उधम सिंह के 87वें बलिदान दिवस पर अमित शाह और मुख्यमंत्रियों ने दी श्रद्धांजलि
सारांश
मुख्य बातें
महान क्रांतिकारी शहीद सरदार उधम सिंह के 87वें बलिदान दिवस पर 31 जुलाई 2026 को पूरा देश उन्हें नमन कर रहा है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह सहित कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने इस अवसर पर शहीद को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। शाह ने कहा कि स्वाधीनता के लिए हंसते-हंसते फांसी का फंदा चूमने वाले उधम सिंह का जीवन धैर्य, संकल्प और राष्ट्रभक्ति का अप्रतिम उदाहरण है।
अमित शाह की श्रद्धांजलि
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक्स पर लिखा, 'अमर शहीद उधम सिंह के बलिदान दिवस पर उनके चरणों में नमन करता हूं। अद्वितीय साहस व पराक्रम के प्रतीक उधम सिंह जी ने जलियांवाला बाग नरसंहार में शहीद हुए देशवासियों का लंदन में प्रतिशोध लेकर अंग्रेजी हुकूमत को दहशत में लाने का काम किया।' शाह ने आगे कहा कि गदर पार्टी के माध्यम से उधम सिंह ने विदेशों में रह रहे भारतीयों के मन में आजादी की अलख जगाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।
मुख्यमंत्रियों की प्रतिक्रियाएँ
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मातृभूमि के लिए अपना सर्वस्व अर्पित करने वाले सरदार उधम सिंह का पराक्रम, शौर्य और वीरता सदियों तक अनुकरणीय रहेगा। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि जलियांवाला बाग नरसंहार का प्रतिशोध लेकर उन्होंने भारत के स्वाभिमान और न्याय के संकल्प को विश्व के सामने स्थापित किया।
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी ने कहा कि शहीद उधम सिंह का बलिदान भारतीय इतिहास का अमर अध्याय है और आने वाली पीढ़ियों को देशभक्ति के पथ पर प्रेरित करता रहेगा। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि जलियांवाला बाग के निर्दोष शहीदों को न्याय दिलाने का उनका संकल्प और मातृभूमि के प्रति समर्पण सदैव अमर रहेगा।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि उधम सिंह ने अदम्य साहस, धैर्य और राष्ट्रभक्ति का परिचय देते हुए अपना सर्वस्व राष्ट्र को समर्पित कर दिया। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उनका त्याग और अडिग संकल्प देशवासियों को अन्याय के विरुद्ध संघर्ष के पथ पर सदैव प्रेरित करता रहेगा।
उधम सिंह का ऐतिहासिक योगदान
सरदार उधम सिंह ने 1919 के जलियांवाला बाग नरसंहार के दो दशक बाद 1940 में लंदन में उस हत्याकांड के जिम्मेदार माइकल ओ'डायर को गोली मारकर उन हजारों निर्दोष भारतीयों का प्रतिशोध लिया जो ब्रिटिश गोलियों के शिकार हुए थे। गौरतलब है कि उन्हें 31 जुलाई 1940 को पेंटनविल जेल, लंदन में फांसी दी गई थी। यह ऐसे समय में आया है जब स्वतंत्रता सेनानियों की विरासत को लेकर राष्ट्रीय चर्चा एक बार फिर तेज हो रही है।
राष्ट्रीय स्मरण का संदेश
इस बलिदान दिवस पर देशभर में आयोजित कार्यक्रमों में उधम सिंह के साहस और देशप्रेम को याद किया गया। नेताओं के संदेशों में एक साझा सूत्र था — कि उनका बलिदान न केवल एक व्यक्तिगत प्रतिशोध था, बल्कि उस पूरी पीढ़ी की आवाज थी जिसने अन्याय के सामने झुकने से इनकार किया। आने वाली पीढ़ियों को उनकी विरासत से प्रेरणा लेते रहने का आह्वान किया गया।