3 अगस्त 2026
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अकाली दल का 19 जून से 'धर्म युद्ध मोर्चा', भगवंत मान को हटाने की माँग

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अकाली दल का 19 जून से 'धर्म युद्ध मोर्चा', भगवंत मान को हटाने की माँग

सारांश

शिरोमणि अकाली दल ने 19 जून से 'धर्म युद्ध मोर्चा' का ऐलान किया है — श्री अकाल तख्त साहिब की छत्रछाया में। निशाने पर हैं मुख्यमंत्री भगवंत मान, जिन पर 'घोर बेअदबी' के आरोप हैं। अकाली विधायकों ने विधानसभा बहिष्कार का भी ऐलान किया है।

मुख्य बातें

शिरोमणि अकाली दल (SAD) ने 19 जून 2026 से 'धर्म युद्ध मोर्चा' शुरू करने की घोषणा की।
मोर्चे का उद्देश्य पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को पद से हटाना है; उन पर 'घोर बेअदबी' का आरोप।
SAD अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने सरदार बलविंदर सिंह भुंडर की अध्यक्षता में पाँच सदस्यीय समन्वय समिति बनाई।
अकाली विधायकों ने मान के पद पर रहते हुए पंजाब विधानसभा का बहिष्कार करने का ऐलान किया।
बादल ने AAP, कांग्रेस और BJP के सिख नेताओं समेत सभी धार्मिक-सामाजिक संगठनों से मोर्चे में शामिल होने की अपील की।

शिरोमणि अकाली दल (SAD) ने 19 जून 2026 को श्री अकाल तख्त साहिब की छत्रछाया में 'धर्म युद्ध मोर्चा' शुरू करने की घोषणा की है, जिसका एकमात्र लक्ष्य पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को पद से हटाना है। अकाली दल ने मान पर 'घोर बेअदबी' — अर्थात सिख धार्मिक मर्यादाओं के गंभीर उल्लंघन — का आरोप लगाया है।

मोर्चे की घोषणा और पृष्ठभूमि

SAD अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने 18 जून को मीडिया से बात करते हुए कहा कि यह मोर्चा श्री अकाल तख्त साहिब के आध्यात्मिक संरक्षण में आरंभ किया जाएगा। उन्होंने कहा, 'भगवंत मान ने गुरु साहिबान और सिख नायकों के खिलाफ जो किया है, वह बर्दाश्त करने लायक नहीं है। सिख समुदाय के सब्र की बहुत परीक्षा ली जा चुकी है और अब हद हो गई है।'

गौरतलब है कि यह आंदोलन ऐसे समय में शुरू हो रहा है जब पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार और विपक्षी दलों के बीच तनाव पहले से ही बढ़ा हुआ है। अकाली दल के अनुसार, मान पर उनके अपने परिवार — जिसमें उनकी बेटी भी शामिल हैं — ने नशे की हालत में सिख धार्मिक स्थलों पर जाकर पवित्रता का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। मान ने इन आरोपों पर अभी तक कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

समन्वय समिति का गठन

बादल ने मोर्चे के संचालन के लिए पाँच सदस्यीय समन्वय समिति का गठन किया है, जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ अकाली नेता सरदार बलविंदर सिंह भुंडर करेंगे। समिति के अन्य सदस्यों में महेश इंदर सिंह ग्रेवाल, गुलजार सिंह रणीके, दलजीत सिंह चीमा और अमरजीत सिंह चावला शामिल हैं। यह समिति विभिन्न धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक संगठनों से संपर्क कर उन्हें मोर्चे में शामिल होने के लिए आमंत्रित करेगी।

सभी दलों से अपील

बादल ने धार्मिक संगठनों, संत समाज, सिख विद्वानों और बुद्धिजीवियों के साथ-साथ AAP, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सिख नेताओं से भी मोर्चे में शामिल होने की अपील की। उन्होंने मान को 'गुरु-द्रोही और पंथ-विरोधी' करार दिया — एक अत्यंत गंभीर आरोप जो सिख धार्मिक परंपरा में किसी व्यक्ति को समुदाय से बाहर घोषित करने के समकक्ष माना जाता है।

