9 सितंबर 2026
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दुर्गा पूजा बयान पर सीपीआई(एम) का पलटवार: 'धर्म के नाम पर समाज तोड़ते हैं' — पी. संतोष का धीरेंद्र शास्त्री पर निशाना

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दुर्गा पूजा बयान पर सीपीआई(एम) का पलटवार: 'धर्म के नाम पर समाज तोड़ते हैं' — पी. संतोष का धीरेंद्र शास्त्री पर निशाना

सारांश

बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के दुर्गा पूजा पर मांसाहार-विरोधी बयान ने नया विवाद खड़ा किया। सीपीआई(एम) नेता पी. संतोष कुमार ने 9 सितंबर को नई दिल्ली में उन पर 'धर्म के नाम पर समाज तोड़ने' का आरोप लगाया और मणिपुर शिक्षक हत्या व केरल पत्रकार मामले पर भी पार्टी ने मोर्चा खोला।

मुख्य बातें

पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि दुर्गा पूजा के दौरान मांसाहारी भोजन नहीं करना चाहिए — इस बयान ने नया विवाद जन्म दिया।
संतोष कुमार ने 9 सितंबर को नई दिल्ली में शास्त्री के बयान की कड़ी निंदा की।
संतोष ने कहा — 'जिनके पास काम नहीं, वे धर्म के नाम पर समाज तोड़ते हैं; हम इस बयान की निंदा करते हैं।' दिल्ली में मणिपुर के एक संगीत शिक्षक की कथित हत्या पर भी सीपीआई(एम) ने पीड़ित परिवार के साथ एकजुटता जताई।
केरल में टीवी डिबेट के दौरान पत्रकार पर दर्ज मामले को लेकर संतोष ने केरल पुलिस की कार्रवाई को गलत बताया।

सीपीआई(एम) नेता पी. संतोष कुमार ने 9 सितंबर को नई दिल्ली में बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पर तीखा हमला बोला। यह विवाद तब उठा जब शास्त्री ने कहा कि पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा के दौरान मांसाहारी भोजन नहीं किया जाना चाहिए। संतोष ने इस बयान की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि जिनके पास कोई काम नहीं है, वे धर्म के नाम पर समाज को तोड़ने का काम करते हैं।

विवाद की जड़: शास्त्री का दुर्गा पूजा पर बयान

पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने हाल ही में कहा था कि दुर्गा पूजा के दौरान मांसाहारी खाना नहीं खाया जाना चाहिए। यह बयान पश्चिम बंगाल के संदर्भ में दिया गया, जहाँ दुर्गा पूजा सदियों से एक सांस्कृतिक और सामाजिक उत्सव के रूप में मनाई जाती रही है। इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में तत्काल प्रतिक्रिया उत्पन्न की।

सीपीआई(एम) नेता पी. संतोष ने कहा, 'देश में इस तरह के बहुत सारे बाबा हैं। उन्हें कोई दूसरा काम नहीं है। बंगाल में बाबा के जन्म से पहले भी दुर्गा पूजा मनाई जाती रही है — क्या तब कोई विवाद था? फेस्टिवल को फेस्टिवल के तौर पर मनाया जाना चाहिए। हम इस बयान की कड़ी निंदा करते हैं।'

मणिपुर संगीत शिक्षक हत्याकांड पर सीपीआई(एम) की प्रतिक्रिया

संतोष ने दिल्ली में मणिपुर के एक संगीत शिक्षक की कथित तौर पर पीट-पीटकर हत्या की घटना पर भी गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा, 'यह घटना बेहद दुखद है और हम पीड़ित परिवार के साथ हैं। हमारी संवेदनाएँ उनके साथ हैं।'

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के बयान का हवाला देते हुए संतोष ने कहा, 'रिजिजू जो कह रहे हैं हम भी कहते हैं कि यह राजनीति की बात नहीं है — लेकिन इससे बड़ी राजनीति क्या हो सकती है।' उन्होंने यह भी कहा कि देश में अल्पसंख्यकों और दलितों पर हमलों की घटनाएँ चिंताजनक हैं और असहिष्णुता किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है।

