बाबा बंदा सिंह बहादुर शहीदी दिवस: अमित शाह ने एक्स पर किया नमन, गडकरी-पुरी-धामी ने भी दी श्रद्धांजलि
सारांश
मुख्य बातें
गृह मंत्री अमित शाह सहित कई केंद्रीय मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों ने 25 जून को खालसा सेना के प्रथम सेनापति बाबा बंदा सिंह बहादुर के शहीदी दिवस पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया। बाबा बंदा सिंह बहादुर ने असहनीय यातनाएँ सहने के बावजूद धर्मांतरण स्वीकार नहीं किया और मुगल सत्ता के विरुद्ध अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।
अमित शाह का श्रद्धांजलि संदेश
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'मातृभूमि, धर्म और स्वाभिमान की रक्षा के लिए समर्पित बाबा बंदा सिंह बहादुर ने अपने अदम्य साहस और कुशल नेतृत्व से मुगल सेना को अनेक बार पराजित किया व विशाल भू-भाग को मुगल अत्याचारों से मुक्त कराया।' शाह ने आगे लिखा कि उन्होंने किसानों को उनके अधिकार दिलाने के लिए न्यायपूर्ण व्यवस्था स्थापित की और असहनीय यातनाएँ सहने के बावजूद धर्मांतरण स्वीकार नहीं किया।
शाह ने अपनी पोस्ट में बाबा बंदा सिंह बहादुर को 'महान योद्धा, खालसा सेना के प्रथम सेनापति व अद्वितीय पराक्रम के प्रतीक' बताते हुए उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया।
गडकरी और पुरी की श्रद्धांजलि
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एक्स पर लिखा कि बाबा बंदा सिंह बहादुर ने किसानों के हितों की रक्षा के लिए संघर्ष किया और अपने शौर्य व पराक्रम से उन्हें भयमुक्त किया। उन्होंने कहा, 'धर्म और संस्कृति के पथ पर सदा रहें — उनको युगों तक याद रखा जाएगा।'
केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बाबा बंदा सिंह बहादुर को 'मजलूमों के रक्षक, महान योद्धा और सिख कौम के महान जरनैल' बताते हुए कहा कि उनकी महान शहादत समाज को सदैव जुल्म के आगे न झुकने की प्रेरणा देती रहेगी।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री धामी का संदेश
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बाबा बंदा सिंह बहादुर को 'महान योद्धा, अद्वितीय सेनानायक और वीरता के प्रतीक' बताते हुए कहा कि उनका अदम्य साहस, अन्याय के विरुद्ध संघर्ष और धर्म एवं मानवता की रक्षा के लिए दिया गया सर्वोच्च बलिदान सदैव प्रेरणापुंज रहेगा।
बाबा बंदा सिंह बहादुर का ऐतिहासिक महत्व
गौरतलब है कि बाबा बंदा सिंह बहादुर खालसा सेना के प्रथम सेनापति थे जिन्होंने मुगल शासन के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष का नेतृत्व किया और विशाल भू-भाग को मुगल अत्याचारों से मुक्त कराया। उन्होंने किसानों के लिए न्यायपूर्ण व्यवस्था स्थापित की — जो उस युग में एक क्रांतिकारी कदम था। यह ऐसे समय में आया है जब उनकी विरासत को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर स्मरण और सम्मान की परंपरा लगातार मजबूत हो रही है।
आगे की राह
बाबा बंदा सिंह बहादुर की शहादत की स्मृति हर वर्ष राष्ट्रीय स्तर पर मनाई जाती है और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता उन्हें श्रद्धांजलि देते हैं। इस वर्ष की श्रद्धांजलि में केंद्र सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों की सक्रिय भागीदारी ने इस ऐतिहासिक विरासत को और व्यापक राष्ट्रीय पहचान दिलाई है।