जौहर विश्वविद्यालय विध्वंस नोटिस: एआईएमआईएम ने अखिलेश यादव पर लगाया भाजपा से मिलीभगत का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
रामपुर के मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय की 38 इमारतों को ध्वस्त करने के नोटिस के बाद 16 जुलाई को राजनीतिक विवाद तेज हो गया, जब असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली अखिल भारतीय मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) ने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) और समाजवादी पार्टी (सपा) सुप्रीमो अखिलेश यादव पर मिलीभगत का गंभीर आरोप लगाया। रामपुर जिला प्रशासन (आरडीए) ने आजम खान द्वारा स्थापित इस विश्वविद्यालय की 40 में से 38 इमारतों को बिना स्वीकृत भवन योजनाओं के निर्मित पाए जाने के बाद विध्वंस का आदेश जारी किया है।
मुख्य घटनाक्रम
रामपुर जिला प्रशासन ने विश्वविद्यालय की 40 में से 38 इमारतों को अनधिकृत निर्माण बताते हुए विध्वंस नोटिस जारी किया। प्रशासन के अनुसार, इन भवनों के लिए कोई स्वीकृत भवन योजना उपलब्ध नहीं है। यह नोटिस बुधवार को जारी किया गया, जिसके बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का सिलसिला शुरू हो गया।
एआईएमआईएम के आरोप
एआईएमआईएम के प्रवक्ता शादाब चौहान ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी की सरकार ने विश्वविद्यालय के निर्माण के दौरान जानबूझकर एक खामी छोड़ी, और अब मौजूदा BJP सरकार उसी का फायदा उठाकर इसे ध्वस्त करने पर तुली है। चौहान ने दावा किया कि यह सब अखिलेश यादव की पूर्ण सहमति से हो रहा है।
चौहान ने यह भी आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय को जानबूझकर अखिलेश यादव की विदेश यात्रा के दौरान ध्वस्त करने की कार्रवाई की जा रही है, ताकि वे दोषमुक्त दिख सकें। उन्होंने कहा, विधानसभा में 100 विधायकों की संख्या होने के बावजूद सपा कोई आंदोलन नहीं करेगी।
अल्पसंख्यक अधिकारों पर सवाल
एआईएमआईएम प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि सपा ने मुठभेड़, मॉब लिंचिंग और बुलडोजर कार्रवाई जैसे मुद्दों पर कभी अल्पसंख्यक समुदाय की आवाज नहीं उठाई। उन्होंने कहा कि सांसदों और विधायकों की पर्याप्त संख्या होने के बावजूद पार्टी ने कभी इन मुद्दों पर विरोध दर्ज नहीं कराया। चौहान के अनुसार, अखिलेश यादव के लिए मुसलमान केवल एक 'वोट बैंक' हैं।
जवाबदेही का सवाल
एआईएमआईएम प्रवक्ता ने सवाल उठाया कि जब इमारतें बन रही थीं, तब प्रभारी अधिकारियों ने कार्रवाई क्यों नहीं की और उनकी कथित मिलीभगत पर अब तक चुप्पी क्यों है। उन्होंने माँग की कि उन अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए जो निर्माण के समय जिम्मेदार थे। साथ ही उन्होंने सरकार के 'सबका साथ, सबका विकास' के नारे पर सवाल उठाते हुए पूछा कि अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को ध्वस्त करना इस संकल्प के अनुरूप कैसे है।
आगे क्या
यह मामला उत्तर प्रदेश में अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों और बुलडोजर कार्रवाइयों को लेकर चल रही बहस को नई धार देता है। जौहर विश्वविद्यालय के भविष्य को लेकर कानूनी और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर घटनाक्रम तेज होने की संभावना है, और विभिन्न दलों की प्रतिक्रियाएँ आने वाले दिनों में राजनीतिक परिदृश्य को प्रभावित कर सकती हैं।