केरल पत्रकार मामले पर सवाल

केरल में एक टीवी डिबेट के दौरान कथित तौर पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के आरोप में एक पत्रकार के विरुद्ध मामला दर्ज किए जाने पर भी पी. संतोष ने केरल पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, 'केरल में जो हुआ वह बहुत बड़ी बात है। यह एक टीवी डिबेट था। केरल पुलिस ने गलत काम किया है। हम पत्रकार के साथ खड़े हैं।'

यह ऐसे समय में आया है जब प्रेस की स्वतंत्रता और धार्मिक अभिव्यक्ति को लेकर देशभर में बहस तेज़ है।

व्यापक राजनीतिक परिदृश्य

गौरतलब है कि पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पहले भी अपने विभिन्न बयानों को लेकर विवादों में रहे हैं और विपक्षी दलों के निशाने पर आते रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि धार्मिक नेताओं के ऐसे बयान सामाजिक सद्भाव को प्रभावित कर सकते हैं, जबकि समर्थकों का तर्क है कि ये सांस्कृतिक परंपराओं की रक्षा के लिए उठाई गई आवाज़ें हैं।

आने वाले दिनों में यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि क्या यह विवाद और अधिक राजनीतिक दलों को अपनी ओर खींचता है, खासकर पश्चिम बंगाल में जहाँ दुर्गा पूजा की राजनीतिक और सांस्कृतिक संवेदनशीलता अत्यंत गहरी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और सीपीआई(एम) ने इसे भुनाने में देर नहीं की। मणिपुर शिक्षक हत्या और केरल पत्रकार मामले को एक ही प्रेस वार्ता में उठाना बताता है कि पार्टी असहिष्णुता का एक व्यापक आख्यान गढ़ने की कोशिश में है। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक जाती है वह यह है कि इन तीनों मुद्दों की प्रकृति अलग-अलग है — इन्हें एक ही ब्रश से रंगना विश्लेषण को कमज़ोर करता है।
RashtraPress
9 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने दुर्गा पूजा को लेकर क्या कहा था?
पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा था कि पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा के दौरान मांसाहारी भोजन नहीं किया जाना चाहिए। इस बयान को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है।
सीपीआई(एम) नेता पी. संतोष कुमार ने शास्त्री पर क्या आरोप लगाए?
पी. संतोष कुमार ने 9 सितंबर को नई दिल्ली में कहा कि जिनके पास कोई काम नहीं है, वे धर्म के नाम पर समाज को तोड़ने का काम करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बंगाल में शास्त्री के जन्म से पहले भी दुर्गा पूजा मनाई जाती रही है और तब कोई विवाद नहीं था।
मणिपुर संगीत शिक्षक की हत्या के मामले में सीपीआई(एम) का क्या रुख है?
सीपीआई(एम) नेता पी. संतोष ने इस घटना को बेहद दुखद बताया और पीड़ित परिवार के साथ एकजुटता जताई। उन्होंने कहा कि देश में असहिष्णुता नहीं होनी चाहिए और अल्पसंख्यकों व दलितों पर हमले चिंताजनक हैं।
केरल में पत्रकार पर मामला क्यों दर्ज हुआ और सीपीआई(एम) ने क्या कहा?
केरल में एक टीवी डिबेट के दौरान कथित तौर पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के आरोप में एक पत्रकार के विरुद्ध मामला दर्ज किया गया। पी. संतोष ने केरल पुलिस की इस कार्रवाई को गलत बताते हुए कहा कि वे पत्रकार के साथ खड़े हैं।
क्या धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पहले भी विवादों में रहे हैं?
हाँ, बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री इससे पहले भी अपने विभिन्न बयानों को लेकर विवादों में आ चुके हैं। विपक्षी दल उनके बयानों को सामाजिक सद्भाव के लिए चुनौती मानते हैं, जबकि उनके समर्थक इन्हें सांस्कृतिक परंपराओं की पैरवी बताते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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