क्या जबरदस्त गोलाबारी के बीच शत्रु की योजना विफल हो गई? विश्व पुस्तक मेले में सैन्य बलिदान को किया गया याद
सारांश
Key Takeaways
- भारतीय सेना का अद्वितीय बलिदान
- सेना दिवस का महत्व
- सैन्य विरासत की संग्रहण प्रक्रिया
- पुस्तकों की महत्ता
- शिक्षा नीति की प्रगति
नई दिल्ली, 15 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 में गुरुवार को सैन्य बलिदान को श्रद्धांजलि दी गई। इस दिन सेना दिवस के मौके पर सैन्य संघर्ष और बलिदान को याद किया गया। इस अवसर पर बताया गया कि कैसे भारतीय सेना के जवानों ने जबरदस्त गोलाबारी के बीच जांबाजी से शत्रु की योजना को विफल किया।
भारतीय सैनिकों की शौर्य गाथाओं के माध्यम से यह बताया गया कि सेना ने विभिन्न ऑपरेशनों में रणनीतिक ठिकानों को कैसे सुरक्षित रखा। नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेले के थीम पवेलियन में सेना दिवस के अवसर पर शौर्य, नेतृत्व और बलिदान को प्रतिबिंबित करने वाले सत्रों के माध्यम से भारत की सैन्य विरासत को सम्मानित किया गया।
एक पैनल में मेजर राम राघोबा राणे, परमवीर चक्र पाने वाले पहले जीवित सैनिक के जीवन और विरासत पर चर्चा की गई। इस चर्चा में डॉ. डीवी गुरुप्रसाद और लेफ्टिनेंट कर्नल अन्नप्पा नारायण शेट ने अपने विचार साझा किए।
डॉ. गुरुप्रसाद ने कर्नाटक के कारवार में मेजर राणे की जड़ों और एक सिपाही से मेजर बनने तक की उनकी यात्रा का वर्णन किया। यह यात्रा अनुशासन, धैर्य और सेवा से प्रेरित थी। लेफ्टिनेंट कर्नल शेट ने 1947-48 के संघर्ष के दौरान एक इंजीनियर अधिकारी के रूप में मेजर राणे के अद्वितीय पराक्रम पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि कैसे दुश्मन की भारी गोलाबारी के बीच उन्होंने बारूदी सुरंग निष्क्रियकरण अभियानों को सफल बनाया, जिससे भारतीय सेनाओं को आगे बढ़ने और रणनीतिक ठिकानों को सुरक्षित करने में सहायता मिली।
इसके अलावा, ऑपरेशन विजय (कारगिल युद्ध, 1999) पर भी एक समूह चर्चा आयोजित की गई। इस चर्चा में लेफ्टिनेंट जनरल मोहीन्द्र पुरी और ब्रिगेडियर ओम प्रकाश यादव ने कर्नल एससी त्यागी के साथ संवाद किया। अपने प्रत्यक्ष अनुभवों के आधार पर लेफ्टिनेंट जनरल पुरी ने श्रीनगर-शेरशाहाबाद सेक्टर में शॉर्ट नोटिस पर कमान संभालने, दुर्गम भूभाग, जटिल मौसम और शत्रु की निरंतर गोलाबारी की चुनौतियों से जुड़ी जानकारी साझा की।
ब्रिगेडियर यादव ने सामरिक योजना और क्रियान्वयन पर ध्यान केंद्रित करते हुए बताया कि किस प्रकार सैनिकों की सुरक्षा और निर्बाध आपूर्ति लाइनों को सुनिश्चित करते हुए कारगिल में प्रमुख ठिकानों पर कब्जा किया गया। नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 में विचारों, इतिहास और राष्ट्रबोध का सार्थक संगम देखने को मिला।
पठन एवं पुस्तकालयों के उन्नयन पर आधारित दो दिवसीय राष्ट्रीय नेतृत्व संवाद ‘रीडिंग इंडिया संवाद 2026’ का शुभारंभ हुआ। यह संवाद भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत द्वारा आयोजित किया गया।
इस संवाद का उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 और विकसित भारत 2047 की राष्ट्रीय परिकल्पना के अनुरूप पठन, पुस्तकालय और ज्ञान तक पहुंच के पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करना है।
रीडिंग संवाद का उद्घाटन शिक्षा मंत्रालय के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव संजय कुमार ने किया। इस अवसर पर उत्तराखंड सरकार के सेतु आयोग के उपाध्यक्ष राजशेखर जोशी, शिक्षा मंत्रालय की अपर सचिव अर्चना शर्मा अवस्थी, राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के निदेशक युवराज मलिक और एनबीटी के मुख्य संपादक एवं संयुक्त निदेशक कुमार विक्रम उपस्थित रहे।
युवराज मलिक ने बताया कि पठन किसी भी प्रगतिशील समाज की नींव है। उन्होंने सिकंदर, महान सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य और नेपोलियन बोनापार्ट के जीवन से उद्धरण दिए। उनका कहना था कि पुस्तकें किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती हैं।
शिक्षा सचिव संजय कुमार ने कहा, “पुस्तकों से भरी दीवार से सुंदर कुछ नहीं होता।” उन्होंने पठन को दूसरे के मन में प्रवेश करने की शक्ति बताया। उन्होंने भारतीय भाषाओं में पुस्तकों के व्यापक प्रकाशन और पाठक वर्ग के विस्तार का आह्वान किया।
विश्व पुस्तक मेले के थीम पवेलियन में प्रसिद्ध लेखक तरुण विजय की पुस्तक ‘मंत्र विप्लव’ का लोकार्पण किया गया। लोकार्पण कार्यक्रम में दत्तात्रेय होसबले और सांसद सुधांशु त्रिवेदी उपस्थित रहे।