16 जुलाई 2026
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दुर्गा पूजा को 'उत्सव' तक सीमित किया गया: BJP प्रदेश अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य का TMC पर बड़ा हमला

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दुर्गा पूजा को 'उत्सव' तक सीमित किया गया: BJP प्रदेश अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य का TMC पर बड़ा हमला

सारांश

BJP प्रदेश अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य ने कोलकाता में खूंटी पूजा कार्यक्रम में TMC की पूर्व सरकार पर दुर्गा पूजा को धार्मिक पर्व से 'उत्सव' में बदलने का आरोप लगाया। साथ ही बांग्लादेश सीमावर्ती जिलों में हिंदू परंपराओं पर कथित दबाव का मुद्दा उठाकर उन्होंने राज्य में धर्म-राजनीति की बहस को नई धार दी।

मुख्य बातें

सामिक भट्टाचार्य (BJP प्रदेश अध्यक्ष, राज्यसभा सांसद) ने 16 जुलाई को उत्तर कोलकाता में खूंटी पूजा कार्यक्रम को संबोधित किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व TMC सरकार ने दुर्गा पूजा को धार्मिक पर्व से घटाकर महज़ 'उत्सव' बना दिया।
भट्टाचार्य ने कहा कि बांग्लादेश सीमा से लगे जिलों में हिंदू श्रद्धालुओं को शंख बजाने और 'हरि मंत्र' जाप से कथित तौर पर रोका जा रहा है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि दुर्गा पूजा का मूल उद्देश्य माँ दुर्गा की प्रतिमा और धार्मिक अनुष्ठान हैं, न कि थीम-आधारित पंडाल।
भट्टाचार्य ने इस वर्ष पूरे पश्चिम बंगाल में शांतिपूर्ण और परंपरानुसार दुर्गा पूजा का भरोसा दिलाया।

पश्चिम बंगाल भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद सामिक भट्टाचार्य ने गुरुवार, 16 जुलाई को कोलकाता में पूर्व तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार पर आरोप लगाया कि उसने दुर्गा पूजा की धार्मिक पवित्रता को जानबूझकर कमज़ोर किया और इस पर्व को महज़ एक 'उत्सव' के रूप में पेश किया। उत्तर कोलकाता में आयोजित खूंटी पूजा कार्यक्रम — जो दुर्गा पूजा की तैयारियों का पारंपरिक शुभारंभ अनुष्ठान है — में उन्होंने यह बात कही।

मुख्य आरोप: 'पूजा' से 'उत्सव' तक का सफ़र

भट्टाचार्य ने अपने संबोधन में कहा, 'हाल के वर्षों में इस अवसर को 'दुर्गा पूजा' कहने के बजाय सिर्फ 'उत्सव' कहा जाने लगा। लेकिन यह केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि दुर्गा पूजा है और इसकी पवित्रता तथा धार्मिक गरिमा को बनाए रखना आवश्यक है।' उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका इशारा कथित तौर पर पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के उस सालाना बयान की ओर माना गया जिसमें वे कहती रही हैं कि धार्मिक आस्था व्यक्तिगत होती है, किंतु उत्सव सभी का है।

भट्टाचार्य ने स्पष्ट किया कि दुर्गा पूजा का केंद्र थीम-आधारित पंडाल नहीं, बल्कि माँ दुर्गा की प्रतिमा और उससे जुड़ी धार्मिक परंपराएँ हैं। उन्होंने कहा, 'सिर्फ थीम से काम नहीं चलेगा। यदि माँ दुर्गा की प्रतिमा ही नहीं होगी तो चाहे पंडाल कितना भी भव्य क्यों न हो, लोग वहाँ नहीं आएंगे। दुर्गा पूजा सबसे पहले पूजा है और इसकी पवित्रता हर हाल में बनी रहनी चाहिए।'

जनसांख्यिकीय बदलाव पर चिंता

BJP प्रदेश अध्यक्ष ने पश्चिम बंगाल के बांग्लादेश सीमा से लगे जिलों में कथित जनसांख्यिकीय बदलाव को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ क्षेत्रों में हिंदू धार्मिक परंपराओं पर अनौपचारिक प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं।

