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राहुल गांधी के 'छात्रों की गूंज' पर CM मोहन यादव का पलटवार, MP के शिक्षा रोजगार आंकड़े रखे सामने

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राहुल गांधी के 'छात्रों की गूंज' पर CM मोहन यादव का पलटवार, MP के शिक्षा रोजगार आंकड़े रखे सामने

सारांश

इंदौर में राहुल गांधी के 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के बाद CM मोहन यादव ने इसे 'झूठ की गूंज' करार दिया और शिक्षा बजट, मेडिकल सीटों, पुलिस भर्ती और बिजली उत्पादन के आंकड़े सामने रखे। यह राजनीतिक टकराव मध्य प्रदेश में युवा और रोजगार मुद्दों को केंद्र में ला रहा है।

मुख्य बातें

CM मोहन यादव ने 19 सितंबर 2026 को राहुल गांधी के इंदौर कार्यक्रम 'छात्रों की गूंज' को 'झूठ की गूंज' करार दिया।
मध्य प्रदेश का स्कूल शिक्षा बजट ₹2,000 करोड़ (2002 03) से बढ़कर ₹38,658 करोड़ हुआ — सरकार का दावा।
राज्य में मेडिकल कॉलेज 5 से 33 और सीटें 680 से 7,000 से अधिक हुईं।
पुलिस विभाग में 18,000 पदों पर भर्ती जारी; 10,000 युवा पुलिस सेवा में शामिल।
प्रति व्यक्ति आय ₹11,000 से बढ़कर ₹1.59 लाख ; बिजली उत्पादन क्षमता 5,000 मेगावाट से 32,000 मेगावाट ।
राहुल गांधी ने पेपर लीक, भर्ती में देरी और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी समस्याओं का मुद्दा उठाया।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 19 सितंबर 2026 को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की इंदौर यात्रा के दौरान राज्य की शिक्षा और रोजगार व्यवस्था पर की गई आलोचना का कड़ा जवाब दिया। मुख्यमंत्री ने स्कूली बजट, मेडिकल सीटों, सरकारी भर्तियों और बिजली उत्पादन से जुड़े विस्तृत आंकड़े सार्वजनिक करते हुए प्रदेश की प्रगति का दावा किया।

क्या था 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इंदौर में आयोजित 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में युवाओं से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने शिक्षा, बेरोजगारी, सरकारी भर्तियों में देरी, प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और छात्रवृत्ति जैसे मुद्दे उठाए। उन्होंने कहा कि युवाओं को अवसर देने के साथ ऐसी व्यवस्था की जरूरत है जिसमें वे सवाल पूछ सकें और अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर सकें।

गांधी ने आरोप लगाया कि भर्तियों में देरी और परीक्षाओं से जुड़ी समस्याओं के कारण छात्रों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

मुख्यमंत्री की तीखी प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम को 'झूठ की गूंज' करार देते हुए कहा, "अगर बच्चों, युवाओं और शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हो रही है तो तथ्य और आंकड़े सामने रखे जाने चाहिए। आज के कार्यक्रम में तथ्यों के बजाय भ्रम पैदा करने का प्रयास किया गया।"

उन्होंने यह भी कहा कि यदि राहुल गांधी मध्य प्रदेश के लोगों से संवाद करना चाहते हैं तो उन्हें आंकड़ों के आधार पर प्रदेश के विकास की बात करनी चाहिए।

शिक्षा क्षेत्र के आंकड़े

मुख्यमंत्री के अनुसार, वर्ष 2002 03 में मध्य प्रदेश का स्कूल शिक्षा बजट मात्र ₹2,000 करोड़ था, जो अब बढ़कर ₹38,658 करोड़ हो चुका है। उस दौर में राज्य की स्कूल ड्रॉपआउट दर करीब 16 प्रतिशत थी, जिसे अब शून्य तक लाने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति हुई बताई जा रही है।

राज्य सरकार संदीपनी स्कूलों सहित विभिन्न योजनाओं के जरिए मेधावी विद्यार्थियों को यूनिफॉर्म, साइकिल, लैपटॉप और स्कूटी उपलब्ध करा रही है। मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में, 1956 से 2002 03 के बीच राज्य में केवल 5 मेडिकल कॉलेज थे, जो अब बढ़कर 33 हो गए हैं। इसी अवधि में मेडिकल सीटें करीब 680 से बढ़कर 7,000 से अधिक हो गई हैं।

