सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर केटीआर का वार: 'राहुल गांधी और रेवंत रेड्डी को करारा थप्पड़'
सारांश
मुख्य बातें
भारत राष्ट्र समिति (BRS) के कार्यकारी अध्यक्ष के.टी. रामाराव (केटीआर) ने 24 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट के उस निर्णय को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के लिए 'करारा थप्पड़' करार दिया, जिसमें शीर्ष अदालत ने तेलंगाना हाईकोर्ट के उस फैसले में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया जिसने पूर्व खैरताबाद विधायक दानम नागेंदर को दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य घोषित किया था। नागेंदर की याचिका को सर्वोच्च न्यायालय ने स्वीकार करने योग्य नहीं पाया और हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखा।
मुख्य घटनाक्रम
सुप्रीम कोर्ट ने दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य घोषित किए गए पूर्व विधायक दानम नागेंदर की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि उसे हाईकोर्ट के निर्णय में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं दिखता।
केटीआर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर लिखा कि दानम नागेंदर की अयोग्यता से बचने की कोशिश नाकाम हो गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने विधानसभा अध्यक्ष के पद की आड़ लेकर दल-बदल को संरक्षण देने की कोशिश की, जिसे सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने बेनकाब कर दिया।
केटीआर के आरोप
केटीआर ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी और रेवंत रेड्डी को यह भ्रम था कि वे दल-बदल के ज़रिए जनता के जनादेश को 'चुरा' सकते हैं और स्पीकर कार्यालय की आड़ में इसे बचा सकते हैं। उन्होंने राहुल गांधी पर तीखा हमला करते हुए उन्हें अपनी पोस्ट में 'एमएलए चोर' तक कहा।
खैरताबाद में संभावित उपचुनाव का ज़िक्र करते हुए केटीआर ने कहा कि वहाँ की जनता जल्द ही 'तीन साल के विश्वासघात, टूटे वादों और कुशासन' पर अपना फैसला सुनाएगी। उन्होंने यह भी कहा, 'एक विकेट गिर चुका है, जल्द ही और भी गिरेंगे।'
हरीश राव की प्रतिक्रिया
विधानसभा में BRS के उपनेता टी. हरीश राव ने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया और इसे 'संविधान बचाओ' की बात करने वाली कांग्रेस के दोहरे रवैये पर 'करारा प्रहार' बताया। उन्होंने कहा कि दिल्ली में संवैधानिक नैतिकता की दुहाई देना और तेलंगाना में अपनी ही पार्टी के आचरण पर चुप रहना दोहरा मापदंड है।
हरीश राव ने माँग की कि यदि राहुल गांधी सचमुच संविधान में विश्वास रखते हैं, तो कांग्रेस में शामिल हुए सभी दलबदलू विधायकों से तत्काल इस्तीफा दिलाकर उन्हें दोबारा जनादेश लेने के लिए जनता के बीच भेजा जाए।
व्यापक राजनीतिक संदर्भ
यह फैसला ऐसे समय आया है जब तेलंगाना में BRS और कांग्रेस के बीच सियासी तनाव चरम पर है। गौरतलब है कि दल-बदल विरोधी कानून के तहत विधायकों की अयोग्यता के मामले अक्सर स्पीकर के विवेकाधिकार और न्यायिक समीक्षा के बीच की रस्साकशी को उजागर करते हैं। सर्वोच्च न्यायालय का यह निर्णय उस स्थापित संवैधानिक सिद्धांत को रेखांकित करता है कि स्पीकर का निर्णय न्यायिक जाँच से परे नहीं है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, खैरताबाद सीट पर होने वाला संभावित उपचुनाव राज्य में BRS की पुनः प्रासंगिकता की परीक्षा होगी, जो 2023 के विधानसभा चुनाव में सत्ता गँवाने के बाद से विपक्ष में है।
आगे क्या
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद खैरताबाद सीट रिक्त मानी जाएगी और चुनाव आयोग उपचुनाव की अधिसूचना जारी कर सकता है। BRS ने इस सीट को अपने पुनरुत्थान का प्रतीक बताते हुए पूरी ताकत झोंकने के संकेत दिए हैं, जबकि कांग्रेस ने अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।