राजस्थान निकाय चुनाव 2026: भाजपा ने 4,026 वार्ड जीते, कांग्रेस 3,438 पर सिमटी
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान के 309 नगर निकायों के 9,900 वार्डों के चुनाव परिणाम 15 सितंबर 2026 को घोषित हो गए, जिनमें भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 4,026 वार्डों पर जीत दर्ज कर प्रमुख स्थान हासिल किया। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) 3,438 वार्डों पर सिमट गई, जबकि 2,436 वार्डों में निर्दलीय एवं अन्य उम्मीदवार विजयी रहे।
मुख्य घटनाक्रम
शुरुआती रुझानों से ही BJP आगे रही और अंतिम परिणामों तक यह बढ़त बनी रही। राज्य में कुल 10 नगर निगम, 51 नगर परिषद और 248 नगरपालिकाओं में दो चरणों में मतदान संपन्न हुआ था। पहले चरण में 9 सितंबर को 162 निकायों के 5,393 वार्डों में 76.41% मतदान हुआ और 20,000 से अधिक उम्मीदवार मैदान में थे। दूसरे चरण में 11 सितंबर को 147 निकायों के 4,774 वार्डों में 71.69% मतदान दर्ज हुआ और 18,266 उम्मीदवारों ने किस्मत आजमाई। दोनों चरणों को मिलाकर कुल मतदान 74.05% रहा।
नगर निगमों का विस्तृत चित्र
जयपुर नगर निगम में BJP ने 78 वार्ड जीतकर बहुमत सुनिश्चित किया, जबकि कांग्रेस को 53 और अन्य को 15 वार्ड मिले। कोटा में भी BJP का दबदबा रहा — 55 वार्ड BJP, 35 कांग्रेस और 4 अन्य के पास गए। उदयपुर में BJP ने 80 में से 53 वार्ड जीतकर एकतरफा बढ़त बनाई; कांग्रेस को 23 और अन्य को 4 वार्ड मिले। भीलवाड़ा में BJP ने 45 वार्ड हासिल किए, कांग्रेस को 10 और अन्य को 15 वार्ड मिले। अलवर में BJP को 28, कांग्रेस को 23 और अन्य को 14 वार्ड प्राप्त हुए।
कांग्रेस की वापसी — अजमेर, बीकानेर और पाली
हालाँकि कुल आँकड़ों में BJP आगे रही, कुछ प्रमुख निगमों में कांग्रेस ने प्रभावशाली प्रदर्शन किया। अजमेर में कांग्रेस 37 वार्ड जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी, जबकि BJP को 32 और अन्य को 11 वार्ड मिले। बीकानेर में कांग्रेस ने 42 वार्ड जीतकर BJP (27 वार्ड) को पीछे छोड़ा। पाली में भी कांग्रेस 29 वार्ड के साथ आगे रही, जहाँ BJP को 21 और अन्य को 15 वार्ड मिले। यह ऐसे समय में महत्त्वपूर्ण है जब कांग्रेस राज्य में अपनी ज़मीन मज़बूत करने की कोशिश में है।
जोधपुर में बराबरी, भरतपुर में निर्दलीयों का उलटफेर
जोधपुर नगर निगम में मुकाबला बिल्कुल बराबर रहा — BJP और कांग्रेस दोनों को 44-44 वार्ड मिले, जबकि 11 वार्ड अन्य ने जीते। भरतपुर में निर्दलीयों ने बाज़ी पलट दी — 65 में से 38 वार्ड अन्य-निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीते, BJP को 20 और कांग्रेस को महज़ 7 वार्ड मिले। भरतपुर का यह नतीजा राज्य स्तरीय पार्टियों के लिए एक संकेत है कि स्थानीय समीकरण हमेशा राज्यस्तरीय रुझान का अनुसरण नहीं करते।
आगे क्या
गौरतलब है कि नगर निकाय चुनाव प्रायः स्थानीय मुद्दों और उम्मीदवारों की व्यक्तिगत छवि पर लड़े जाते हैं, फिर भी इन परिणामों को राजस्थान में भाजपा के राज्य सरकार के प्रदर्शन का एक अप्रत्यक्ष जनादेश माना जाएगा। दोनों दलों के लिए निगम अध्यक्ष और परिषद अध्यक्षों के चुनाव अगला अहम पड़ाव होगा, जहाँ निर्दलीयों की भूमिका निर्णायक हो सकती है।