रवि किशन: रामलीला में लड़की का किरदार निभाने वाला पुजारी-पुत्र, आज भोजपुरी सुपरस्टार और दो बार के सांसद
सारांश
मुख्य बातें
रवि किशन शुक्ला — जिन्हें दुनिया रवि किशन के नाम से जानती है — की जीवनयात्रा संघर्ष, जुनून और अदम्य इच्छाशक्ति की एक प्रेरक गाथा है। उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले की जड़ों से जुड़े इस कलाकार ने गाँव की रामलीला से लेकर संसद के केंद्रीय कक्ष तक का सफर तय किया है। आज वह हिंदी और भोजपुरी सिनेमा के स्थापित चेहरे होने के साथ-साथ गोरखपुर लोकसभा क्षेत्र से लगातार दो बार निर्वाचित सांसद भी हैं।
बचपन और परिवार की पृष्ठभूमि
रवि किशन का जन्म 17 जुलाई 1969 को मुंबई में हुआ था, लेकिन उनकी पारिवारिक जड़ें जौनपुर, उत्तर प्रदेश से जुड़ी हुई हैं। उनके पिता एक पुजारी थे और परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य थी। बचपन से ही रवि को अभिनय और रंगमंच का गहरा लगाव था — वह गाँव की रामलीला में सक्रिय रूप से भाग लेते थे और कई अवसरों पर महिला पात्रों की भूमिका भी निभाते थे।
रवि किशन ने स्वयं कई साक्षात्कारों में स्वीकार किया है कि उनके पिता को यह शौक बिल्कुल पसंद नहीं था। पिता की इच्छा थी कि बेटा पढ़ाई-लिखाई पर ध्यान दे और किसी स्थिर पेशे में जाए। अभिनय की राह पर चलने के लिए उन्हें घर में कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा — फिर भी उनका जुनून डगमगाया नहीं।
मुंबई आगमन और संघर्ष के वर्ष
घर के हालात और पिता की नाराज़गी से परेशान होकर रवि किशन ने मुंबई का रुख किया। शुरुआती वर्षों में उन्होंने छोटे-मोटे काम किए और फिल्मों में अवसर पाने के लिए लगातार दरवाज़े खटखटाते रहे। वर्षों तक छोटी भूमिकाओं में काम करते हुए उन्होंने अपनी कला को माँजा।
उनका पहला बड़ा कदम 1992 में हिंदी फिल्म 'पीतांबर' के साथ आया। इसके बाद 1990 के दशक में उन्होंने 'आर्मी', 'जख्मी दिल' और 'आग और चिंगारी' जैसी फिल्मों में भूमिकाएँ निभाईं। यह दौर उनके लिए सीखने और खुद को साबित करने का था।
करियर का निर्णायक मोड़
रवि किशन को असली पहचान 2003 में आई फिल्म 'तेरे नाम' से मिली, जिसमें उन्होंने पुजारी का यादगार किरदार निभाया। इस फिल्म ने दर्शकों के बीच उनकी एक विशेष छवि बनाई। इसके बाद उन्होंने भोजपुरी सिनेमा की ओर रुख किया और फिल्म 'सईंया हमार' ने उन्हें भोजपुरी जगत का बड़ा सितारा बना दिया।
हिंदी और भोजपुरी के अलावा रवि किशन ने तेलुगु और कन्नड़ फिल्मों में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। उनकी उल्लेखनीय हिंदी फिल्मों में 'फिर हेरा फेरी', 'लक', 'रावण', 'एजेंट विनोद', 'बुलेट राजा', 'मुक्काबाज', 'बाटला हाउस' और 'लापता लेडीज़' शामिल हैं।
फिल्म 'लापता लेडीज़' में उनके पुलिस अधिकारी के किरदार को विशेष सराहना मिली और इस भूमिका के लिए उन्हें फिल्मफेयर तथा आईफा अवॉर्ड में बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का सम्मान मिला।
टेलीविज़न और अन्य उपलब्धियाँ
रवि किशन ने टेलीविज़न पर भी अपनी छाप छोड़ी। वह 'बिग बॉस' जैसे चर्चित रियलिटी शो का हिस्सा रहे और कई कार्यक्रमों की मेज़बानी भी की। उन्होंने हॉलीवुड फिल्म 'स्पाइडर-मैन 3' के भोजपुरी डब संस्करण में अपनी आवाज़ देकर एक अनोखा कीर्तिमान भी स्थापित किया।
राजनीति में प्रवेश और संसदीय सफर
अभिनय में सफलता के बाद रवि किशन ने राजनीति की राह चुनी। 2019 के लोकसभा चुनाव में वह गोरखपुर सीट से सांसद चुने गए और 2024 में उन्होंने यह सीट दोबारा जीती। आज वह संसद और फिल्मी दुनिया — दोनों मोर्चों पर समान रूप से सक्रिय हैं। गाँव की रामलीला से शुरू हुई उनकी यात्रा यह सिद्ध करती है कि दृढ़ इच्छाशक्ति किसी भी परिस्थिति को बदल सकती है।