भट्टाचार्य के अनुसार, 'पश्चिम बंगाल के कुछ जिले बांग्लादेश जैसे होते जा रहे हैं। बांग्लादेश में माँ दुर्गा की प्रतिमाओं के हाथ तोड़े जाते हैं और कलश हटाए जाते हैं। यहाँ भी लोगों के साथ वैसा ही व्यवहार किया जा रहा है। उन्हें कहा जाता है कि दीपक जला सकते हैं, लेकिन शंख नहीं बजा सकते। अंतिम यात्रा में शव का दाह संस्कार कर सकते हैं, लेकिन 'हरि मंत्र' का जाप नहीं कर सकते।' गौरतलब है कि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है।

सरकार की प्रतिक्रिया और राजनीतिक संदर्भ

यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में BJP और TMC के बीच धार्मिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर टकराव तेज़ हो रहा है। राज्य में दुर्गा पूजा न केवल एक धार्मिक पर्व है, बल्कि यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर सूची में भी शामिल है — एक ऐसी मान्यता जिसे TMC सरकार ने अपनी उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत किया था। TMC की ओर से इस बयान पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई।

आगे की उम्मीद: शांतिपूर्ण पूजा का संकल्प

भट्टाचार्य ने विश्वास जताया कि इस वर्ष पूरे पश्चिम बंगाल में सभी धार्मिक परंपराओं और रीति-रिवाजों का पालन करते हुए दुर्गा पूजा शांतिपूर्ण ढंग से मनाई जाएगी। उन्होंने कहा कि पूजा की पवित्रता बनाए रखते हुए श्रद्धालु पूरे उत्साह के साथ इस पर्व को मनाएंगे। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि BJP का यह राजनीतिक-धार्मिक आख्यान आगामी पूजा सीज़न में जनमत को किस हद तक प्रभावित करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि BJP की उस रणनीति का हिस्सा है जो पश्चिम बंगाल में हिंदू सांस्कृतिक पहचान को चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश करती है। TMC ने दुर्गा पूजा को यूनेस्को मान्यता दिलाई — जिसे वह अपनी उपलब्धि मानती है — लेकिन BJP उसी पूजा को 'धर्म बनाम उत्सव' के फ्रेम में रखकर विपक्षी आख्यान बना रही है। बांग्लादेश सीमावर्ती जिलों के दावे गंभीर हैं, लेकिन इनकी स्वतंत्र पुष्टि ज़रूरी है — बिना सत्यापन के ये दावे राजनीतिक ध्रुवीकरण को हवा देने का जोखिम रखते हैं।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सामिक भट्टाचार्य ने TMC पर दुर्गा पूजा को लेकर क्या आरोप लगाया?
भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि पूर्व TMC सरकार ने दुर्गा पूजा को धार्मिक पर्व की बजाय केवल 'उत्सव' के रूप में पेश किया, जिससे इसकी धार्मिक पवित्रता और गरिमा कमज़ोर हुई। उन्होंने कहा कि दुर्गा पूजा सबसे पहले एक पूजा है, महज़ थीम-आधारित आयोजन नहीं।
खूंटी पूजा क्या होती है और यह कार्यक्रम कहाँ हुआ?
खूंटी पूजा दुर्गा पूजा की तैयारियों की शुरुआत का पारंपरिक अनुष्ठान है, जिसमें पंडाल निर्माण की नींव रखी जाती है। यह कार्यक्रम 16 जुलाई को उत्तर कोलकाता में आयोजित हुआ, जहाँ सामिक भट्टाचार्य ने संबोधन दिया।
भट्टाचार्य ने बांग्लादेश सीमावर्ती जिलों को लेकर क्या कहा?
उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल के कुछ सीमावर्ती जिलों में हिंदू श्रद्धालुओं को शंख बजाने और 'हरि मंत्र' का जाप करने से कथित तौर पर रोका जा रहा है। ये दावे अभी तक स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुए हैं।
TMC ने इस बयान पर क्या प्रतिक्रिया दी?
भट्टाचार्य के बयान पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई। TMC सरकार ने अतीत में दुर्गा पूजा को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल कराने को अपनी उपलब्धि बताया है।
इस विवाद का पश्चिम बंगाल की राजनीति पर क्या असर हो सकता है?
यह बयान BJP की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है जो राज्य में हिंदू सांस्कृतिक-धार्मिक पहचान को राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश करती है। पूजा सीज़न से पहले इस तरह के बयान धर्म-राजनीति की बहस को तेज़ कर सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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