बिक्रम सिंह मजीठिया का भगवंत मान पर हमला: 'झूठे और शराबी' — वायरल वीडियो विवाद में अकाल तख्त का फैसला 'पूरी तरह सही'
सारांश
मुख्य बातें
शिरोमणि अकाली दल (SAD) के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने बुधवार, 24 जून को पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें 'बेशर्म', 'झूठा' और 'शराबी' करार दिया। यह बयान उस वायरल वीडियो से जुड़े विवाद के बीच आया है जिसमें कथित तौर पर मान को सिख गुरुओं की तस्वीरों का अपमान करते हुए दिखाया गया है। अकाल तख्त द्वारा मान को 'गुरुद्रोही' घोषित किए जाने के बाद यह राजनीतिक विवाद और गहरा हो गया है।
मजीठिया के आरोप: परिवार और साथियों के हवाले से
मजीठिया ने कहा, 'मुख्यमंत्री बेशर्म, झूठे और शराबी हैं। यह बात हम नहीं कह रहे — खुद उनके बच्चों ने यह कहा है। उनकी पूर्व पत्नी ने उन्हें क्यों छोड़ा? इन्हीं वजहों से।' उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पंजाब विधानसभा के भीतर मान के साथ मौजूद विधायकों ने शिकायत की थी कि उन्हें शराब की लत है।
मजीठिया ने आगे कहा कि मुख्यमंत्री शराब पीकर गुरु घर गए थे और यह आरोप उनके 'अपने परिवार के सदस्यों और साथियों' ने लगाए हैं।
वीडियो विवाद और फोरेंसिक रिपोर्ट पर सवाल
SAD नेता के अनुसार, विवादित वीडियो को मुख्यमंत्री भगवंत मान के मित्र जगमान समरा ने सार्वजनिक किया था। मजीठिया ने कहा कि इसके बाद अकाल तख्त के जत्थेदार के पास वीडियो की प्रामाणिकता जाँचने की माँग करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था।
मुख्यमंत्री मान के इस दावे पर कि वीडियो एआई-जनरेटेड है, मजीठिया ने कहा, 'अकाल तख्त ने उनसे उन तीन प्रयोगशालाओं के नाम माँगे जहाँ से वीडियो की पुष्टि हो सके, लेकिन कोई जवाब नहीं आया। अगर मुख्यमंत्री ईमानदार होते, तो वे सीएफएसएल चंडीगढ़ या दिल्ली की सरकारी लैब का नाम ले सकते थे।'
उनके अनुसार, लगभग छह महीने तक सवाल पूछने के बाद भी कोई उत्तर न मिलने पर वीडियो की पुष्टि की गई और वह असली पाया गया — जिसके बाद अकाल तख्त ने मान को 'गुरुद्रोही' घोषित किया।
धार्मिक भावनाओं पर मजीठिया का रुख
मजीठिया ने अकाल तख्त के फैसले को 'पूरी तरह सही' बताते हुए कहा, 'मेरे लिए मेरा धर्म सबसे पहले है। गुरु ग्रंथ साहिब ही मेरे लिए सब कुछ है और अकाल तख्त का महत्व सर्वोच्च है।' उन्होंने सवाल किया कि क्या किसी मुख्यमंत्री को श्री अकाल तख्त साहिब को चुनौती देने का अधिकार है।
उन्होंने यह भी पूछा, 'सिर्फ इसलिए कि वह मुख्यमंत्री हैं, उन्हें सब कुछ करने की छूट है — यहाँ तक कि सिख गुरुओं और संत जरनैल सिंह का अपमान करने की भी?'
राजनीतिक संदर्भ और आगे की स्थिति
यह विवाद ऐसे समय में गहरा हुआ है जब पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पहले से ही कई मोर्चों पर विपक्षी दबाव झेल रही है। फोरेंसिक रिपोर्ट के जाली होने के आरोपों ने मामले को और उलझा दिया है। अकाल तख्त का 'गुरुद्रोही' का फैसला सिख धार्मिक परंपरा में अत्यंत गंभीर माना जाता है और इसके राजनीतिक परिणाम दूरगामी हो सकते हैं। मुख्यमंत्री मान की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी प्रतीक्षित है।