से जल्द दूर करें।'
तपस्वी छावनी के वरुण दास ने कहा, 'पुरानी SIT ने जाँच करके कुछ रिपोर्ट दे दी है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर एक नई SIT का गठन हुआ है। राम मंदिर के अंदर जो गबन हुआ है, उसकी जाँच के लिए बनी SIT का हम स्वागत करते हैं। आशा है कि यह SIT बिना किसी दबाव में आए उचित जाँच करेगी।'
इकबाल अंसारी का बयान
इकबाल अंसारी ने भी राम मंदिर दान चोरी मामले की जाँच हेतु SIT गठन को एक सकारात्मक कदम बताया। उन्होंने भरोसा जताया कि अयोध्या के अधिकारियों को स्थानीय मामलों की पूरी जानकारी है और वे सही ढंग से जाँच करेंगे।
ट्रस्ट और धार्मिक समिति पर विवाद
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य महंत दिनेन्द्र दास महाराज ने बताया कि ट्रस्ट की एक बैठक में यह तय किया गया कि मंदिर की रीतियाँ और पूजा-पाठ रामानंदी संप्रदाय की परंपराओं के अनुसार ही किए जाएँगे।
वहीं, संत धर्मदास महाराज ने माँग की है कि राम मंदिर ट्रस्ट की धार्मिक समिति में हनुमानगढ़ी के संतों को भी शामिल किया जाए। उन्होंने मंदिर के बेहतर प्रबंधन पर ज़ोर देते हुए कहा कि ज़रूरत पड़ने पर वे सर्वोच्च न्यायालय का रुख करने से नहीं हिचकेंगे।
धर्मदास महाराज ने कहा, 'हमारी माँग है कि राम मंदिर और हनुमानगढ़ी में व्यवस्थाएँ ठीक से की जाएँ। मंदिर का निर्माण अभी भी चल रहा है और अगर ज़रूरत पड़ी, तो हम सुप्रीम कोर्ट से भी उचित निर्देश लेंगे।'
पृष्ठभूमि और महत्व
गौरतलब है कि राम मंदिर दान चोरी का मामला तब सुर्खियों में आया जब श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में वित्तीय अनियमितताओं की शिकायतें सामने आईं। इससे पहले गठित SIT ने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की थी, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने मामले की गहन और निष्पक्ष जाँच सुनिश्चित करने के लिए नई SIT के गठन का आदेश दिया। यह मामला ऐसे समय में और संवेदनशील हो जाता है जब अयोध्या में मंदिर निर्माण अभी भी जारी है और श्रद्धालुओं की आस्था दाँव पर है।
आगे की राह
संत समुदाय की नज़रें अब नई SIT की कार्यप्रणाली और उसके निष्कर्षों पर टिकी हैं। यदि जाँच में देरी हुई या निष्पक्षता पर सवाल उठे, तो संत धर्मदास महाराज के बयान के अनुसार मामला एक बार फिर सर्वोच्च न्यायालय तक जा सकता है।