अकाली दल का 19 जून से 'धर्म युद्ध मोर्चा', भगवंत मान को हटाने की माँग
सारांश
मुख्य बातें
शिरोमणि अकाली दल (SAD) ने 19 जून 2026 को श्री अकाल तख्त साहिब की छत्रछाया में 'धर्म युद्ध मोर्चा' शुरू करने की घोषणा की है, जिसका एकमात्र लक्ष्य पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को पद से हटाना है। अकाली दल ने मान पर 'घोर बेअदबी' — अर्थात सिख धार्मिक मर्यादाओं के गंभीर उल्लंघन — का आरोप लगाया है।
मोर्चे की घोषणा और पृष्ठभूमि
SAD अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने 18 जून को मीडिया से बात करते हुए कहा कि यह मोर्चा श्री अकाल तख्त साहिब के आध्यात्मिक संरक्षण में आरंभ किया जाएगा। उन्होंने कहा, 'भगवंत मान ने गुरु साहिबान और सिख नायकों के खिलाफ जो किया है, वह बर्दाश्त करने लायक नहीं है। सिख समुदाय के सब्र की बहुत परीक्षा ली जा चुकी है और अब हद हो गई है।'
गौरतलब है कि यह आंदोलन ऐसे समय में शुरू हो रहा है जब पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार और विपक्षी दलों के बीच तनाव पहले से ही बढ़ा हुआ है। अकाली दल के अनुसार, मान पर उनके अपने परिवार — जिसमें उनकी बेटी भी शामिल हैं — ने नशे की हालत में सिख धार्मिक स्थलों पर जाकर पवित्रता का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। मान ने इन आरोपों पर अभी तक कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
समन्वय समिति का गठन
बादल ने मोर्चे के संचालन के लिए पाँच सदस्यीय समन्वय समिति का गठन किया है, जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ अकाली नेता सरदार बलविंदर सिंह भुंडर करेंगे। समिति के अन्य सदस्यों में महेश इंदर सिंह ग्रेवाल, गुलजार सिंह रणीके, दलजीत सिंह चीमा और अमरजीत सिंह चावला शामिल हैं। यह समिति विभिन्न धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक संगठनों से संपर्क कर उन्हें मोर्चे में शामिल होने के लिए आमंत्रित करेगी।
सभी दलों से अपील
बादल ने धार्मिक संगठनों, संत समाज, सिख विद्वानों और बुद्धिजीवियों के साथ-साथ AAP, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सिख नेताओं से भी मोर्चे में शामिल होने की अपील की। उन्होंने मान को 'गुरु-द्रोही और पंथ-विरोधी' करार दिया — एक अत्यंत गंभीर आरोप जो सिख धार्मिक परंपरा में किसी व्यक्ति को समुदाय से बाहर घोषित करने के समकक्ष माना जाता है।
विधानसभा बहिष्कार का ऐलान
बादल ने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक भगवंत मान पंजाब के मुख्यमंत्री के पद पर बने रहेंगे, तब तक अकाली विधायक पंजाब विधानसभा की कार्यवाही में भाग नहीं लेंगे। यह कदम संसदीय विरोध के अलावा सड़क पर आंदोलन की दोहरी रणनीति को दर्शाता है।
आगे क्या होगा
मोर्चे की शुरुआत 19 जून से श्री अकाल तख्त साहिब से होनी है। समन्वय समिति की बैठकें शीघ्र होने की उम्मीद है, जिसमें आंदोलन का विस्तार और भविष्य की रणनीति तय की जाएगी। पंजाब सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।