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कादियां नगर परिषद चुनाव में जनादेश पलटने का आरोप: कांग्रेस नेता बाजवा ने AAP सरकार को घेरा

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कादियां नगर परिषद चुनाव में जनादेश पलटने का आरोप: कांग्रेस नेता बाजवा ने AAP सरकार को घेरा

सारांश

कादियां नगर परिषद अध्यक्ष चुनाव में कांग्रेस के पास 15 में से 8 सदस्यों का समर्थन था — फिर भी जीत नहीं मिली। विपक्ष के नेता बाजवा का आरोप है कि AAP समर्थकों ने पार्षदों का अपहरण किया, पुलिस ने हाई कोर्ट के निर्देश दरकिनार किए और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को दिनदहाड़े कुचला गया।

मुख्य बातें

कांग्रेस नेता प्रताप सिंह बाजवा ने 16 जुलाई को कादियां नगर परिषद चुनाव में जनादेश पलटने का आरोप AAP सरकार पर लगाया।
कांग्रेस का दावा है कि उसके पास 15 में से 8 सदस्यों का समर्थन था, जो अध्यक्ष चुनाव के लिए पर्याप्त बहुमत था।
पार्षद जोगिंदर कुमार और नरिंदर कुमार का कथित तौर पर मतदान से पहले अपहरण किया गया; पार्षद राजेश कुमार को कथित रूप से गैर-कानूनी हिरासत में लिया गया।
पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने निष्पक्ष चुनाव के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त किया था, लेकिन आरोप है कि पुलिस ने उसके निर्देशों का पालन नहीं किया।
बाजवा ने दोषी पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई और पूरे मामले की निष्पक्ष जाँच की माँग की है।

पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने 16 जुलाई को कादियां नगर परिषद के अध्यक्ष पद के चुनाव में कथित धांधली को लेकर मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर तीखा हमला बोला। बाजवा का आरोप है कि सरकार ने स्पष्ट बहुमत के बावजूद कांग्रेस को अध्यक्ष चुनने से रोका और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमज़ोर किया।

कांग्रेस का दावा: बहुमत था, फिर भी हारे

बाजवा के अनुसार, कांग्रेस को नगर परिषद के 15 में से 8 सदस्यों का समर्थन प्राप्त था — जो अध्यक्ष चुनाव के लिए पर्याप्त बहुमत है। इनमें वार्ड नंबर 1 से गुरबचन सिंह, वार्ड नंबर 2 से देबो, वार्ड नंबर 3 से सुखप्रीत सिंह, वार्ड नंबर 4 से हरपाल कौर, वार्ड नंबर 7 से नरेंद्र कुमार, वार्ड नंबर 9 से जतिंदर कुमार और वार्ड नंबर 11 से राजेश कुमार शामिल हैं। स्थानीय विधायक के वोट के साथ यह संख्या आठ तक पहुँचती थी, जो अध्यक्ष चुनाव के लिए पर्याप्त थी। उन्होंने यह भी बताया कि कुछ अन्य पार्षदों से भी समर्थन का आश्वासन मिला था।

कथित अपहरण और गैर-कानूनी हिरासत के आरोप

बाजवा ने गंभीर आरोप लगाए कि AAP समर्थकों ने कांग्रेस पार्षद जोगिंदर कुमार और नरिंदर कुमार का कथित तौर पर उस समय अपहरण कर लिया, जब वे मतदान के लिए नगर परिषद परिसर में प्रवेश कर रहे थे। इसके अलावा, उनका आरोप है कि जिला प्रशासन ने कांग्रेस पार्षद राजेश कुमार को गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में लिया — बाद में जमानत मिलने पर उन्हें रिहा किया गया। उल्लेखनीय है कि पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए एक पर्यवेक्षक नियुक्त किया था और स्पष्ट निर्देश दिए थे कि किसी भी पार्षद को ऐसे तरीके से गिरफ्तार न किया जाए कि वह चुनाव प्रक्रिया में भाग न ले सके।

