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शिवसेना नाम-निशान विवाद: वाघमारे बोले — विरोधियों की दलीलें कोर्ट में हुईं ध्वस्त, राहुल गांधी को नसीहत

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शिवसेना नाम-निशान विवाद: वाघमारे बोले — विरोधियों की दलीलें कोर्ट में हुईं ध्वस्त, राहुल गांधी को नसीहत

सारांश

शिवसेना के नाम-निशान पर कोर्ट में जारी लड़ाई में प्रवक्ता राजू वाघमारे ने दावा किया कि विरोधियों की सभी दलीलें खारिज हो गई हैं। साथ ही राहुल गांधी को कांग्रेस की 'खोखली' हालत पर ध्यान देने की नसीहत दी और दिशा सालियान एफआईआर पर भी अपना पक्ष रखा।

मुख्य बातें

शिवसेना प्रवक्ता राजू वाघमारे ने 18 सितंबर 2026 को कहा कि पार्टी के नाम-निशान पर विरोधियों की दलीलें कोर्ट में निराधार साबित हुईं।
वाघमारे के अनुसार, किसी भी कानून में यह प्रावधान नहीं कि अयोग्यता कार्यवाही के दौरान चुनाव आयोग फैसला नहीं ले सकता।
शिवसेना को नाम और निशान संविधान और सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व निर्णयों के आधार पर दिया गया — वाघमारे।
राहुल गांधी के बयानों पर पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस 'अंदर से खोखली' है और नेता पार्टी छोड़ रहे हैं।
दिशा सालियान मामले में एफआईआर पर कहा — आदित्य ठाकरे स्वयं दावा करते हैं कि वह दिशा से कभी नहीं मिले।

शिवसेना प्रवक्ता राजू वाघमारे ने 18 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर जारी कानूनी लड़ाई पर अपना पक्ष रखा और कहा कि अदालत में विरोधी पक्ष की सभी दलीलें पूरी तरह निराधार साबित हो चुकी हैं। साथ ही उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बयानों पर कड़ा पलटवार किया और दिशा सालियान मामले में एफआईआर दर्ज होने पर भी प्रतिक्रिया दी।

कोर्ट में विरोधियों की दलीलें निराधार साबित

वाघमारे ने बताया कि पार्टी के चिन्ह और नाम को लेकर कोर्ट में सुनवाई जारी है। उन्होंने कहा, 'आज हमारे वकील ने उन सभी दलीलों को पूरी तरह गलत बताया जो विरोधी पक्ष ने अदालत को गुमराह करने के लिए रखी थीं।' विरोधियों का तर्क था कि यदि अयोग्यता (डिसक्वालिफिकेशन) का मामला लंबित है, तो चुनाव आयोग पार्टी के नाम और चिन्ह पर कोई निर्णय नहीं ले सकता।

शिवसेना प्रवक्ता के अनुसार, उनके वकीलों ने यह स्पष्ट कर दिया कि किसी भी कानून या अधिनियम में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो अयोग्यता की कार्यवाही चलते रहने के दौरान चुनाव आयोग को फैसला लेने से रोकता हो। उन्होंने इसे विरोधियों की कानूनी दलीलों का पूर्ण खंडन बताया।

चुनाव आयोग का फैसला संविधान-सम्मत — वाघमारे

वाघमारे ने दृढ़ता से कहा कि चुनाव आयोग ने शिवसेना को उसका नाम और निशान संविधान, चुनाव आयोग के नियमों तथा सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व निर्णयों के आधार पर सौंपा है। उन्होंने कहा, 'हमने न किसी की चोरी की है, न डाका डाला है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह फैसला बाबा साहेब अंबेडकर द्वारा निर्मित कानून के अनुरूप है।

राहुल गांधी पर पलटवार

कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बयानों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए वाघमारे ने कहा कि 'बचकाने पोस्ट' करके राहुल गांधी क्या साबित करना चाहते हैं, यह समझ से परे है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अंदर से खोखली हो चुकी है और उसके नेता पार्टी छोड़कर जा रहे हैं। वाघमारे की नसीहत थी कि राहुल गांधी को शिवसेना पर टिप्पणी करने के बजाय अपनी पार्टी की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए।

