तेलंगाना: हाईकोर्ट ने दानम नागेंद्र को अयोग्य ठहराया, भाजपा ने सभी दलबदलू विधायकों से इस्तीफे की मांग की
सारांश
मुख्य बातें
तेलंगाना उच्च न्यायालय ने 18 सितंबर 2026 को बीआरएस छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए विधायक दानम नागेंद्र को विधानसभा सदस्यता के लिए अयोग्य ठहरा दिया। इस फैसले के तुरंत बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की तेलंगाना इकाई ने दलबदल करने वाले सभी विधायकों से तत्काल इस्तीफा देकर नए सिरे से जनादेश लेने की माँग कर दी।
हाईकोर्ट का फैसला और भाजपा की प्रतिक्रिया
तेलंगाना भाजपा अध्यक्ष एन. रामचंदर राव ने इस फैसले को नैतिक, कानूनी और संवैधानिक आधार पर एक महत्वपूर्ण जीत करार दिया। उन्होंने कहा कि अदालत ने विधानसभा अध्यक्ष के पहले के फैसले को रद्द कर दिया है, जिसमें नागेंद्र को बचाने की कोशिश की गई थी।
यह याचिका विधानसभा में भाजपा के फ्लोर लीडर एलेटी महेश्वर रेड्डी ने दाखिल की थी। रामचंदर राव ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि जो नेता संविधान की प्रति सदैव अपने साथ रखते हैं, उनकी सरकार में दसवीं अनुसूची और दल-बदल विरोधी कानून की खुलेआम अनदेखी कैसे होने दी जा सकती है।
दानम नागेंद्र का मामला और पृष्ठभूमि
दानम नागेंद्र उन 10 बीआरएस विधायकों में शामिल थे, जिन्होंने 2024 में कांग्रेस का दामन थामा था। वे एक पार्टी के टिकट पर विधायक चुने गए और बाद में दूसरी पार्टी में शामिल होने के बाद लोकसभा का चुनाव भी लड़े। भाजपा नेता महेश्वर रेड्डी ने कहा कि स्पीकर की ओर से उन्हें बचाने की कोशिश को अदालत ने खारिज कर दिया है।
गौरतलब है कि 2024 में तेलंगाना में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद बीआरएस के कई विधायकों ने पाला बदलकर कांग्रेस का रुख किया था। भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस सरकार उसी दलबदल संस्कृति को पोषित कर रही है, जिसका पिछली बीआरएस सरकार के दौरान बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हुआ था।
भाजपा नेताओं के बयान
महेश्वर रेड्डी ने इस फैसले को 'लोकतंत्र के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में लिखे जाने योग्य' बताया। उन्होंने कहा, 'न्याय की जीत हुई है। अगर कांग्रेस नेता वास्तव में लोकतंत्र का सम्मान करते हैं तो उन्हें सुप्रीम कोर्ट जाने के बजाय नागेंद्र और दलबदल करने वाले अन्य सभी विधायकों से तुरंत इस्तीफा दिलाना चाहिए।'
रेड्डी ने यह भी बताया कि भाजपा इस मामले में शनिवार तक कैविएट दाखिल करेगी, ताकि किसी भी ऊपरी अदालती सुनवाई में उनका पक्ष सुना जा सके।
कांग्रेस पर आरोप और संवैधानिक प्रश्न
भाजपा अध्यक्ष रामचंदर राव ने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी लोकतंत्र का मजाक बना रही है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट का फैसला कांग्रेस के लिए कड़ा झटका है और इससे स्पष्ट हो गया है कि कांग्रेस को नैतिक व कानूनी दोनों स्तरों पर पराजय का सामना करना पड़ा है।
यह मामला इस मायने में व्यापक महत्व का है क्योंकि यह दसवीं अनुसूची यानी दल-बदल विरोधी कानून की प्रभावशीलता पर सवाल उठाता है — एक कानून जो राजीव गांधी सरकार के दौर में लाया गया था।
आगे क्या होगा
भाजपा ने माँग की है कि दलबदल करने वाले अन्य विधायक भी संविधान का सम्मान करते हुए तत्काल इस्तीफा दें और जनता के बीच जाएँ। अब नज़रें इस बात पर हैं कि क्या कांग्रेस सरकार सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाती है, या अन्य दलबदलू विधायकों पर भी इसी तर्ज पर याचिकाएँ दाखिल होती हैं।