डाकिया बना बैंकिंग का नया चेहरा: डॉ. जितेंद्र सिंह बोले, इंडिया पोस्ट नेटवर्क से गांव-गांव पहुंच रही वित्तीय सेवाएं
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने 14 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में कहा कि इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (IPPB) और डोरस्टेप बैंकिंग के विस्तार ने डाक नेटवर्क को देश के गांवों और दूरदराज के घरों तक वित्तीय सेवाएं पहुंचाने का एक प्रभावी माध्यम बना दिया है। उन्होंने कहा कि आज का डाकिया महज चिट्ठी बांटने वाला नहीं, बल्कि बैंकिंग और नागरिक सेवाओं का सजीव प्रतिनिधि बन चुका है।
मंत्री से मिला डाक कर्मचारी प्रतिनिधिमंडल
डाक विभाग के अखिल भारतीय कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधिमंडल ने डॉ. सिंह से मुलाकात की। इस बैठक में डाक सेवाओं के बदलते स्वरूप के साथ-साथ कर्मचारियों, कर्मचारी संगठनों और पेंशनभोगियों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई।
प्रतिनिधियों ने पिछले एक दशक में इंडिया पोस्ट के सेवा पोर्टफोलियो में आए बड़े बदलावों का उल्लेख किया। इनमें 24 घंटे के भीतर डिलीवरी, आधार से संबंधित सेवाएं, तथा डाक नेटवर्क के ज़रिये पैन और पासपोर्ट सेवा केंद्र की उपलब्धता शामिल हैं।
ग्रामीण वित्तीय समावेश में बढ़ती भूमिका
मंत्री ने विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में डोरस्टेप बैंकिंग की अहमियत पर जोर दिया। उनके अनुसार, इंडिया पोस्ट अब पारंपरिक पत्र वितरण की सीमाओं से आगे निकलकर वित्तीय और नागरिक सेवाओं के एक व्यापक मंच के रूप में उभर चुका है।
यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब देश में करोड़ों नागरिक अभी भी बैंकिंग शाखाओं से दूर दुर्गम इलाकों में रहते हैं। डाक नेटवर्क की लास्ट माइल कनेक्टिविटी इस अंतर को पाटने में केंद्रीय भूमिका निभा रही है।
पेंशनभोगियों के लिए डिजिटल सेवाएं
डाक नेटवर्क ने पेंशनभोगियों के लिए डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र जैसी सुविधाओं का भी विस्तार किया है, जिससे वरिष्ठ नागरिकों को पेंशन से जुड़ी औपचारिकताओं के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते। गौरतलब है कि ये सेवाएं उन बुजुर्गों के लिए विशेष रूप से राहतकारी हैं जो शारीरिक रूप से सरकारी दफ्तर जाने में असमर्थ हैं।
कोविड-19 में डाक कर्मियों की भूमिका
डॉ. सिंह ने कोविड-19 महामारी के दौरान डाक कर्मचारियों की अदम्य सेवाभावना को भी याद किया। राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के बावजूद डाक कर्मी नागरिकों तक बैंकिंग सेवाएं और नकदी पहुंचाते रहे। डाक वाहनों और बुनियादी ढांचे का उपयोग आवश्यक चिकित्सा और सुरक्षात्मक सामग्री की आपूर्ति के लिए भी किया गया।
आगे का रास्ता
प्रतिनिधिमंडल ने इंडिया पोस्ट के आधुनिकीकरण के लिए सरकार की सराहना की और इसे नागरिक-केंद्रित सेवा नेटवर्क में बदलने के प्रयासों को महत्वपूर्ण बताया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि डाक नेटवर्क की तकनीकी क्षमता और मानव संसाधन को और मज़बूत किया जाए, तो यह सरकारी सेवाओं और आम नागरिक के बीच की खाई को और भी कम कर सकता है। तेज़ डिलीवरी सेवाओं, आधार सुविधाओं, पैन-पासपोर्ट केंद्रों और डिजिटल पेंशन प्रणाली के साथ इंडिया पोस्ट की सार्वजनिक-सेवा भूमिका लगातार विस्तृत होती जा रही है।