यूसीसी पर अमित शाह के बयान का समर्थन: भाजपा प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी बोले — 2027 से पहले 21 राज्यों में लागू हो यूसीसी
सारांश
मुख्य बातें
भाजपा प b>प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने सोमवार, 14 सितंबर 2026 को लखनऊ में पत्रकारों से बातचीत करते हुए गृह मंत्री अमित शाह के 2027 तक 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने के बयान का समर्थन किया और कहा कि यह संविधान के अनुच्छेद 44 की भावना के अनुरूप है। त्रिपाठी ने एक साथ कई राजनीतिक मुद्दों पर भाजपा का पक्ष रखते हुए कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) दोनों पर तीखे वार किए।
यूसीसी: संवैधानिक दायित्व या राजनीतिक एजेंडा?
त्रिपाठी ने स्पष्ट किया कि संविधान के नीति-निर्देशक तत्वों में अनुच्छेद 44 समान नागरिक संहिता की दिशा में प्रावधान करता है और सर्वोच्च न्यायालय ने अपने विभिन्न फैसलों में यूसीसी के महत्व को रेखांकित किया है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने अपने चुनावी घोषणापत्रों में इसे राजनीतिक प्रतिबद्धता के रूप में बार-बार दोहराया है।
उन्होंने रेखांकित किया कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना जिसने यूसीसी लागू किया, जबकि कई अन्य भाजपा शासित राज्यों में समितियाँ गठित करने और विधेयक लाने की प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है। त्रिपाठी ने उम्मीद जताई कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा और उसके सहयोगियों द्वारा शासित अधिकांश राज्यों में यूसीसी लागू हो जाएगी।
मदरसों पर विवाद और भाजपा का रुख
पश्चिम बंगाल के मंत्री दिलीप घोष के मदरसों से जुड़े दावों पर त्रिपाठी ने कहा कि कथित तौर पर कुछ मामलों में आतंकवाद या अतिवादी गतिविधियों से जुड़े लोगों के मदरसों से संबंध सामने आए हैं। उन्होंने कहा, 'मदरसे धार्मिक शिक्षा के केंद्र हो सकते हैं, लेकिन यदि किसी संस्थान में कट्टरपंथ या अतिवादी विचारों को बढ़ावा देने की गतिविधियाँ हों तो यह गंभीर चिंता का विषय है।'
उन्होंने आगे कहा कि भाजपा शासित राज्यों में ऐसे संस्थानों को चिन्हित करने और उन्हें नियमित करने के प्रयास किए गए हैं। मदरसों की फंडिंग पर भी सवाल उठाने की बात उन्होंने कही।
सपा की जिलावार घोषणापत्र रणनीति पर कटाक्ष
समाजवादी पार्टी की ओर से जिलावार घोषणापत्र तैयार करने की प्रस्तावित रणनीति पर त्रिपाठी ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि सपा पहले 'वन डिस्ट्रिक्ट, वन माफिया' जैसे आरोपों से घिरी रही है। उनका कहना था कि अखिलेश यादव को उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों की भौगोलिक, सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों को समझे बिना जिलावार नीति बनाना मुश्किल होगा।
जयंत चौधरी विवाद और पश्चिमी यूपी की राजनीति
केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी के उस बयान पर — जिसमें उन्होंने कहा था कि यदि वे कुछ बातें सार्वजनिक कर दें तो अखिलेश यादव पश्चिमी उत्तर प्रदेश में खड़े नहीं हो पाएंगे — त्रिपाठी ने कहा कि सपा की टिप्पणियों से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट समाज के बीच नाराजगी है। उन्होंने दावा किया कि इसी कारण अखिलेश यादव पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कार्यक्रम तय करने के बाद उन्हें रद्द कर रहे हैं।
त्रिपाठी ने कहा कि जयंत चौधरी, चौधरी चरण सिंह की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं और अखिलेश यादव को इस परिवार के प्रति सम्मानजनक रुख रखना चाहिए।
लोहिया ट्रस्ट, ब्रिक्स और महिला एशिया कप पर प्रतिक्रिया
अखिलेश यादव के लोहिया ट्रस्ट की कमान संभालने पर त्रिपाठी ने कहा कि डॉ. राम मनोहर लोहिया जीवनभर परिवारवादी राजनीति के विरोधी रहे, और अब उनके नाम पर बने ट्रस्ट पर सैफई परिवार का प्रभाव बढ़ना उनकी विचारधारा के विपरीत है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले क्या फिर किसी राजनीतिक टकराव की आशंका है।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के डिनर मेन्यू पर राहुल गांधी की टिप्पणी को लेकर त्रिपाठी ने कहा कि भारत की मेजबानी में हुए एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मंच पर खाने के मेन्यू को राजनीतिक मुद्दा बनाना कांग्रेस की वैचारिक दिवालियेपन को दर्शाता है। भारतीय महिला क्रिकेट टीम की एशिया कप जीत को उन्होंने गर्व का विषय बताया और ट्रॉफी से जुड़े विवाद के संदर्भ में पाकिस्तान पर आतंकवाद को प्रोत्साहित करने का आरोप लगाया।
यह ऐसे समय में आया है जब 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की आहट तेज़ होने लगी है और सभी दल अपनी-अपनी रणनीतियाँ मजबूत करने में जुटे हैं।