11 जुलाई 2026
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परमवीर चक्र विजेता मेजर रामा राघोबा राणे के स्मृति दिवस पर गडकरी और बिहार CM ने दी श्रद्धांजलि

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परमवीर चक्र विजेता मेजर रामा राघोबा राणे के स्मृति दिवस पर गडकरी और बिहार CM ने दी श्रद्धांजलि

सारांश

1947-48 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में दुश्मन की गोलाबारी के बीच 72 घंटे लगातार काम कर राजौरी मुक्त कराने वाले परमवीर चक्र विजेता मेजर रामा राघोबा राणे की पुण्यतिथि पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और बिहार CM सम्राट चौधरी ने श्रद्धांजलि दी।

मुख्य बातें

11 जुलाई को मेजर रामा राघोबा राणे की पुण्यतिथि पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और बिहार CM सम्राट चौधरी ने श्रद्धांजलि अर्पित की।
राणे ने 8 अप्रैल 1948 को राजौरी अभियान में दुश्मन की गोलाबारी के बीच 72 घंटे लगातार काम कर भारतीय टैंकों का मार्ग प्रशस्त किया।
घायल अवस्था में भी बारूदी सुरंगें हटाने पर उन्हें भारत का सर्वोच्च वीरता पुरस्कार परमवीर चक्र — जीवित रहते — प्रदान किया गया।
26 जून 1918 को कर्नाटक के करवार जिले में जन्मे राणे 1968 में मेजर के पद से सेवानिवृत्त हुए और पाँच बार मेंशन इन डिस्पैचेस से सम्मानित हुए।
11 जुलाई 1994 को पुणे के कमांड अस्पताल में 76 वर्ष की आयु में उनका निधन हुआ।

नई दिल्ली — परमवीर चक्र से सम्मानित मेजर रामा राघोबा राणे की पुण्यतिथि पर 11 जुलाई 2026 को देशभर के नेताओं ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। 1947-48 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में अपनी जान की परवाह किए बिना दुश्मन की गोलाबारी के बीच भारतीय टैंकों के लिए रास्ता साफ करने वाले इस वीर सैनिक को भारत के सर्वोच्च वीरता पुरस्कार से जीवित रहते हुए सम्मानित किया गया था।

नेताओं की श्रद्धांजलि

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'परमवीर चक्र से सम्मानित सेकेंड लेफ्टिनेंट मेजर रामा राघोबा राणे जी के स्मृति दिवस पर उन्हें विनम्र अभिवादन।'

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी सोशल मीडिया पर अपनी श्रद्धांजलि साझा करते हुए कहा, 'परमवीर चक्र से अलंकृत मां भारती के वीर सपूत मेजर रामा राघोबा राणे जी की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि। राष्ट्र की रक्षा के लिए उनका अदम्य साहस, पराक्रम और सर्वोच्च बलिदान सदैव देशवासियों को प्रेरित करता रहेगा।'

वीरता की अमर गाथा

26 जून 1918 को कर्नाटक के करवार जिले के चेंदिया गाँव में जन्मे राणे ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश भारतीय सेना में सेवा दी। स्वतंत्रता के बाद 15 दिसंबर 1947 को उन्होंने बॉम्बे सैपर्स (कोर ऑफ इंजीनियर्स) में सेकंड लेफ्टिनेंट के रूप में कमीशन प्राप्त किया।

अप्रैल 1948 में राजौरी पर कब्जा करने के अभियान में उनकी 37 असॉल्ट फील्ड कंपनी को सड़क अवरोधों और खदान क्षेत्रों को साफ करने का दायित्व सौंपा गया। यह ऐसे समय में आया जब पाकिस्तानी सेना की भारी गोलाबारी लगातार जारी थी।

