24 सितंबर 2026
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दानम नागेंद्र को खैरताबाद उपचुनाव जीतने का भरोसा, सुप्रीम कोर्ट के फैसले का किया स्वागत

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दानम नागेंद्र को खैरताबाद उपचुनाव जीतने का भरोसा, सुप्रीम कोर्ट के फैसले का किया स्वागत

सारांश

सर्वोच्च न्यायालय ने याचिका खारिज कर दी, फिर भी दानम नागेंद्र ने हार नहीं मानी — खैरताबाद से तीन बार विधायक रहे नागेंद्र को अपने गढ़ में जीत का पूरा भरोसा है। दल-बदल की यह कहानी तेलंगाना की बदलती राजनीति का आईना है।

मुख्य बातें

दानम नागेंद्र को 23 अप्रैल 2024 से खैरताबाद विधानसभा सीट से अयोग्य घोषित किया गया है।
तेलंगाना उच्च न्यायालय ने 18 सितंबर 2026 को फैसला सुनाया; सर्वोच्च न्यायालय ने SLP खारिज कर हस्तक्षेप से इनकार किया।
नागेंद्र BRS के टिकट पर विधायक बने थे, लेकिन कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में सिकंदराबाद से लोकसभा चुनाव लड़ा — यही अयोग्यता का आधार बना।
नागेंद्र खैरताबाद से तीन बार विधायक रहे हैं और पिछला उपचुनाव सिर्फ 1,600 वोटों से हारे थे।
उपचुनाव में उम्मीदवारी का अंतिम फैसला मुख्यमंत्री ए.
रेवंत रेड्डी करेंगे।
BRS ने 10 में से 9 विधायकों के मामले में विधानसभा अध्यक्ष के फैसले को अलग-अलग याचिकाओं से चुनौती दी है।

पूर्व विधायक दानम नागेंद्र ने 24 सितंबर 2026 को कहा कि वह दल-बदल विरोधी कानून के तहत उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त करने के तेलंगाना उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली उनकी याचिका खारिज करने के सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हैं। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि खैरताबाद विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव में उन्हें अपनी जीत का पूरा भरोसा है।

मुख्य घटनाक्रम

दानम नागेंद्र दिसंबर 2023 में हैदराबाद की खैरताबाद विधानसभा सीट से भारत राष्ट्र समिति (BRS) के टिकट पर विधायक चुने गए थे। इसके बाद उन्होंने 23 अप्रैल 2024 को सिकंदराबाद लोकसभा सीट से कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल किया और BRS उम्मीदवार के खिलाफ प्रचार किया। यह कदम उन्हें संविधान की 10वीं अनुसूची के पैरा 2(1)(ए) और अनुच्छेद 191(2) के तहत अयोग्यता का आधार बना।

तेलंगाना उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश अपरेश कुमार सिंह और न्यायमूर्ति जी.एम. मोहिउद्दीन की खंडपीठ ने 18 सितंबर 2026 को अपने फैसले में नागेंद्र को 23 अप्रैल 2024 से विधायक के रूप में अयोग्य घोषित कर दिया था। न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया कि खैरताबाद विधानसभा सीट को रिक्त घोषित किया जाए और आदेश की प्रति तेलंगाना विधानसभा सचिव तथा भारत निर्वाचन आयोग (ECI) को भेजी जाए।

सर्वोच्च न्यायालय का रुख

नागेंद्र ने उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देते हुए सर्वोच्च न्यायालय में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दाखिल की थी। हालाँकि, सर्वोच्च न्यायालय को उच्च न्यायालय के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं मिला और उसने याचिका खारिज कर दी।

नागेंद्र ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्हें 2024 का लोकसभा चुनाव लड़ते समय ही ऐसे किसी फैसले की आशंका थी। उन्होंने यह भी कहा कि कानूनी लड़ाई लड़ने में कुछ भी गलत नहीं है और सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट कर दिया है कि वह दोबारा चुनाव लड़ सकते हैं।

राजनीतिक पृष्ठभूमि

नागेंद्र उन 10 BRS विधायकों में शामिल थे, जिन्होंने 2024 में सत्तारूढ़ कांग्रेस का साथ देना शुरू किया था। विधानसभा अध्यक्ष गद्दाम प्रसाद कुमार ने सभी 10 विधायकों को अयोग्य ठहराने की BRS की याचिकाओं को 11 मार्च 2026 को खारिज कर दिया था।

