क्या अभिनेता यश ने जेब में 300 रुपए लेकर घर छोड़ा और सुपरस्टार बन गए?
सारांश
Key Takeaways
- यश की प्रेरणादायक कहानी संघर्ष और मेहनत की मिसाल है।
- सपनों के पीछे भागने से कभी न डरें।
- बेंगलुरु में अपने करियर की शुरुआत करना एक साहसिक कदम था।
- यश ने केजीएफ से कन्नड़ सिनेमा में नई ऊँचाइयाँ हासिल कीं।
- यशो मार्ग फाउंडेशन समाज सेवा में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
मुंबई, 7 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। दक्षिण भारतीय फिल्म इंडस्ट्री का नाम सुनते ही कई मशहूर सितारों के चेहरे हमारी आंखों के सामने आ जाते हैं। इन सितारों में से एक हैं अभिनेता यश। उन्होंने अपनी मेहनत और अद्भुत जज्बे के चलते लाखों लोगों के दिलों में अपनी जगह बनाई है। उनकी कहानी आसान नहीं रही। बचपन से ही उन्हें फिल्मों और अभिनय के प्रति गहरी रुचि थी, और इस जुनून के चलते उन्होंने ऐसा साहसिक कदम उठाने का निर्णय लिया, जो बिल्कुल भी सरल नहीं था। वह अपने सपनों के पीछे भागते हुए घर से निकल पड़े।
यश का जन्म 8 जनवरी 1986 को कर्नाटक के हासन जिले के छोटे से गांव भुवनहल्ली में हुआ। उनका असली नाम नवीन कुमार गौड़ा है। उनके पिता बीएमटीसी में बस चालक के रूप में कार्यरत थे और माँ गृहिणी थीं। घर का माहौल बहुत साधारण था, और यश के माता-पिता चाहते थे कि उनका बेटा पढ़-लिखकर सरकारी नौकरी करे। लेकिन यश का दिल बचपन से ही अभिनय में गहराई से बसा था। वह स्कूल के नाटकों और डांस प्रतियोगिताओं में भाग लेते थे, और जब दर्शक तालियां बजाते थे, तो उन्हें लगता जैसे वह हीरो बन गए हों।
यश की कहानी में सबसे दिलचस्प मोड़ तब आया, जब उन्होंने अपने परिवार को छोड़कर केवल 300 रुपए लेकर बेंगलुरु जाने का निर्णय किया। उन्हें पता था कि अगर वह लौटे, तो घर वाले उन्हें फिल्मों में आने से रोक देंगे। बेंगलुरु पहुंचकर यश ने थिएटर के बैकस्टेज काम से अपने करियर की शुरुआत की। उन्हें आरंभ में मुख्य भूमिकाएं नहीं मिलीं, लेकिन उन्होंने रिप्लेसमेंट रोल्स और छोटे काम भी पूरी मेहनत से किए। यही छोटी-छोटी मेहनत उनके बड़े सपनों की नींव बनी।
यश ने 2008 में अपनी पहली फिल्म 'मोगिना मनासु' से कन्नड़ सिनेमा में कदम रखा। इस फिल्म के लिए उन्हें बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का फिल्मफेयर पुरस्कार भी प्राप्त हुआ। इसके बाद उन्होंने कई सफल फिल्मों में काम किया, जैसे 'राजधानी', 'गजकेसरी', और 'मास्टरपीस'। धीरे-धीरे वह लोकप्रिय होते गए, लेकिन उनकी किस्मत की असली चमक तब शुरू हुई जब 2018 में 'केजीएफ चैप्टर 1' रिलीज हुई। इस फिल्म में उन्होंने रॉकी का किरदार निभाया, जो दर्शकों के दिलों में बस गया। इस फिल्म ने उनके करियर की दिशा को पूरी तरह से बदल दिया।
यश का निजी जीवन भी उनके फैंस के लिए खास है। लंबे समय तक अपनी को-स्टार राधिका पंडित को डेट करने के बाद उन्होंने 2016 में शादी कर ली। इस जोड़ी ने समाज सेवा के लिए यशो मार्ग फाउंडेशन भी स्थापित किया, जो कर्नाटक के ग्रामीण क्षेत्रों में पानी और शिक्षा जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराता है। शादी के बाद उनके दो बच्चे हुए, जिनके नाम आयरा और यथर्व हैं।
केजीएफ के बाद यश ने अपनी लोकप्रियता और मेहनत दोनों को नए स्तर पर पहुंचाया। 'केजीएफ चैप्टर 2' ने न केवल दर्शकों का दिल जीता, बल्कि 1,100 करोड़ रुपए से अधिक की कमाई कर कन्नड़ सिनेमा के इतिहास में नया रिकॉर्ड भी बनाया।