बाजवा ने क्या कहा

कादियां में मीडिया से बात करते हुए बाजवा ने कहा, 'कांग्रेस लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत नगर परिषद का अध्यक्ष चुनने की मजबूत स्थिति में थी, लेकिन आम आदमी पार्टी सरकार को पता था कि उसके पास पर्याप्त संख्या नहीं है, इसलिए उसने दिनदहाड़े लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमज़ोर कर दिया।' उन्होंने इस पूरी घटना को 'संवैधानिक शर्मिंदगी' करार दिया।

उच्च न्यायालय के निर्देशों के उल्लंघन का आरोप

विपक्ष के नेता ने आरोप लगाया कि जिला पुलिस उच्च न्यायालय के निर्देशों के बावजूद मूकदर्शक बनी रही और हस्तक्षेप नहीं किया। उन्होंने हाई कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन करने वाले पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई की माँग की। साथ ही, कथित अपहरण, गैर-कानूनी हिरासत और चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप की निष्पक्ष जाँच की भी माँग की।

AAP सरकार पर व्यापक हमला

बाजवा ने कहा, 'जो सरकार लोकतांत्रिक तरीके से जीत हासिल नहीं कर सकती, वह ताकत, डराने-धमकाने और पुलिस तंत्र के दुरुपयोग का सहारा ले रही है। यह सिर्फ कांग्रेस पर हमला नहीं, बल्कि संविधान, कानून के शासन और पंजाब के लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों पर भी हमला है।' यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब पंजाब में AAP और कांग्रेस के बीच स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर राजनीतिक तनाव पहले से ही बढ़ा हुआ है। इस मामले में उच्च न्यायालय और प्रशासन की भूमिका आगे भी जाँच के दायरे में रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

न्यायिक अवमानना का मामला बनता है। AAP ने 2022 में पंजाब में 'ईमानदार राजनीति' के वादे पर सत्ता पाई थी; स्थानीय निकायों में इस तरह के आरोप उसी छवि पर सबसे बड़ा दाग हैं। असली जवाबदेही तब होगी जब उच्च न्यायालय स्वतः संज्ञान ले — अन्यथा यह घटना आरोप-प्रत्यारोप की लंबी सूची में एक और नाम बनकर रह जाएगी।
RashtraPress
31 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कादियां नगर परिषद चुनाव विवाद क्या है?
16 जुलाई को कादियां नगर परिषद के अध्यक्ष पद के चुनाव में कांग्रेस ने AAP सरकार पर जनादेश पलटने का आरोप लगाया है। कांग्रेस का दावा है कि उसके पास 15 में से 8 सदस्यों का समर्थन था, फिर भी पार्षदों के कथित अपहरण और हिरासत के ज़रिए उसे जीत से रोका गया।
प्रताप सिंह बाजवा ने AAP पर क्या-क्या आरोप लगाए?
बाजवा ने तीन मुख्य आरोप लगाए — AAP समर्थकों द्वारा दो कांग्रेस पार्षदों का कथित अपहरण, एक पार्षद की कथित गैर-कानूनी हिरासत, और पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के निर्देशों की पुलिस द्वारा अनदेखी। उन्होंने इसे 'संवैधानिक शर्मिंदगी' कहा।
पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय की इस चुनाव में क्या भूमिका थी?
उच्च न्यायालय ने निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए एक पर्यवेक्षक नियुक्त किया था और स्पष्ट निर्देश दिए थे कि किसी भी पार्षद को ऐसे तरीके से गिरफ्तार न किया जाए कि वह मतदान में भाग न ले सके। कांग्रेस का आरोप है कि इन निर्देशों का पालन नहीं किया गया।
कांग्रेस ने इस मामले में क्या माँगें रखी हैं?
कांग्रेस नेता बाजवा ने हाई कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन करने वाले पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई की माँग की है। साथ ही, कथित अपहरण, गैर-कानूनी हिरासत और चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप की निष्पक्ष और गहन जाँच की भी माँग की है।
AAP सरकार की इस पर क्या प्रतिक्रिया है?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, AAP सरकार की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह मामला राजनीतिक रूप से संवेदनशील है और आगे न्यायिक या प्रशासनिक कार्रवाई की संभावना बनी हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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