विधानसभा बहिष्कार का ऐलान

बादल ने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक भगवंत मान पंजाब के मुख्यमंत्री के पद पर बने रहेंगे, तब तक अकाली विधायक पंजाब विधानसभा की कार्यवाही में भाग नहीं लेंगे। यह कदम संसदीय विरोध के अलावा सड़क पर आंदोलन की दोहरी रणनीति को दर्शाता है।

आगे क्या होगा

मोर्चे की शुरुआत 19 जून से श्री अकाल तख्त साहिब से होनी है। समन्वय समिति की बैठकें शीघ्र होने की उम्मीद है, जिसमें आंदोलन का विस्तार और भविष्य की रणनीति तय की जाएगी। पंजाब सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो पंजाब में बेहद प्रभावशाली रही है। श्री अकाल तख्त साहिब का आह्वान करके SAD ने इस आंदोलन को पार्टी-राजनीति से ऊपर उठाकर सिख धार्मिक अस्मिता का मुद्दा बना दिया है। हालाँकि, यह भी उतना ही सच है कि SAD स्वयं 2017 के बाद से लगातार चुनावी पराजय झेल रही है और भगवंत मान पर आरोप लगाने वाले स्रोत — उनका अपना परिवार — इस दावे की विश्वसनीयता को जटिल बनाते हैं। असली सवाल यह है कि क्या यह मोर्चा आम जनता को — जिसने 2022 में AAP को भारी बहुमत दिया — वास्तव में प्रभावित कर पाएगा, या यह केवल धार्मिक भावनाओं का राजनीतिक दोहन बनकर रह जाएगा।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'धर्म युद्ध मोर्चा' क्या है और यह कब शुरू होगा?
'धर्म युद्ध मोर्चा' शिरोमणि अकाली दल द्वारा 19 जून 2026 को श्री अकाल तख्त साहिब की छत्रछाया में शुरू किया जाने वाला आंदोलन है। इसका मुख्य उद्देश्य पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को 'घोर बेअदबी' के आरोपों के आधार पर पद से हटाना है।
भगवंत मान पर 'घोर बेअदबी' के क्या आरोप हैं?
SAD अध्यक्ष सुखबीर बादल के अनुसार, मान पर उनके अपने परिवार — जिसमें उनकी बेटी भी शामिल हैं — ने नशे की हालत में सिख धार्मिक स्थलों पर जाकर पवित्रता का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। इसके अलावा बादल का दावा है कि मान ने संसद और विधानसभा में सिख कौम को बदनाम किया है।
अकाली दल ने मोर्चे के लिए क्या संगठनात्मक ढाँचा बनाया है?
SAD ने सरदार बलविंदर सिंह भुंडर की अध्यक्षता में पाँच सदस्यीय समन्वय समिति गठित की है। इसमें महेश इंदर सिंह ग्रेवाल, गुलजार सिंह रणीके, दलजीत सिंह चीमा और अमरजीत सिंह चावला शामिल हैं, जो विभिन्न संगठनों से संपर्क कर मोर्चे को व्यापक समर्थन दिलाएँगे।
क्या अकाली विधायक विधानसभा का बहिष्कार करेंगे?
हाँ। सुखबीर बादल ने स्पष्ट किया है कि जब तक भगवंत मान पंजाब के मुख्यमंत्री के पद पर बने रहेंगे, तब तक अकाली विधायक पंजाब विधानसभा की कार्यवाही में भाग नहीं लेंगे। यह सड़क आंदोलन के साथ-साथ संसदीय विरोध की दोहरी रणनीति का हिस्सा है।
क्या अन्य राजनीतिक दलों ने इस मोर्चे का समर्थन किया है?
अभी तक कोई औपचारिक समर्थन सामने नहीं आया है। बादल ने AAP, कांग्रेस और BJP के सिख नेताओं से मोर्चे में शामिल होने की अपील की है, लेकिन इन दलों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
राष्ट्र प्रेस
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