14 सितंबर 2026
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डाकिया बना बैंकिंग का नया चेहरा: डॉ. जितेंद्र सिंह बोले, इंडिया पोस्ट नेटवर्क से गांव-गांव पहुंच रही वित्तीय सेवाएं

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डाकिया बना बैंकिंग का नया चेहरा: डॉ. जितेंद्र सिंह बोले, इंडिया पोस्ट नेटवर्क से गांव-गांव पहुंच रही वित्तीय सेवाएं

सारांश

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक और डोरस्टेप बैंकिंग के विस्तार ने डाकिये को बैंकिंग और नागरिक सेवाओं का नया चेहरा बना दिया है — पर असली परीक्षा ज़मीनी क्रियान्वयन की है।

मुख्य बातें

केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ.
जितेंद्र सिंह ने 14 सितंबर 2026 को कहा कि इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक और डोरस्टेप बैंकिंग ने ग्रामीण वित्तीय पहुंच को मज़बूत किया है।
डाक नेटवर्क अब 24 घंटे डिलीवरी , आधार , पैन और पासपोर्ट सेवाओं का भी केंद्र बन गया है।
पेंशनभोगियों के लिए डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र सुविधा से बुजुर्गों को दफ्तरों के चक्कर से मुक्ति मिली।
कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान डाक कर्मियों ने घर-घर बैंकिंग सेवाएं और नकदी पहुंचाई, चिकित्सा आपूर्ति में भी भूमिका निभाई।
अखिल भारतीय डाक कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री से मुलाकात कर सेवाओं के विस्तार और कर्मचारियों के मुद्दों पर चर्चा की।

केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने 14 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में कहा कि इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (IPPB) और डोरस्टेप बैंकिंग के विस्तार ने डाक नेटवर्क को देश के गांवों और दूरदराज के घरों तक वित्तीय सेवाएं पहुंचाने का एक प्रभावी माध्यम बना दिया है। उन्होंने कहा कि आज का डाकिया महज चिट्ठी बांटने वाला नहीं, बल्कि बैंकिंग और नागरिक सेवाओं का सजीव प्रतिनिधि बन चुका है।

मंत्री से मिला डाक कर्मचारी प्रतिनिधिमंडल

डाक विभाग के अखिल भारतीय कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधिमंडल ने डॉ. सिंह से मुलाकात की। इस बैठक में डाक सेवाओं के बदलते स्वरूप के साथ-साथ कर्मचारियों, कर्मचारी संगठनों और पेंशनभोगियों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई।

प्रतिनिधियों ने पिछले एक दशक में इंडिया पोस्ट के सेवा पोर्टफोलियो में आए बड़े बदलावों का उल्लेख किया। इनमें 24 घंटे के भीतर डिलीवरी, आधार से संबंधित सेवाएं, तथा डाक नेटवर्क के ज़रिये पैन और पासपोर्ट सेवा केंद्र की उपलब्धता शामिल हैं।

ग्रामीण वित्तीय समावेश में बढ़ती भूमिका

मंत्री ने विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में डोरस्टेप बैंकिंग की अहमियत पर जोर दिया। उनके अनुसार, इंडिया पोस्ट अब पारंपरिक पत्र वितरण की सीमाओं से आगे निकलकर वित्तीय और नागरिक सेवाओं के एक व्यापक मंच के रूप में उभर चुका है।

यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब देश में करोड़ों नागरिक अभी भी बैंकिंग शाखाओं से दूर दुर्गम इलाकों में रहते हैं। डाक नेटवर्क की लास्ट माइल कनेक्टिविटी इस अंतर को पाटने में केंद्रीय भूमिका निभा रही है।

पेंशनभोगियों के लिए डिजिटल सेवाएं

डाक नेटवर्क ने पेंशनभोगियों के लिए डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र जैसी सुविधाओं का भी विस्तार किया है, जिससे वरिष्ठ नागरिकों को पेंशन से जुड़ी औपचारिकताओं के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते। गौरतलब है कि ये सेवाएं उन बुजुर्गों के लिए विशेष रूप से राहतकारी हैं जो शारीरिक रूप से सरकारी दफ्तर जाने में असमर्थ हैं।

