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राहुल गांधी के इंदौर भाषण पर 'झूठ की गूंज' का फैक्ट-चेक, भाजपा के विनोद तावड़े ने भी किया पलटवार

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राहुल गांधी के इंदौर भाषण पर 'झूठ की गूंज' का फैक्ट-चेक, भाजपा के विनोद तावड़े ने भी किया पलटवार

सारांश

राहुल गांधी के इंदौर भाषण में एमपीपीएससी को लेकर किए दावों पर एक्स हैंडल 'झूठ की गूंज' ने फैक्ट-चेक में सवाल उठाए हैं। भाजपा के विनोद तावड़े ने डूसू में एबीवीपी की जीत को 'राष्ट्रवाद की विजय' बताते हुए राहुल पर पलटवार किया। कांग्रेस की ओर से कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं आई।

मुख्य बातें

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने इंदौर भाषण में दावा किया कि पिछले आठ वर्षों में एमपीपीएससी की भर्तियों में 4.87 लाख पद लंबित हैं।
एक्स हैंडल 'झूठ की गूंज' ने इस दावे को गलत बताते हुए कहा कि 87:13 फॉर्मूला केवल 29 सितंबर 2022 से लागू है, आठ वर्षों से नहीं।
फैक्ट-चेक पोस्ट के अनुसार, प्रभावित पद लगभग 10 हज़ार हैं, न कि 4.87 लाख ।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जनवरी 2025 में 87:13 अंतरिम फॉर्मूले को बरकरार रखा था।
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े ने डूसू चुनाव में एबीवीपी की तीन सीटों पर जीत को 'राष्ट्रवाद की विजय' कहा।
कांग्रेस की ओर से इस पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने इंदौर में एक कार्यक्रम के दौरान मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) की भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर जो दावे किए, उन्हें एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर सक्रिय हैंडल 'झूठ की गूंज' ने 19 सितंबर 2026 को अपने फैक्ट-चेक पोस्ट के ज़रिए गलत बताया है। इसी मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े ने भी राहुल गांधी पर सीधा हमला बोला।

राहुल गांधी का दावा और फैक्ट-चेक के मुख्य बिंदु

राहुल गांधी ने इंदौर कार्यक्रम में आरोप लगाया था कि पिछले आठ वर्षों में एमपीपीएससी की सभी भर्ती प्रक्रियाओं में 13 प्रतिशत पद रोक दिए गए, जिससे 4.87 लाख पद लंबित पड़े हैं। 'झूठ की गूंज' हैंडल ने इस दावे को अपनी पोस्ट में 'झूठा' करार दिया।

पोस्ट के अनुसार, 87:13 का फॉर्मूला पिछले आठ वर्षों से नहीं, बल्कि 29 सितंबर 2022 को मध्य प्रदेश सामान्य प्रशासन विभाग का परिपत्र जारी होने के बाद से लागू है। इसलिए यह आठ वर्षों की सभी भर्ती प्रक्रियाओं पर लागू नहीं हो सकता।

विवाद की पृष्ठभूमि

फैक्ट-चेक पोस्ट के दावों के अनुसार, यह विवाद 2019 में तत्कालीन कमलनाथ सरकार द्वारा ओबीसी आरक्षण 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत किए जाने के बाद शुरू हुआ, जिसके चलते मामला न्यायालय तक पहुँचा। पोस्ट में यह भी स्पष्ट किया गया कि भर्ती पूरी तरह नहीं रोकी गई थी — 87 प्रतिशत पदों पर नियुक्तियाँ जारी रहीं और शेष 13 प्रतिशत पदों के लिए अंतरिम सूची तैयार की गई, ताकि अदालत के अंतिम निर्णय के अनुसार नियुक्तियाँ की जा सकें।

पोस्ट में आगे दावा किया गया कि जनवरी 2025 में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अंतरिम व्यवस्था के तौर पर 87:13 फॉर्मूले को बरकरार रखा था। इस व्यवस्था से प्रभावित पदों की संख्या लगभग 10 हज़ार बताई गई, न कि राहुल गांधी के दावे के अनुसार 4.87 लाख एमपीपीएससी पद।

विनोद तावड़े का पलटवार

भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े ने एक्स पर अपनी पोस्ट में लिखा — 'झूठ की गूंज के सामने राष्ट्रवाद की विजय।' तावड़े ने दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (डूसू) चुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की तीन सीटों पर हुई जीत को इस 'विजय' से जोड़ते हुए पार्टी कार्यकर्ताओं को बधाई दी।

