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भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी का राहुल गांधी पर तीखा हमला: 'कांग्रेस भस्मासुर पार्टी, 70 बार टूटी'

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भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी का राहुल गांधी पर तीखा हमला: 'कांग्रेस भस्मासुर पार्टी, 70 बार टूटी'

सारांश

भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने राहुल गांधी के एक्स पोस्ट पर जोरदार पलटवार किया — कांग्रेस को 'भस्मासुर पार्टी' बताया, 70 विभाजनों का हवाला दिया और आपातकाल से लेकर क्षेत्रीय दलों के जन्म तक का इतिहास सामने रखा। यह राजनीतिक वाकयुद्ध नई ऊंचाई पर पहुंचा।

मुख्य बातें

BJP प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने 18 सितंबर 2026 को राहुल गांधी के एक्स पोस्ट पर तीखा पलटवार किया।
भंडारी ने कांग्रेस को 'भस्मासुर पार्टी' बताते हुए दावा किया कि 1951 से अब तक पार्टी में करीब 70 विभाजन हो चुके हैं।
कांग्रेस के तीन अलग-अलग चुनाव चिन्हों — 1952-1969 , 1971-1977 और 1977 के बाद — का हवाला देकर पार्टी के बार-बार टूटने का इतिहास उजागर किया।
शरद पवार , ममता बनर्जी और जेबी कृपलानी के कांग्रेस से अलग होने को लोकतंत्र-विरोधी इतिहास का प्रमाण बताया।
कांग्रेस पर आपातकाल लगाने और पहली कम्युनिस्ट सरकार गिराने का आरोप लगाया।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने 18 सितंबर 2026 को कांग्रेस नेता राहुल गांधी के एक्स पोस्ट पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राहुल गांधी को अपना इतिहास याद नहीं रहा और कांग्रेस एक 'भस्मासुर पार्टी' रही है जिसने हर क्षेत्रीय दल को तोड़ने का काम किया। भंडारी ने कहा कि 1951 से अब तक कांग्रेस में करीब 70 विभाजन हो चुके हैं, और यही इसके लोकतंत्र-विरोधी इतिहास का प्रमाण है।

भंडारी का सीधा हमला

भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा, 'राहुल गांधी गजनी हो गए हैं क्या? कांग्रेस पार्टी ऐसी भस्मासुर पार्टी है जिसने हर क्षेत्रीय दल को तोड़ा और हर क्षेत्रीय दल इसलिए क्षेत्रीय बना क्योंकि वो कांग्रेस से तंग आ गया था। कांग्रेस को अपना इतिहास याद कराना चाहता हूं।' उनकी यह टिप्पणी राहुल गांधी की एक्स पर की गई पोस्ट के जवाब में आई, जिसमें लोकतंत्र पर सवाल उठाए गए थे।

कांग्रेस के विभाजन का इतिहास

भंडारी ने कांग्रेस के चुनाव चिन्हों की ऐतिहासिक यात्रा का हवाला देते हुए बताया कि पार्टी के तीन अलग-अलग चुनाव चिन्ह रहे हैं — 1952 से 1969 के बीच पहला, 1971 से 1977 के बीच दूसरा, और 1977 के बाद से मौजूदा चिन्ह। उनके अनुसार यह इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि पार्टी कई बार बिखरी है।

उन्होंने तर्क दिया कि शरद पवार, ममता बनर्जी और 1951 में जेबी कृपलानी जैसे नेताओं का कांग्रेस से अलग होकर अपनी-अपनी पार्टी बनाना इसी ऐतिहासिक प्रवृत्ति की कड़ी है। भंडारी ने दावा किया कि ये सभी घटनाएं बताती हैं कि कांग्रेस पार्टी ऐतिहासिक तौर पर लोकतंत्र के लिए खतरा रही है।

बंगाल प्रसंग और लोकतंत्र का सवाल

भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि आज लोकतंत्र की हत्या नहीं, बल्कि लोकतंत्र का सम्मान हुआ है। उन्होंने पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए कहा कि जब वहाँ की जनता ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) और ममता बनर्जी को लोकतांत्रिक तरीके से सत्ता से बाहर किया, तो उनके पास न कार्यकर्ता बचे, न करीबी और न संगठन — ऐसे में नियमानुसार कार्रवाई होना लाजिमी है।