कोविड-19 में डाक कर्मियों की भूमिका

डॉ. सिंह ने कोविड-19 महामारी के दौरान डाक कर्मचारियों की अदम्य सेवाभावना को भी याद किया। राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के बावजूद डाक कर्मी नागरिकों तक बैंकिंग सेवाएं और नकदी पहुंचाते रहे। डाक वाहनों और बुनियादी ढांचे का उपयोग आवश्यक चिकित्सा और सुरक्षात्मक सामग्री की आपूर्ति के लिए भी किया गया।

आगे का रास्ता

प्रतिनिधिमंडल ने इंडिया पोस्ट के आधुनिकीकरण के लिए सरकार की सराहना की और इसे नागरिक-केंद्रित सेवा नेटवर्क में बदलने के प्रयासों को महत्वपूर्ण बताया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि डाक नेटवर्क की तकनीकी क्षमता और मानव संसाधन को और मज़बूत किया जाए, तो यह सरकारी सेवाओं और आम नागरिक के बीच की खाई को और भी कम कर सकता है। तेज़ डिलीवरी सेवाओं, आधार सुविधाओं, पैन-पासपोर्ट केंद्रों और डिजिटल पेंशन प्रणाली के साथ इंडिया पोस्ट की सार्वजनिक-सेवा भूमिका लगातार विस्तृत होती जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिन पर इस बैठक में कोई ठोस जवाब सामने नहीं आया। जब तक मानव संसाधन और तकनीकी क्षमता की खाई नहीं पाटी जाती, 'डाकिया बना बैंकर' की यह कहानी नीतिगत घोषणा से आगे नहीं जा पाएगी।
RashtraPress
14 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (IPPB) क्या है और यह कैसे काम करता है?
इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (IPPB) भारत सरकार द्वारा स्थापित एक भुगतान बैंक है, जो देश के विशाल डाक नेटवर्क का उपयोग करके ग्रामीण और दूरदराज के नागरिकों को बैंकिंग सेवाएं प्रदान करता है। डाकिया सीधे नागरिकों के घर जाकर खाता खोलने, पैसे जमा करने और निकालने जैसी सेवाएं देता है।
डोरस्टेप बैंकिंग से ग्रामीण नागरिकों को क्या फायदा होता है?
डोरस्टेप बैंकिंग के ज़रिये ग्रामीण नागरिकों को बैंक शाखा तक जाने की ज़रूरत नहीं पड़ती — डाकिया उनके घर पर ही बैंकिंग सेवाएं पूरी करता है। यह सुविधा खासतौर पर दूरदराज के गांवों, बुजुर्गों और शारीरिक रूप से अक्षम लोगों के लिए अत्यंत उपयोगी है।
डाक नेटवर्क अब कौन-कौन सी सरकारी सेवाएं प्रदान करता है?
डाक नेटवर्क अब पारंपरिक पत्र वितरण के अलावा आधार से संबंधित सेवाएं, पैन कार्ड, पासपोर्ट सेवा केंद्र, 24 घंटे के भीतर डिलीवरी और पेंशनभोगियों के लिए डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र की सुविधा भी देता है। यह नेटवर्क सरकार और नागरिकों के बीच महत्वपूर्ण 'लास्ट माइल' कड़ी के रूप में काम कर रहा है।
पेंशनभोगियों के लिए डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र सेवा कैसे काम करती है?
डाक विभाग के माध्यम से पेंशनभोगी अब घर बैठे डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र प्राप्त कर सकते हैं, जिससे उन्हें हर साल पेंशन जारी रखने के लिए सरकारी दफ्तर जाने की ज़रूरत नहीं रहती। यह सेवा विशेष रूप से वरिष्ठ और दिव्यांग पेंशनभोगियों के लिए सुविधाजनक है।
कोविड-19 महामारी के दौरान डाक विभाग ने क्या भूमिका निभाई?
कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान डाक कर्मचारियों ने नागरिकों को घर पर ही बैंकिंग सेवाएं और नकदी पहुंचाई। इसके अलावा डाक वाहनों और बुनियादी ढांचे का उपयोग आवश्यक चिकित्सा और सुरक्षात्मक सामग्री की आपूर्ति के लिए भी किया गया।
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