रोजगार और भर्तियों का दावा

सरकारी भर्तियों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि पुलिस विभाग में करीब 18,000 पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी है और लगभग 10,000 युवाओं को प्रशिक्षण के बाद पुलिस सेवा में शामिल किया जा चुका है। इसके अलावा स्कूल शिक्षा विभाग में 10,000 पदों पर भर्ती चल रही है और 7,000 व्याख्याताओं की नियुक्ति पहले ही हो चुकी है।

यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष राज्य में पेपर लीक और भर्ती घोटालों को लेकर सरकार पर लगातार दबाव बना रहा है।

आर्थिक प्रगति के दावे

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बताया कि 2002 03 में राज्य की प्रति व्यक्ति आय मात्र ₹11,000 थी, जो अब बढ़कर ₹1.59 लाख हो गई है। उन्होंने यह भी दावा किया कि राज्य की बिजली उत्पादन क्षमता करीब 5,000 मेगावाट से बढ़कर लगभग 32,000 मेगावाट हो गई है। गौरतलब है कि ये तुलनाएँ वर्तमान सरकार की नहीं, बल्कि दो दशकों के संचित बदलाव को दर्शाती हैं। आगामी दिनों में कांग्रेस इन आंकड़ों पर अपना जवाब दे सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इनमें एक महत्वपूर्ण पेच है — ये तुलनाएँ 2002 03 से की गई हैं, जब राज्य में कांग्रेस की सरकार थी, यानी यह BJP के शासनकाल की उपलब्धि का दावा उस आधार रेखा से है जो स्वयं कांग्रेस की विरासत है। राहुल गांधी के जो आरोप हैं — पेपर लीक, भर्ती में देरी, परीक्षाओं में गड़बड़ी — उनका जवाब बजट के आंकड़ों से नहीं दिया जा सकता; ये दो अलग अलग सवाल हैं। असली कसौटी यह है कि क्या 18,000 पुलिस और 10,000 शिक्षक भर्तियाँ पारदर्शी तरीके से पूरी हुईं — और इस पर दोनों पक्षों ने सार्वजनिक रूप से सत्यापन योग्य डेटा अभी तक नहीं रखा है।
RashtraPress
20 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राहुल गांधी का 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम क्या था?
यह इंदौर में आयोजित एक छात्र संवाद कार्यक्रम था जिसमें कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शिक्षा, बेरोजगारी, पेपर लीक, भर्ती में देरी और छात्रवृत्ति जैसे मुद्दे उठाए। उन्होंने युवाओं के लिए सवाल पूछने और भागीदारी सुनिश्चित करने वाली व्यवस्था की माँग की।
CM मोहन यादव ने राहुल गांधी के आरोपों का क्या जवाब दिया?
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 'छात्रों की गूंज' को 'झूठ की गूंज' बताया और शिक्षा बजट, मेडिकल सीटों, सरकारी भर्तियों व प्रति व्यक्ति आय के आंकड़े पेश किए। उन्होंने कहा कि शिक्षा और युवाओं जैसे मुद्दों पर चर्चा तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए, न कि भ्रम फैलाने वाले आरोपों पर।
मध्य प्रदेश के स्कूल शिक्षा बजट में कितना बदलाव आया है?
सरकार के दावे के अनुसार, 2002 03 में MP का स्कूल शिक्षा बजट करीब ₹2,000 करोड़ था जो अब बढ़कर ₹38,658 करोड़ हो गया है। इस दौरान स्कूल ड्रॉपआउट दर भी 16 प्रतिशत से शून्य की ओर लाने का दावा किया जा रहा है।
मध्य प्रदेश में सरकारी भर्तियों की मौजूदा स्थिति क्या है?
CM यादव के अनुसार पुलिस विभाग में करीब 18,000 पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी है और 10,000 युवा प्रशिक्षण के बाद पुलिस सेवा में शामिल हो चुके हैं। स्कूल शिक्षा विभाग में 10,000 पदों पर भर्ती चल रही है और 7,000 व्याख्याताओं की नियुक्ति पहले ही हो चुकी है।
मध्य प्रदेश में मेडिकल शिक्षा का विस्तार कितना हुआ है?
सरकार के अनुसार 1956 से 2002 03 के बीच MP में केवल 5 मेडिकल कॉलेज थे, जो अब बढ़कर 33 हो गए हैं। मेडिकल सीटें करीब 680 से बढ़कर 7,000 से अधिक हो गई हैं।
राष्ट्र प्रेस
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