भारतेंदु हरिश्चंद्र जयंती: अमित शाह, नितिन नवीन समेत कई नेताओं ने अर्पित की श्रद्धांजलि
सारांश
मुख्य बातें
9 सितंबर को आधुनिक हिंदी साहित्य के प्रणेता भारतेंदु हरिश्चंद्र की जयंती पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन सहित अनेक केंद्रीय मंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी। नेताओं ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी-अपनी पोस्ट के माध्यम से भारतेंदु के साहित्यिक और सामाजिक योगदान को याद किया।
गृह मंत्री अमित शाह का संदेश
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक्स पर लिखा कि भारतेंदु हरिश्चंद्र ने भाव, भाषा और शैली में नवीनता का समावेश कर हिंदी को आधुनिक स्वरूप दिया। उन्होंने कहा, 'उनकी रचनाओं में ईश्वर की भक्ति के साथ समाज-सुधार की चेतना, स्त्री-शिक्षा का समर्थन और स्वाधीनता की प्रेरणा स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।' शाह ने यह भी रेखांकित किया कि भारतेंदु ने स्वभाषा को केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्रीय आत्मसम्मान और चेतना का आधार माना।
BJP अध्यक्ष और अन्य मंत्रियों की श्रद्धांजलि
BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने अपनी एक्स पोस्ट में भारतेंदु को 'राष्ट्रचेतना के प्रखर संवाहक' बताते हुए कहा कि उनके साहित्य, पत्रकारिता और सामाजिक चेतना के माध्यम से हिंदी भाषा को नई दिशा मिली और समाज में राष्ट्रीय जागरण का अलख जगा। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भारतेंदु को 'आधुनिक हिंदी के जनक' और 'युग प्रवर्तक साहित्यकार' की संज्ञा देते हुए उनकी अद्वितीय प्रतिभा को नमन किया।
कानून और न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने एक्स पर भारतेंदु की प्रसिद्ध पंक्तियाँ उद्धृत कीं — 'निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल। बिन निज भाषा-ज्ञान के मिट्टी न हिय को सूल।' — और उन्हें महानतम कवि एवं रचनाकार के रूप में वंदन किया।
उपराज्यपाल और अन्य नेताओं के विचार
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने भारतेंदु को 'बहुमुखी प्रतिभा के धनी' बताते हुए कहा कि उनकी कालजयी रचनाएँ युगों-युगों तक साहित्यकारों को प्रेरणा और पाठकों को ऊर्जा प्रदान करती रहेंगी। केंद्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री जीतनराम मांझी ने भी एक्स पर भारतेंदु को 'युग प्रवर्तक साहित्यकार' के रूप में कोटिशः नमन किया।
राज्यसभा सांसद एवं BJP के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े ने कहा कि भारतेंदु हरिश्चंद्र ने 'निज भाषा को सभी उन्नति का मूल' का मंत्र देकर देशवासियों को अपनी भाषाओं की उन्नति के लिए प्रेरित किया और उनकी कालजयी रचनाएँ आज भी मानव को राह दिखाती हैं।
भारतेंदु हरिश्चंद्र का ऐतिहासिक महत्व
गौरतलब है कि भारतेंदु हरिश्चंद्र (1850–1885) को आधुनिक हिंदी गद्य और रंगमंच का आधार-स्तंभ माना जाता है। उनके नाम पर एक पूरे साहित्यिक युग को 'भारतेंदु युग' कहा जाता है। उन्होंने हिंदी पत्रकारिता, नाटक और कविता को एक साथ समृद्ध किया और भाषा को जनचेतना से जोड़ा। यह ऐसे समय में आया है जब हिंदी भाषा की प्रासंगिकता और राष्ट्रीय पहचान को लेकर व्यापक विमर्श जारी है।
हर वर्ष 9 सितंबर को मनाई जाने वाली उनकी जयंती पर राजनीतिक और साहित्यिक जगत से श्रद्धांजलि की परंपरा रही है, किंतु इस बार केंद्रीय मंत्रिमंडल के एकाधिक सदस्यों की सक्रिय भागीदारी उल्लेखनीय रही।