16 जुलाई 2026
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खन्ना पुलिस कार्रवाई पर सुखबीर बादल का भगवंत मान सरकार पर हमला, 'डंडा-तंत्र' का आरोप

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खन्ना पुलिस कार्रवाई पर सुखबीर बादल का भगवंत मान सरकार पर हमला, 'डंडा-तंत्र' का आरोप

सारांश

खन्ना में बकाया मजदूरी माँग रहे संविदा कर्मचारियों पर कथित पुलिस बल प्रयोग के बाद सुखबीर बादल ने भगवंत मान सरकार को 'डंडा-तंत्र' का नाम दिया। शिअद ने कर्मचारियों के समर्थन का ऐलान करते हुए 2027 में सत्ता में आने पर उनकी मांगें पूरी करने का वादा किया।

मुख्य बातें

शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने 15 जुलाई को पंजाब सरकार पर तीखा हमला बोला।
आरोप है कि खन्ना में कैबिनेट मंत्री तरुणप्रीत सिंह सोंध के आवास के बाहर प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों पर लाठीचार्ज, वॉटर कैनन और आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया।
प्रदर्शनकारी संविदा कर्मचारी और मजदूर थे, जो अपनी बकाया मजदूरी के भुगतान की मांग कर रहे थे।
बादल ने इस कार्रवाई को लोकतंत्र के बजाय 'डंडा-तंत्र' करार दिया।
शिअद ने वादा किया कि 2027 में सरकार बनने पर कर्मचारियों की लंबित मांगें प्राथमिकता से हल की जाएंगी।

शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने 15 जुलाई को खन्ना में संविदा कर्मचारियों और मजदूरों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर पंजाब की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार और मुख्यमंत्री भगवंत मान पर तीखा प्रहार किया। बादल ने आरोप लगाया कि बकाया मजदूरी की मांग को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों पर लाठीचार्ज, वॉटर कैनन और आंसू गैस के गोले दागे गए — जिसे उन्होंने लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध बताया।

मुख्य घटनाक्रम

बादल के अनुसार, प्रदर्शनकारी खन्ना में कैबिनेट मंत्री तरुणप्रीत सिंह सोंध के आवास के बाहर एकत्र हुए थे। वे 'सतनाम वाहेगुरु' का जाप करते हुए शांतिपूर्वक अपनी बकाया मजदूरी के भुगतान की मांग कर रहे थे। इसी दौरान, बादल के दावे के अनुसार, पुलिस ने बल प्रयोग किया।

बादल के आरोप

सुखबीर सिंह बादल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए मान सरकार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों को शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार है, और सरकार का यह रवैया 'डंडा-तंत्र' से कम नहीं। उनका आरोप है कि पंजाब सरकार कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय दमनात्मक नीति अपना रही है।

शिअद का समर्थन और 2027 का वादा

शिरोमणि अकाली दल की ओर से बादल ने प्रदर्शनकारी कर्मचारियों और मजदूरों के प्रति एकजुटता जताई। उन्होंने वादा किया कि यदि 2027 के विधानसभा चुनाव में शिअद की सरकार बनती है, तो कर्मचारियों की लंबित मांगों को प्राथमिकता के आधार पर हल किया जाएगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब पंजाब में अगले विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी बढ़ने लगी है।

व्यापक संदर्भ

गौरतलब है कि पंजाब में संविदा कर्मचारियों और मजदूरों के बकाया भुगतान का मसला लंबे समय से विवाद का विषय रहा है। AAP सरकार ने सत्ता में आते समय कर्मचारी कल्याण के बड़े वादे किए थे, और आलोचकों का कहना है कि इन वादों पर अमल अपेक्षाओं से कम रहा है। विपक्ष इस घटना को सरकार की कथित विफलता के प्रमाण के रूप में पेश कर रहा है।

आगे क्या

अभी तक पंजाब सरकार या मुख्यमंत्री भगवंत मान की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह मुद्दा 2027 चुनाव तक विपक्ष के लिए एक प्रमुख हथियार बना रह सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो 2022 में ऐतिहासिक हार के बाद अपनी साख पुनर्स्थापित करने की कोशिश में है, कर्मचारी असंतोष को AAP सरकार के खिलाफ एक व्यापक आख्यान में बदलने की कोशिश कर रहा है। लेकिन यह भी उतना ही सच है कि संविदा कर्मचारियों की बकाया मजदूरी की समस्या शिअद के अपने शासनकाल में भी अनसुलझी रही — एक विरोधाभास जिसे मान सरकार उजागर कर सकती है। असली सवाल यह है कि क्या विपक्ष की यह सहानुभूति चुनावी वादों से आगे जाकर ठोस नीतिगत विकल्प के रूप में सामने आएगी।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

खन्ना में कर्मचारियों पर पुलिस कार्रवाई क्यों हुई?
सुखबीर बादल के अनुसार, संविदा कर्मचारी और मजदूर खन्ना में कैबिनेट मंत्री तरुणप्रीत सिंह सोंध के आवास के बाहर अपनी बकाया मजदूरी के भुगतान की मांग को लेकर शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान कथित तौर पर पुलिस ने लाठीचार्ज, वॉटर कैनन और आंसू गैस का इस्तेमाल किया।
सुखबीर बादल ने भगवंत मान सरकार को 'डंडा-तंत्र' क्यों कहा?
बादल का आरोप है कि पंजाब सरकार कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय बल प्रयोग का रास्ता अपना रही है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार है, और इसे दबाना 'डंडा-तंत्र' है।
शिरोमणि अकाली दल ने कर्मचारियों के लिए क्या वादा किया है?
शिअद अध्यक्ष सुखबीर बादल ने कहा कि यदि 2027 के विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी की सरकार बनती है, तो कर्मचारियों और मजदूरों की लंबित मांगों पर प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना में कौन-से प्रदर्शनकारी शामिल थे?
बादल के अनुसार, प्रदर्शनकारी संविदा पर कार्यरत कर्मचारी और गरीब मजदूर थे जो केवल अपनी बकाया मजदूरी के भुगतान की मांग कर रहे थे। वे 'सतनाम वाहेगुरु' का जाप करते हुए शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे थे।
पंजाब सरकार की इस मामले पर क्या प्रतिक्रिया है?
अभी तक मुख्यमंत्री भगवंत मान या पंजाब सरकार की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह मामला राजनीतिक रूप से संवेदनशील बना हुआ है।
राष्ट्र प्रेस
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