इसके बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) विधायक दल के नेता एलेटी महेश्वर रेड्डी और BRS विधायक पाडी कौशिक रेड्डी ने विधानसभा अध्यक्ष के उस फैसले को चुनौती दी। उच्च न्यायालय ने इन्हीं याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए नागेंद्र को अयोग्य घोषित किया। गौरतलब है कि BRS विधायकों ने 10 में से 9 विधायकों के संबंध में विधानसभा अध्यक्ष के फैसले को चुनौती देते हुए अलग-अलग याचिकाएँ दाखिल की हैं।

उपचुनाव की संभावनाएँ

नागेंद्र ने दावा किया कि खैरताबाद उनका गढ़ है और जनता का समर्थन उनके साथ है। उन्होंने कहा, 'मैं खैरताबाद से तीन बार विधायक चुना गया हूँ। मैं एक उपचुनाव सिर्फ 1,600 वोटों से हारा था।' उन्होंने स्पष्ट किया कि उपचुनाव में उन्हें उम्मीदवार बनाने का अंतिम फैसला मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी करेंगे।

यह ऐसे समय में आया है जब तेलंगाना में कांग्रेस सरकार BRS के विधायकों के दलबदल से जुड़े कई मामलों का सामना कर रही है। खैरताबाद सीट पर उपचुनाव की घोषणा निर्वाचन आयोग के निर्देश के बाद अपेक्षित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि दल-बदल के आधार पर अयोग्य घोषित नेता को दोबारा टिकट देना विपक्ष को नैतिक हथियार दे सकता है। 10 BRS विधायकों का एकमुश्त दलबदल तेलंगाना में जनादेश की अनदेखी का व्यापक पैटर्न दर्शाता है, जिसे न्यायपालिका ने अब स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया है। बाकी 9 विधायकों के मामले अभी न्यायालयों में लंबित हैं — उनके नतीजे तेलंगाना सरकार की विधानसभा में संख्या बल को प्रभावित कर सकते हैं।
RashtraPress
24 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दानम नागेंद्र को खैरताबाद सीट से अयोग्य क्यों ठहराया गया?
नागेंद्र दिसंबर 2023 में BRS के टिकट पर खैरताबाद से विधायक चुने गए थे, लेकिन उन्होंने 23 अप्रैल 2024 को सिकंदराबाद लोकसभा सीट से कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल किया और BRS उम्मीदवार के खिलाफ प्रचार किया। तेलंगाना उच्च न्यायालय ने इसे संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत दल-बदल माना और उन्हें अयोग्य घोषित किया।
सर्वोच्च न्यायालय ने नागेंद्र की याचिका क्यों खारिज की?
सर्वोच्च न्यायालय को तेलंगाना उच्च न्यायालय के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं मिला। उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने स्पष्ट पाया कि नागेंद्र संविधान के अनुच्छेद 191(2) और 10वीं अनुसूची के पैरा 2(1)(ए) के तहत अयोग्य हो गए थे।
खैरताबाद विधानसभा सीट पर उपचुनाव कब होगा?
उच्च न्यायालय ने सीट को रिक्त घोषित करते हुए आदेश की प्रति भारत निर्वाचन आयोग को भेजने का निर्देश दिया है। उपचुनाव की तारीख निर्वाचन आयोग द्वारा घोषित की जाएगी; अभी तक कोई आधिकारिक तिथि सामने नहीं आई है।
क्या नागेंद्र उपचुनाव में खड़े हो सकते हैं?
हाँ, सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि नागेंद्र दोबारा चुनाव लड़ सकते हैं। अयोग्यता का अर्थ यह नहीं है कि वे चुनाव में भाग लेने के लिए स्थायी रूप से अपात्र हैं; उपचुनाव में उनकी उम्मीदवारी का फैसला मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी करेंगे।
तेलंगाना में दल-बदल करने वाले अन्य BRS विधायकों की स्थिति क्या है?
नागेंद्र उन 10 BRS विधायकों में से एक थे जिन्होंने 2024 में कांग्रेस का साथ दिया था। BRS ने 10 में से 9 विधायकों के मामले में विधानसभा अध्यक्ष के फैसले को अलग-अलग याचिकाओं के जरिये उच्च न्यायालय में चुनौती दी है और वे मामले अभी विचाराधीन हैं।
राष्ट्र प्रेस
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