जनरल वीके सिंह बोले — सैनिक इनाम नहीं, कर्तव्य और सम्मान के लिए लड़ता है; प्रथम विश्व युद्ध के 13 लाख भारतीय शहीदों को श्रद्धांजलि
सारांश
Key Takeaways
मिजोरम के राज्यपाल और पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल वीके सिंह ने 30 अप्रैल 2026 को दिल्ली विधानसभा में आयोजित एक संगोष्ठी में प्रथम विश्व युद्ध के भारतीय शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि एक सैनिक कभी इनाम के लिए नहीं लड़ता — वह कर्तव्य, सम्मान और इस दृढ़ विश्वास के लिए लड़ता है कि उसका बलिदान देश के काम आएगा। यह संगोष्ठी 1918 के युद्ध सम्मेलन (वॉर कॉन्फ्रेंस) की 108वीं वर्षगांठ के अवसर पर उसी ऐतिहासिक भवन में आयोजित की गई, जहाँ सौ वर्ष से भी पहले वह बैठक हुई थी।
संगोष्ठी का विषय और आयोजन
इस कार्यक्रम का विषय 'प्रथम विश्वयुद्ध और भारत' था। अध्यक्षता दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने की। कार्यक्रम में गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति के उपाध्यक्ष विजय गोयल, दिल्ली विधानसभा के उपाध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट, पूर्व सैनिकों का एक प्रतिनिधिमंडल, इतिहासकार, दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और दिल्ली सरकार के स्कूलों के शिक्षक भी उपस्थित रहे।
13 लाख भारतीय सैनिक, 74 हजार शहीद
जनरल सिंह ने बताया कि प्रथम विश्व युद्ध में 13 लाख से अधिक भारतीय सैनिकों ने भाग लिया, जिनमें से करीब 74 हजार सैनिक शहीद हुए। इन शहीदों के नाम इंडिया गेट पर दर्ज हैं। उन्होंने कहा कि भारत का योगदान केवल सैनिक भेजने तक सीमित नहीं था — इसमें आर्थिक सहायता, रसद और संसाधन भी शामिल थे। गौरतलब है कि उस समय भारत ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के अधीन था, फिर भी उसने इस वैश्विक संघर्ष में निर्णायक भूमिका निभाई।
भगवद्गीता की प्रेरणा और साहस की विरासत
जनरल सिंह ने कहा कि भारतीय सैनिकों ने प्रथम विश्व युद्ध किसी