क्या राजद और कांग्रेस एक-दूसरे की टांग खींचने में लगे हैं? : प्रदीप भंडारी

सारांश
Key Takeaways
- राजद और कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के बीच टांग खींचने का खेल
- भ्रष्टाचार के मुद्दे पर दोनों पार्टियों का एकजुट होना
- राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की राजनीतिक स्थिति
- बिहार की जनता का एनडीए के विकास की ओर झुकाव
- परिवारवादी राजनीति का प्रभाव
कोलकाता, 24 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने विपक्ष पर निशाना साधा। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा राजद नेता तेजस्वी यादव के मुख्यमंत्री बनने पर कोई टिप्पणी न करने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए प्रदीप भंडारी ने कहा कि राजद और कांग्रेस के कार्यकर्ता एक-दूसरे की टांग खींचने में लगे हैं।
प्रदीप भंडारी ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत के दौरान तंज कसते हुए कहा कि राहुल गांधी ने तेजस्वी यादव को अपना 'ड्राइवर' बना लिया और तेजस्वी ने राहुल गांधी को इंडिया गठबंधन का प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया। इसके बाद भी, राहुल गांधी अपने 'ड्राइवर' तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित नहीं कर पाए। इससे साफ जाहिर होता है कि जमीनी स्तर पर राजद और कांग्रेस के कार्यकर्ता एक-दूसरे की टांग खींचने में लगे हैं और इन दोनों पार्टियों को अगर जोड़ता है तो सिर्फ भ्रष्टाचार।
उन्होंने आगे कहा कि वोटर अधिकार यात्रा के तहत यह अपनी जमानत बचाने का प्रयास कर रहे हैं। बिहार की जनता एनडीए के विकास को चुनना चाहती है। दोनों वापस विपक्ष की भूमिका में ही रहेंगे।
उन्होंने कहा कि राहुल के प्रधानमंत्री बनने का यह सपना तेजस्वी यादव ही नहीं, गांधी-वाड्रा परिवार पिछले 22 साल से देख रहा है। देश की जनता ने निर्णय कर लिया है कि राहुल गांधी को आने वाले कई साल तक पीएम के रूप में नहीं देखेगी, क्योंकि यह देश विकास चाहता है। देश पीएम मोदी के नेतृत्व को स्वीकृति देता है और उसमें विश्वास भी रखता है।
प्रदीप भंडारी ने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि ये परिवारवादी लोग यह नहीं समझते कि देश की जनता प्रधानमंत्री बनाती है। जनता ने प्रधानमंत्री मोदी को चुना है और आगे भी चुनती आएगी। परिवारवादी भ्रष्टाचारियों को जनता ने विपक्ष में बैठाया है। अगर राहुल गांधी के नेतृत्व में तेजस्वी यादव को विश्वास है तो टीएमसी नेता ममता बनर्जी और आम आदमी पार्टी (आप) नेता अरविंद केजरीवाल से विश्वास दिलाकर दिखाइए। सच्चाई यह है कि विपक्ष का कोई भी नेता राहुल गांधी को लोकतंत्र का विरोधी समझता है या उनको गंभीरता से नहीं लेता।