72 घंटे की अदम्य वीरता

8 अप्रैल 1948 को दुश्मन के भारी गोले बरसने के बावजूद राणे ने 72 घंटे तक निरंतर कार्य किया। इस दौरान उनके दो साथी शहीद हो गए और पाँच अन्य घायल हुए — जिनमें स्वयं राणे भी शामिल थे। घायल अवस्था में भी उन्होंने बारूदी सुरंगें हटाईं, सड़कें साफ कीं और भारतीय टैंकों को आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त किया। उनकी इस अदम्य वीरता ने राजौरी की मुक्ति में निर्णायक भूमिका निभाई।

परमवीर चक्र और सेवानिवृत्ति

उनकी असाधारण वीरता के लिए 8 अप्रैल 1948 को ही परमवीर चक्र घोषित किया गया। गौरतलब है कि वे उन विरले सैनिकों में से थे जिन्हें यह सम्मान जीवित रहते प्रदान किया गया। 28 वर्षों की सैन्य सेवा के बाद 1968 में मेजर के पद से सेवानिवृत्त होने वाले राणे को पाँच बार मेंशन इन डिस्पैचेस का सम्मान भी मिला। 11 जुलाई 1994 को पुणे के कमांड अस्पताल में 76 वर्ष की आयु में उनका निधन हुआ।

उनकी पुण्यतिथि पर राष्ट्र उन्हें नमन करता है — उनकी वीरगाथा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का अक्षय स्रोत बनी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सवाल भी उठता है कि परमवीर चक्र विजेताओं की स्मृति को सोशल मीडिया पोस्ट से परे संस्थागत रूप से कैसे जीवित रखा जाए। राणे उन विरले योद्धाओं में थे जिन्हें यह सम्मान जीवित रहते मिला, फिर भी उनकी वीरगाथा पाठ्यपुस्तकों और सार्वजनिक चेतना में उतनी जगह नहीं पाती जितनी मिलनी चाहिए। राष्ट्रीय वीरता की विरासत को केवल पुण्यतिथियों तक सीमित न रखकर, शैक्षणिक और सांस्कृतिक स्तर पर स्थायी स्मरण की आवश्यकता है।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मेजर रामा राघोबा राणे कौन थे?
मेजर रामा राघोबा राणे भारतीय सेना के परमवीर चक्र विजेता थे, जिन्होंने 1947-48 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में राजौरी अभियान के दौरान असाधारण वीरता का प्रदर्शन किया। वे 26 जून 1918 को कर्नाटक के करवार जिले में जन्मे थे और 11 जुलाई 1994 को पुणे में उनका निधन हुआ।
मेजर राणे को परमवीर चक्र क्यों मिला?
8 अप्रैल 1948 को राजौरी अभियान के दौरान दुश्मन की भारी गोलाबारी के बीच 72 घंटे लगातार काम करते हुए उन्होंने बारूदी सुरंगें हटाईं और भारतीय टैंकों के लिए रास्ता साफ किया। घायल होने के बावजूद उन्होंने अभियान जारी रखा, जिससे राजौरी की मुक्ति संभव हुई।
क्या मेजर राणे को परमवीर चक्र जीवित रहते मिला था?
हाँ, मेजर रामा राघोबा राणे उन विरले सैनिकों में से एक थे जिन्हें परमवीर चक्र जीवित रहते प्रदान किया गया। यह सम्मान 8 अप्रैल 1948 की उनकी वीरता के लिए घोषित किया गया था।
11 जुलाई को मेजर राणे की पुण्यतिथि पर किसने श्रद्धांजलि दी?
11 जुलाई 2026 को केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि अर्पित की। दोनों नेताओं ने उनके अदम्य साहस और राष्ट्र के प्रति बलिदान को याद किया।
मेजर राणे ने सेना में कितने वर्ष सेवा दी?
मेजर रामा राघोबा राणे ने भारतीय सेना में 28 वर्षों तक सेवा दी और 1968 में मेजर के पद से सेवानिवृत्त हुए। इस दौरान उन्हें पाँच बार मेंशन इन डिस्पैचेस से भी सम्मानित किया गया।
राष्ट्र प्रेस
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