आपातकाल और संविधान पर निशाना

भंडारी ने आरोप लगाया कि जिस कांग्रेस ने देश में आपातकाल लगाया, पहली कम्युनिस्ट सरकार को बर्खास्त किया, और जिसकी वजह से क्षेत्रीय दलों का जन्म हुआ — वही कांग्रेस आज संविधान की प्रति हाथ में लेकर घूम रही है। उन्होंने कहा, 'कांग्रेस ने भारत के संविधान को कभी ठीक से पढ़ा ही नहीं।'

राहुल गांधी पर सीधा आरोप

भंडारी ने कहा कि राहुल गांधी इसलिए बौखला रहे हैं क्योंकि देश का जन-जन उन्हें उनका इतिहास दिखा रहा है। उनके अनुसार, 'राहुल गांधी की कांग्रेस में हमेशा से ही कॉमन सेंस, लॉजिक और संविधान की हत्या होती रही है।' यह टकराव ऐसे समय में आया है जब दोनों प्रमुख दलों के बीच राजनीतिक वाकयुद्ध तेज हो रहा है और आगामी चुनावी सरगर्मियाँ जोर पकड़ रही हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

उसकी स्वतंत्र पुष्टि उतनी ही ज़रूरी है। असली सवाल यह है कि क्या राहुल गांधी की एक्स पोस्ट ने जो मुद्दा उठाया था, उसका जवाब इस ऐतिहासिक आरोप-पत्र में कहीं दिया गया — या सिर्फ विषय बदला गया। जब दोनों दल एक-दूसरे के अतीत को हथियार बनाते हैं, तो असली नीतिगत बहस अक्सर शोर में दब जाती है।
RashtraPress
20 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

BJP प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने राहुल गांधी पर क्या आरोप लगाए?
भंडारी ने कहा कि राहुल गांधी को कांग्रेस का अपना इतिहास याद नहीं रहा और उन्होंने फिल्म 'गजनी' के पात्र से तुलना करते हुए व्यंग्य किया। उन्होंने कांग्रेस को 'भस्मासुर पार्टी' बताया और दावा किया कि 1951 से अब तक पार्टी में करीब 70 विभाजन हो चुके हैं।
कांग्रेस के चुनाव चिन्ह कितनी बार बदले हैं?
भंडारी के अनुसार कांग्रेस के तीन अलग-अलग चुनाव चिन्ह रहे हैं — 1952 से 1969, 1971 से 1977, और 1977 के बाद से मौजूदा चिन्ह। उनका तर्क है कि यह बदलाव पार्टी के बार-बार टूटने का प्रमाण है।
भंडारी ने किन नेताओं के कांग्रेस छोड़ने का ज़िक्र किया?
भंडारी ने शरद पवार, ममता बनर्जी और 1951 में जेबी कृपलानी के अलग होकर नई पार्टियाँ बनाने का उदाहरण दिया। उनके अनुसार ये नेता इसलिए अलग हुए क्योंकि वे कांग्रेस की कार्यशैली से तंग आ गए थे।
भाजपा ने कांग्रेस और संविधान पर क्या कहा?
भंडारी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने भारत के संविधान को कभी ठीक से पढ़ा ही नहीं। उन्होंने कहा कि जिस पार्टी ने आपातकाल लगाया और पहली कम्युनिस्ट सरकार को बर्खास्त किया, वही आज संविधान की प्रति हाथ में लेकर घूम रही है।
यह विवाद किस संदर्भ में शुरू हुआ?
यह विवाद राहुल गांधी की एक्स पर की गई एक पोस्ट के जवाब में शुरू हुआ, जिसमें लोकतंत्र से जुड़े सवाल उठाए गए थे। BJP ने इसे कांग्रेस के अपने लोकतंत्र-विरोधी इतिहास की याद दिलाने के अवसर के रूप में इस्तेमाल किया।
राष्ट्र प्रेस
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