दिशा सालियान मामले पर प्रतिक्रिया

दिशा सालियान की मौत के मामले में एफआईआर दर्ज होने पर वाघमारे ने कहा कि दिशा के बुज़ुर्ग पिता ने अपने पास मौजूद साक्ष्यों के आधार पर एफआईआर दर्ज कराई है और उसमें कई लोगों के नाम लिए गए हैं। उन्होंने कहा कि आदित्य ठाकरे स्वयं कहते हैं कि वह दिशा सालियान से कभी नहीं मिले और न ही उन्हें देखा है। वाघमारे ने कहा, 'जाहिर है कि जब एफआईआर में नाम आ गए हैं तो लोग इस बारे में बात करेंगे।'

आगे क्या

शिवसेना के नाम और चुनाव चिन्ह पर कानूनी लड़ाई अदालत में जारी रहेगी। पार्टी का रुख स्पष्ट है कि चुनाव आयोग का निर्णय हर कानूनी कसौटी पर खरा है। इस मामले में अगली सुनवाई के नतीजे महाराष्ट्र की राजनीति पर दूरगामी असर डाल सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह तय करने की कोशिश है कि असली शिवसेना कौन है — और इसके जवाब पर महाराष्ट्र की राजनीति की दिशा निर्भर करती है। वाघमारे का यह दावा कि विरोधियों की दलीलें 'पूरी तरह गलत' साबित हुईं, एकतरफा बयानबाज़ी है; अदालत का अंतिम निर्णय ही असली कसौटी होगी। राहुल गांधी पर हमला और दिशा सालियान मामले को एक ही प्रेस वार्ता में जोड़ना बताता है कि शिवसेना एक साथ कई मोर्चों पर अपनी राजनीतिक ज़मीन बचाने में जुटी है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इस तथ्य को नज़रअंदाज़ करती है कि इस पूरे विवाद की जड़ें 2022 की उस टूट में हैं जिसने महाराष्ट्र की राजनीति को स्थायी रूप से बदल दिया।
RashtraPress
19 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शिवसेना के नाम और चुनाव चिन्ह पर कोर्ट में क्या चल रहा है?
पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर कानूनी लड़ाई जारी है जिसमें विरोधी पक्ष ने तर्क दिया था कि अयोग्यता कार्यवाही लंबित रहते चुनाव आयोग कोई फैसला नहीं ले सकता। शिवसेना प्रवक्ता राजू वाघमारे के अनुसार, 18 सितंबर 2026 की सुनवाई में उनके वकीलों ने इस तर्क को हर कानूनी आधार पर गलत साबित कर दिया।
चुनाव आयोग ने शिवसेना को नाम-निशान कैसे दिया?
वाघमारे के अनुसार, चुनाव आयोग ने शिवसेना को उसका नाम और निशान संविधान, चुनाव आयोग के नियमों और सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व निर्णयों के आधार पर सौंपा है। उन्होंने कहा कि यह फैसला बाबा साहेब अंबेडकर द्वारा निर्मित कानून के अनुसार है।
राहुल गांधी के बयानों पर शिवसेना की क्या प्रतिक्रिया है?
शिवसेना प्रवक्ता राजू वाघमारे ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को नसीहत दी कि वे शिवसेना पर टिप्पणी करने के बजाय अपनी पार्टी की स्थिति पर ध्यान दें। वाघमारे ने कहा कि कांग्रेस अंदर से खोखली हो चुकी है और उसके नेता पार्टी छोड़ रहे हैं।
दिशा सालियान मामले में एफआईआर पर शिवसेना का क्या कहना है?
वाघमारे ने कहा कि दिशा सालियान के बुज़ुर्ग पिता ने अपने पास मौजूद साक्ष्यों के आधार पर एफआईआर दर्ज कराई है जिसमें कई लोगों के नाम हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आदित्य ठाकरे स्वयं कहते हैं कि वह दिशा सालियान से कभी नहीं मिले।
शिवसेना के नाम-निशान विवाद का महाराष्ट्र की राजनीति पर क्या असर होगा?
यह कानूनी लड़ाई इस बात की परिभाषा तय करती है कि 'असली शिवसेना' कौन है, जो महाराष्ट्र में मतदाता आधार और राजनीतिक वैधता दोनों पर सीधा प्रभाव डालती है। अदालत का अंतिम फैसला राज्य में सत्ता समीकरणों को नए सिरे से आकार दे सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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