विक्टोरिया क्रॉस विजेता नायक यशवंत घाडगे को इटली भारत ने दी संयुक्त श्रद्धांजलि
सारांश
मुख्य बातें
इटली की मोंटोने नगरपालिका और भारतीय दूतावास, रोम ने 19 सितंबर 2026 को शनिवार को संयुक्त रूप से द्वितीय विश्व युद्ध के वीर नायक यशवंत घाडगे को श्रद्धांजलि अर्पित की — जो विक्टोरिया क्रॉस से सम्मानित उन भारतीय सैनिकों में से एक हैं जिन्होंने इटली की धरती पर सर्वोच्च बलिदान दिया था। यह आयोजन भारत इटली के साझा युद्ध स्मृति को जीवित रखने के एक व्यापक कूटनीतिक प्रयास का हिस्सा है।
कार्यक्रम की मुख्य झलकियाँ
इस स्मृति कार्यक्रम का सबसे विशेष पहलू रहा — भारत के बेलगावी स्थित आर्मी पब्लिक स्कूल और इटली के मोंटोने के ज्यूसेपे पोलिडोरी सेकेंडरी स्कूल के छात्रों के बीच एक वर्चुअल संवाद सत्र। भारतीय दूतावास ने एक्स पर पोस्ट किया, "इस आदान प्रदान से भारतीय और इतालवी बच्चों को उनकी वीरता और बलिदान के बारे में जानने, अनुभव साझा करने और सीमाओं से परे जुड़ने का अवसर मिला।"
दूतावास ने यह भी कहा कि यह कार्यक्रम "हमारे साझा इतिहास और दोनों देशों के बीच स्थायी मित्रता को उजागर करने के लिए दूतावास के प्रयासों का हिस्सा है।" गौरतलब है कि ऐसे सांस्कृतिक शैक्षणिक जुड़ाव, खासकर युद्ध स्मृतियों को केंद्र में रखकर, भारत और इटली के बीच द्विपक्षीय संबंधों को एक भावनात्मक आधार प्रदान करते हैं।
नायक यशवंत घाडगे का अदम्य साहस
नायक यशवंत घाडगे ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान 3/5वीं मराठा लाइट इन्फैंट्री (वर्तमान में मराठा लाइट इन्फैंट्री) में सेवा की थी। 10 जुलाई 1944 को इटली की अपर टाइबर वैली के मोर्लूपो में उन्होंने अकेले ही दुश्मन की एक मशीन गन चौकी पर धावा बोला — उस समय उनकी उम्र मात्र 24 वर्ष थी।
लंदन स्थित नेशनल आर्मी म्यूजियम के अनुसार, उनके वीरता पुरस्कार के प्रशस्ति पत्र में दर्ज है: "बिना किसी हिचकिचाहट के और यह अच्छी तरह जानते हुए कि उनके साथ जाने के लिए कोई सैनिक नहीं बचा है, नायक यशवंत घाडगे मशीन गन चौकी की ओर दौड़ पड़े।" उन्होंने पहले ग्रेनेड से मशीन गन को निष्क्रिय किया, फिर टॉमी गन से एक सैनिक को मार गिराया, और मैगजीन बदलने का समय न मिलने पर बंदूक के बैरल से शेष दो सैनिकों को समाप्त किया।
प्रशस्ति पत्र आगे कहता है: "दुर्भाग्य से, दुश्मन के स्नाइपरों ने नायक यशवंत घाडगे की छाती और पीठ में गोली मार दी और उनकी उसी चौकी पर मृत्यु हो गई, जिस पर उन्होंने अकेले कब्जा किया था।" इस भारतीय एनसीओ का साहस, दृढ़ संकल्प और कर्तव्य के प्रति समर्पण असाधारण बताया गया।
स्मृति और सम्मान
नायक यशवंत घाडगे का शव कभी नहीं मिला। इटली के कैसिनो वॉर मेमोरियल पर उनका नाम अंकित है, जो युद्ध में शहीद हुए सैनिकों की स्मृति को सँजोए हुए है। महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के माणगांव स्थित तहसील कार्यालय में भी उनकी प्रतिमा स्थापित की गई है।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपने उन वीर सपूतों की स्मृतियों को वैश्विक मंच पर पुनर्जीवित कर रहा है, जिन्होंने विदेशी धरती पर देश का मान ऊँचा किया। विक्टोरिया क्रॉस — ब्रिटिश और राष्ट्रमंडल सेनाओं का सर्वोच्च वीरता पुरस्कार — कितने ही भारतीय सैनिकों को मिला, लेकिन उनमें से अधिकांश की कहानियाँ आज भी आम जन से दूर हैं।
शिक्षा और भावी पीढ़ी पर असर
दोनों देशों के स्कूली बच्चों के बीच वर्चुअल संवाद सत्र एक नई पहल है, जो इतिहास को पाठ्यपुस्तकों से बाहर लाकर जीवंत अनुभव में बदलती है। आलोचकों का कहना है कि ऐसे कार्यक्रम तभी सार्थक होते हैं जब इन्हें नियमित शैक्षणिक पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाए — केवल वार्षिक आयोजनों तक सीमित न रखा जाए।
फिर भी, यह द्विपक्षीय स्मृति कार्यक्रम भारत इटली संबंधों में एक सकारात्मक सांस्कृतिक अध्याय जोड़ता है और आने वाली पीढ़ियों को युद्धकालीन बलिदानों से परिचित कराने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है।