17 सितंबर 2026
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हैदराबाद मुक्ति दिवस पर अमित शाह का संदेश — निजाम-विरोधी संघर्ष के शहीदों को नमन

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हैदराबाद मुक्ति दिवस पर अमित शाह का संदेश — निजाम-विरोधी संघर्ष के शहीदों को नमन

सारांश

17 सितंबर को हैदराबाद मुक्ति दिवस पर गृह मंत्री अमित शाह, UP उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य समेत कई BJP नेताओं ने एक्स पर संदेश साझा किए — सरदार पटेल के नेतृत्व में 1948 के ऑपरेशन पोलो और निजाम-विरोधी संघर्ष के बलिदानियों को श्रद्धांजलि देते हुए।

मुख्य बातें

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 17 सितंबर 2026 को हैदराबाद मुक्ति दिवस पर एक्स पर बधाई संदेश साझा किया।
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी सहित कई नेताओं ने श्रद्धांजलि अर्पित की।
हैदराबाद 17 सितंबर 1948 को ऑपरेशन पोलो के जरिए निजाम के शासन से मुक्त होकर भारतीय संघ में शामिल हुआ था।
सैन्य अभियान 13 सितंबर 1948 को तत्कालीन गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल के नेतृत्व में शुरू हुआ था।
15 अगस्त 1947 को भारत की स्वतंत्रता के बाद भी निजाम मीर उस्मान अली खान ने भारत में शामिल होने से इनकार किया था।

गृह मंत्री अमित शाह सहित भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कई वरिष्ठ नेताओं ने 17 सितंबर 2026 को हैदराबाद मुक्ति दिवस पर देशवासियों — विशेषकर तेलंगाना, हैदराबाद-कर्नाटक और मराठवाड़ा क्षेत्र के लोगों को — बधाई और शुभकामनाएं दीं। एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा किए गए अपने संदेशों में नेताओं ने ऑपरेशन पोलो के नायकों और स्वतंत्रता संग्राम के बलिदानियों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

अमित शाह का संदेश

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक्स पर लिखा, 'हैदराबाद मुक्ति दिवस के अवसर पर, मैं तेलंगाना, हैदराबाद-कर्नाटक और मराठवाड़ा वाले पूर्ववर्ती हैदराबाद क्षेत्र के लोगों को बधाई देता हूं।' उन्होंने आगे कहा, 'यह दिन आपकी देशभक्ति और वीरता की उस गाथा को याद दिलाता है, जिसके जरिए आपने भारत के साथ एकजुट होने के लिए निजाम और रजाकारों के दमनकारी शासन को उखाड़ फेंका था; साथ ही, यह एक महान राष्ट्र के रूप में हमारी एकता के बंधन को और मजबूत करता है। आजादी के लिए अपना सब कुछ न्योछावर करने वाले शहीदों को मेरा नमन।'

केशव मौर्य और अन्य नेताओं की श्रद्धांजलि

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने सोशल मीडिया पर लिखा कि देश के प्रथम गृह मंत्री एवं उप-प्रधानमंत्री, 'भारत रत्न', 'लौह पुरुष' सरदार वल्लभभाई पटेल के निर्णायक प्रयासों ने हैदराबाद के भारत में विलय का मार्ग प्रशस्त किया। उन्होंने कहा कि पटेल की दूरदर्शिता और राष्ट्रहित के प्रति अटूट प्रतिबद्धता ने देश की एकता एवं अखंडता को नई मजबूती दी और 'हैदराबाद मुक्ति संग्राम के सभी अमर बलिदानियों को कोटि-कोटि नमन' किया।

बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने 17 सितंबर 1948 को 'भारत की एकता और अखंडता के संकल्प का प्रतीक' बताते हुए हैदराबाद मुक्ति संग्राम के सभी वीरों एवं बलिदानियों को 'कृतज्ञ नमन' अर्पित किया। दिल्ली सरकार में मंत्री आशीष सूद ने भी उन स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि दी जिनके साहस और दृढ़ संकल्प ने हैदराबाद के विलय का मार्ग प्रशस्त किया।

हैदराबाद मुक्ति दिवस का ऐतिहासिक महत्व

हैदराबाद मुक्ति दिवस प्रतिवर्ष 17 सितंबर को मनाया जाता है। 15 अगस्त 1947 को भारत की स्वतंत्रता के समय हैदराबाद रियासत पर निजाम मीर उस्मान अली खान का शासन था और उसने भारतीय संघ में शामिल होने से इनकार कर दिया था। तत्कालीन गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल के नेतृत्व में 13 सितंबर 1948 को 'ऑपरेशन पोलो' (पुलिस कार्रवाई) के नाम से सैन्य अभियान शुरू किया गया। इसके ठीक चार दिन बाद, 17 सितंबर 1948 को हैदराबाद निजाम के शासन से मुक्त होकर भारतीय संघ का हिस्सा बन गया।

