दानम नागेंद्र को खैरताबाद उपचुनाव जीतने का भरोसा, सुप्रीम कोर्ट के फैसले का किया स्वागत
सारांश
मुख्य बातें
पूर्व विधायक दानम नागेंद्र ने 24 सितंबर 2026 को कहा कि वह दल-बदल विरोधी कानून के तहत उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त करने के तेलंगाना उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली उनकी याचिका खारिज करने के सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हैं। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि खैरताबाद विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव में उन्हें अपनी जीत का पूरा भरोसा है।
मुख्य घटनाक्रम
दानम नागेंद्र दिसंबर 2023 में हैदराबाद की खैरताबाद विधानसभा सीट से भारत राष्ट्र समिति (BRS) के टिकट पर विधायक चुने गए थे। इसके बाद उन्होंने 23 अप्रैल 2024 को सिकंदराबाद लोकसभा सीट से कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल किया और BRS उम्मीदवार के खिलाफ प्रचार किया। यह कदम उन्हें संविधान की 10वीं अनुसूची के पैरा 2(1)(ए) और अनुच्छेद 191(2) के तहत अयोग्यता का आधार बना।
तेलंगाना उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश अपरेश कुमार सिंह और न्यायमूर्ति जी.एम. मोहिउद्दीन की खंडपीठ ने 18 सितंबर 2026 को अपने फैसले में नागेंद्र को 23 अप्रैल 2024 से विधायक के रूप में अयोग्य घोषित कर दिया था। न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया कि खैरताबाद विधानसभा सीट को रिक्त घोषित किया जाए और आदेश की प्रति तेलंगाना विधानसभा सचिव तथा भारत निर्वाचन आयोग (ECI) को भेजी जाए।
सर्वोच्च न्यायालय का रुख
नागेंद्र ने उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देते हुए सर्वोच्च न्यायालय में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दाखिल की थी। हालाँकि, सर्वोच्च न्यायालय को उच्च न्यायालय के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं मिला और उसने याचिका खारिज कर दी।
नागेंद्र ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्हें 2024 का लोकसभा चुनाव लड़ते समय ही ऐसे किसी फैसले की आशंका थी। उन्होंने यह भी कहा कि कानूनी लड़ाई लड़ने में कुछ भी गलत नहीं है और सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट कर दिया है कि वह दोबारा चुनाव लड़ सकते हैं।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
नागेंद्र उन 10 BRS विधायकों में शामिल थे, जिन्होंने 2024 में सत्तारूढ़ कांग्रेस का साथ देना शुरू किया था। विधानसभा अध्यक्ष गद्दाम प्रसाद कुमार ने सभी 10 विधायकों को अयोग्य ठहराने की BRS की याचिकाओं को 11 मार्च 2026 को खारिज कर दिया था।
इसके बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) विधायक दल के नेता एलेटी महेश्वर रेड्डी और BRS विधायक पाडी कौशिक रेड्डी ने विधानसभा अध्यक्ष के उस फैसले को चुनौती दी। उच्च न्यायालय ने इन्हीं याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए नागेंद्र को अयोग्य घोषित किया। गौरतलब है कि BRS विधायकों ने 10 में से 9 विधायकों के संबंध में विधानसभा अध्यक्ष के फैसले को चुनौती देते हुए अलग-अलग याचिकाएँ दाखिल की हैं।
उपचुनाव की संभावनाएँ
नागेंद्र ने दावा किया कि खैरताबाद उनका गढ़ है और जनता का समर्थन उनके साथ है। उन्होंने कहा, 'मैं खैरताबाद से तीन बार विधायक चुना गया हूँ। मैं एक उपचुनाव सिर्फ 1,600 वोटों से हारा था।' उन्होंने स्पष्ट किया कि उपचुनाव में उन्हें उम्मीदवार बनाने का अंतिम फैसला मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी करेंगे।
यह ऐसे समय में आया है जब तेलंगाना में कांग्रेस सरकार BRS के विधायकों के दलबदल से जुड़े कई मामलों का सामना कर रही है। खैरताबाद सीट पर उपचुनाव की घोषणा निर्वाचन आयोग के निर्देश के बाद अपेक्षित है।