तावड़े ने यह भी दावा किया कि दिल्ली विश्वविद्यालय के अधिकांश कॉलेजों में एबीवीपी ने सभी पैनलों पर 'क्लीन स्वीप' करते हुए ऐतिहासिक प्रदर्शन किया है। उन्होंने विश्वास जताया कि एबीवीपी कार्यकर्ता स्वामी विवेकानंद के आदर्शों पर चलते हुए छात्रहित में काम करते रहेंगे।

कांग्रेस की प्रतिक्रिया

'झूठ की गूंज' के फैक्ट-चेक दावों और भाजपा के हमले पर कांग्रेस की ओर से अब तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब मध्य प्रदेश में सरकारी भर्तियों का मुद्दा राजनीतिक रूप से संवेदनशील बना हुआ है और बेरोज़गार युवाओं की माँगें विपक्ष के लिए एक प्रमुख हथियार रही हैं।

यह मामला स्पष्ट करता है कि सोशल मीडिया पर फैक्ट-चेक के दावों और राजनीतिक बयानबाज़ी के बीच की रेखा तेज़ी से धुंधली हो रही है — और ऐसे दावों की स्वतंत्र सत्यापन की ज़रूरत पहले से कहीं अधिक है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह एक स्वतंत्र सत्यापन संस्था नहीं है — यह राजनीतिक पहचान वाला एक सोशल मीडिया अकाउंट है। इसके दावों की पड़ताल बिना स्वतंत्र स्रोत के नहीं की जा सकती। असली सवाल यह है कि एमपीपीएससी में वास्तव में कितने पद कितने समय से लंबित हैं — इसका जवाब न राहुल गांधी के भाषण में है, न इस पोस्ट में। जब तक सरकारी आँकड़े और अदालती आदेश सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आते, यह पूरी बहस राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से आगे नहीं बढ़ती।
RashtraPress
19 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राहुल गांधी ने इंदौर में एमपीपीएससी को लेकर क्या दावा किया था?
राहुल गांधी ने इंदौर कार्यक्रम में आरोप लगाया कि पिछले आठ वर्षों में एमपीपीएससी की सभी भर्ती प्रक्रियाओं में 13 प्रतिशत पद रोक दिए गए, जिससे 4.87 लाख पद लंबित हैं। यह दावा मध्य प्रदेश में बेरोज़गार युवाओं की स्थिति पर उनके व्यापक राजनीतिक हमले का हिस्सा था।
'झूठ की गूंज' ने इस दावे पर क्या कहा?
एक्स हैंडल 'झूठ की गूंज' ने पोस्ट कर दावा किया कि 87:13 फॉर्मूला 29 सितंबर 2022 के सामान्य प्रशासन विभाग के परिपत्र के बाद लागू हुआ, इसलिए यह आठ वर्षों की सभी भर्तियों पर लागू नहीं होता। पोस्ट में यह भी कहा गया कि प्रभावित पद लगभग 10 हज़ार हैं, न कि 4.87 लाख।
87:13 फॉर्मूला विवाद की असल शुरुआत कब और कैसे हुई?
फैक्ट-चेक पोस्ट के अनुसार, यह विवाद 2019 में तत्कालीन कमलनाथ सरकार द्वारा ओबीसी आरक्षण 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत किए जाने के बाद मामला अदालत पहुँचने से शुरू हुआ। जनवरी 2025 में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अंतरिम रूप से 87:13 फॉर्मूले को बरकरार रखा।
विनोद तावड़े का राहुल गांधी पर हमला किस संदर्भ में था?
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े ने एक्स पर 'झूठ की गूंज के सामने राष्ट्रवाद की विजय' लिखकर डूसू चुनाव में एबीवीपी की तीन सीटों पर जीत को राहुल गांधी के बयानों के विरोध में एक प्रतीकात्मक जीत के रूप में पेश किया। यह टिप्पणी सीधे तौर पर राहुल गांधी के इंदौर भाषण और उसके फैक्ट-चेक से जोड़कर की गई।
कांग्रेस ने इस पर क्या प्रतिक्रिया दी है?
अब तक कांग्रेस की ओर से 'झूठ की गूंज' के दावों या भाजपा के हमले पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह मामला एमपीपीएससी भर्ती विवाद पर राजनीतिक बहस को और तेज़ कर सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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