क्या फरहान अख्तर के जीवन में 'दूसरा प्यार' तनाव को दूर करने में मदद करता है?
सारांश
Key Takeaways
- फरहान अख्तर का जीवन कला और खेल के इर्द-गिर्द घूमता है।
- खेल उनके लिए तनाव को कम करने का एक महत्वपूर्ण साधन है।
- उन्होंने सहायक निर्देशक के रूप में अपने करियर की शुरुआत की।
- फरहान ने कई सफल फिल्मों का निर्देशन किया है।
- उनका संगीत में भी योगदान है, जिसमें कई हिट गाने शामिल हैं।
मुंबई, 8 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। मुंबई में जन्मे फरहान अख्तर न केवल बॉलीवुड के एक प्रमुख अभिनेता और निर्देशक हैं, बल्कि एक ऐसे व्यक्ति हैं जिनकी ज़िंदगी में कला और खेल दोनों का विशेष महत्व है। बचपन से ही फरहान ने अपने जीवन को खुलकर जीया और अपने माता-पिता से सीखा कि जीवन में सवाल पूछना और नई चीज़ें सीखना कितना आवश्यक है। उनके पिता जावेद अख्तर और मां हनी ईरानी ने उन्हें कभी किसी धर्म या सामाजिक बंधनों में नहीं बांधा।
इसीलिए फरहान ने हर चीज़ में अपनी स्वतंत्र सोच और जुनून को अपनाया। बचपन में वह अक्सर अपने दोस्तों के साथ क्रिकेट और फुटबॉल खेलते थे। वह इन खेलों को अपनी ज़िंदगी का दूसरा प्यार मानते हैं। आज भी उनके लिए खेल केवल खेल नहीं, बल्कि तनाव दूर करने और रिलैक्स होने का एक महत्वपूर्ण साधन है।
फरहान अख्तर का जन्म 9 जनवरी 1974 को मुंबई में हुआ था। उनके पिता, जावेद अख्तर एक प्रसिद्ध गीतकार और स्क्रीनप्ले लेखक हैं, जबकि उनकी मां, हनी ईरानी, भी फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ी रहीं हैं। उन्होंने बचपन से ही सवाल पूछने और चीज़ों की गहराई में जाने का महत्व समझा। यही सोच उनके करियर में भी झलकती है। सहायक निर्देशक के नाते उनका बॉलीवुड में सफर शुरू हुआ।
उन्होंने पहले 'लम्हे' (1991) और 'हिमालय पुत्र' (1997) में सहायक निर्देशक के रूप में कार्य किया। इसके बाद, उन्होंने 'दिल चाहता है' (2001) से अपने निर्देशन की यात्रा शुरू की। इस फिल्म ने न केवल युवाओं में प्रसिद्धि पाई, बल्कि इसे राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला। इसके बाद उन्होंने 'लक्ष्य' (2004) और 'डॉन' (2006) जैसी फिल्मों का निर्देशन किया, जिनमें उनकी रचनात्मकता और नवाचार स्पष्ट नजर आती है।
हालांकि, फरहान के करियर की एक विशेषता यह है कि वह सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने अभिनय में भी कदम रखा और 'रॉक ऑन!!' (2008) से अपने अभिनय का सफर शुरू किया। इसके बाद उन्होंने 'जिंदगी ना मिलेगी दोबारा' (2011) और 'भाग मिल्खा भाग' (2013) जैसी फिल्मों में बेहतरीन प्रदर्शन किया। इन फिल्मों ने उन्हें फिल्मफेयर और कई अन्य पुरस्कार दिलाए।
फरहान का खेलों के प्रति प्रेम उनके पेशेवर जीवन में भी झलकता है। वह अक्सर शूटिंग के बीच क्रिकेट या फुटबॉल खेलते नजर आते हैं। उन्होंने कई बार कहा है कि जब वह फिल्मों के तनाव और व्यस्तता से थक जाते हैं, तो फुटबॉल खेलना उन्हें ताजगी और ऊर्जा प्रदान करता है। वह अपने जीवन में खेलों को हमेशा प्राथमिकता देते हैं।
फरहान ने अपने करियर में संगीत में भी पहचान बनाई है। उन्होंने 'सेनोरिटा', 'पिछले सात दिनों में', 'तुम हो तो', 'यहां वहां', 'अंतरंगी यारी', और 'सोचा है' जैसे गानों से अपनी संगीत प्रतिभा को साबित किया। इसके अलावा, उन्होंने एक्सल एंटरटेनमेंट जैसे प्रोडक्शन हाउस की भी शुरुआत की।