राजनीतिक संदर्भ और व्यापक प्रासंगिकता

यह ऐसे समय में आया है जब तेलंगाना, कर्नाटक और महाराष्ट्र में राजनीतिक प्रतिस्पर्धा तेज है और हैदराबाद मुक्ति दिवस एक संवेदनशील ऐतिहासिक प्रश्न बना हुआ है। गौरतलब है कि BJP इस दिन को राष्ट्रीय एकता के प्रतीक के रूप में नियमित रूप से चिह्नित करती रही है। केंद्र सरकार ने पिछले वर्षों में इस अवसर को आधिकारिक स्तर पर भी मान्यता देते हुए कार्यक्रम आयोजित किए हैं। नेताओं के सामूहिक संदेश सरदार पटेल की विरासत को रेखांकित करते हैं, जो BJP की राष्ट्रीय एकता की राजनीतिक आख्यान का केंद्रीय स्तंभ है।

संपादकीय दृष्टिकोण

कर्नाटक और महाराष्ट्र में पार्टी की राजनीतिक उपस्थिति को मज़बूत करने की एक सुनियोजित कोशिश भी है, जहाँ इन तीनों राज्यों में इस दिवस की प्रासंगिकता गहरी है। सरदार पटेल की विरासत को केंद्र में रखना BJP की एक सिद्ध रणनीति है जो 'राष्ट्रीय एकता' को उसके राजनीतिक आख्यान से जोड़ती है। गौरतलब है कि इस अवसर पर विपक्षी दलों की ओर से अपेक्षाकृत कम आधिकारिक प्रतिक्रिया आना भी एक राजनीतिक संकेत देता है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इस बात को नजरअंदाज करती है कि यह दिवस तेलंगाना के भीतर ही अलग-अलग राजनीतिक व्याख्याओं का विषय रहा है।
RashtraPress
17 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हैदराबाद मुक्ति दिवस क्या है और यह कब मनाया जाता है?
हैदराबाद मुक्ति दिवस प्रतिवर्ष 17 सितंबर को मनाया जाता है। यह 17 सितंबर 1948 को ऑपरेशन पोलो (पुलिस कार्रवाई) के बाद हैदराबाद रियासत के निजाम के शासन से मुक्त होकर भारतीय संघ में विलय की याद में मनाया जाता है।
ऑपरेशन पोलो क्या था?
ऑपरेशन पोलो तत्कालीन गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल के नेतृत्व में 13 सितंबर 1948 को शुरू की गई सैन्य कार्रवाई थी। इसका उद्देश्य हैदराबाद निजाम मीर उस्मान अली खान के शासन को समाप्त करना और रियासत का भारतीय संघ में विलय सुनिश्चित करना था, जो 17 सितंबर 1948 को पूरा हुआ।
अमित शाह ने हैदराबाद मुक्ति दिवस पर क्या कहा?
गृह मंत्री अमित शाह ने एक्स पर लिखा कि यह दिन तेलंगाना, हैदराबाद-कर्नाटक और मराठवाड़ा के लोगों की देशभक्ति और वीरता की गाथा को याद दिलाता है, जिन्होंने निजाम और रजाकारों के दमनकारी शासन को उखाड़ फेंका था। उन्होंने आजादी के लिए बलिदान देने वाले शहीदों को नमन किया।
हैदराबाद मुक्ति दिवस तेलंगाना, कर्नाटक और महाराष्ट्र के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
पूर्ववर्ती हैदराबाद रियासत में आज के तेलंगाना, हैदराबाद-कर्नाटक (कर्नाटक का एक भाग) और मराठवाड़ा (महाराष्ट्र का एक भाग) शामिल थे। इसलिए यह दिवस इन तीनों क्षेत्रों के लोगों के लिए उनके पूर्वजों के संघर्ष और भारत में एकीकरण की ऐतिहासिक स्मृति का प्रतीक है।
सरदार पटेल की हैदराबाद विलय में क्या भूमिका थी?
भारत के प्रथम गृह मंत्री और उप-प्रधानमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने हैदराबाद के विलय में निर्णायक भूमिका निभाई। उन्होंने निजाम के प्रतिरोध के बावजूद 13 सितंबर 1948 को ऑपरेशन पोलो को अधिकृत किया, जिसके परिणामस्वरूप 17 सितंबर 1948 को हैदराबाद का भारतीय संघ में विलय हुआ।
राष्ट्र प्रेस
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