28 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

राजस्थान निकाय चुनाव 2026: 309 निकायों के 10,245 वार्डों में बहुकोणीय मुकाबले के आसार, 40,000 से अधिक उम्मीदवार उतर सकते हैं

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
राजस्थान निकाय चुनाव 2026: 309 निकायों के 10,245 वार्डों में बहुकोणीय मुकाबले के आसार, 40,000 से अधिक उम्मीदवार उतर सकते हैं

सारांश

राजस्थान के शहरी निकाय चुनाव इस बार BJP बनाम कांग्रेस की सीधी लड़ाई नहीं रहेंगे। 309 निकायों और 10,245 वार्डों में बागी, निर्दलीय और BSP-RLP जैसे क्षेत्रीय दल मुकाबले को बहुकोणीय बना रहे हैं। 40,000 से अधिक उम्मीदवार उतरने के अनुमान के साथ यह राजस्थान का अब तक का सबसे व्यापक नगरीय चुनाव होगा।

मुख्य बातें

राजस्थान में शहरी निकायों की संख्या 196 से बढ़कर 309 और वार्डों की संख्या 7,500 से बढ़कर 10,245 हो गई है।
इस बार कुल उम्मीदवारों की संख्या 40,000 से अधिक पहुँचने का अनुमान; पिछले चुनाव में 27,462 उम्मीदवार थे।
प्रति वार्ड औसत उम्मीदवार पिछले चुनाव के 4 से कम से बढ़कर इस बार 5 के आसपास पहुँचने की संभावना।
BSP, RLP, NCP, CPI, CPI-M अपने प्रभाव क्षेत्रों में उम्मीदवार उतारकर मुकाबले को त्रिकोणीय या बहुकोणीय बना सकती हैं।
पिछले चुनाव में 9,972 महिलाओं ने चुनाव लड़ा था; इस बार महिला भागीदारी और बढ़ने के संकेत।
BJP प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने युवा नेतृत्व को प्राथमिकता देने पर ज़ोर दिया; कांग्रेस ने QR कोड से उम्मीदवारी पंजीकरण शुरू किया।

राजस्थान के आगामी शहरी निकाय चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के बीच परंपरागत सीधी टक्कर इस बार कमज़ोर पड़ती दिख रही है। टिकट की भारी मारामारी, बागी उम्मीदवारों की संभावित बाढ़ और क्षेत्रीय दलों की सक्रियता ने 309 नगरीय निकायों के 10,245 वार्डों में बहुकोणीय संघर्ष का माहौल बना दिया है।

चुनावी दायरे में बड़ा विस्तार

राजस्थान में शहरी स्थानीय निकायों की संख्या पिछले चुनाव के 196 से बढ़कर अब 309 हो गई है। इसी तरह वार्डों की संख्या 7,500 से बढ़कर 10,245 हो गई है — यानी करीब 2,745 नए वार्ड जुड़े हैं। इस विस्तार ने चुनावी प्रतिस्पर्धा का दायरा काफी बड़ा कर दिया है और नए उम्मीदवारों के लिए अवसर भी खोले हैं।

तुलना के लिए, पिछला शहरी निकाय चुनाव 2019 और 2021 के बीच पाँच चरणों में हुआ था, जिसमें 7,500 वार्डों में 27,462 उम्मीदवार मैदान में थे। इस बार वार्डों और दावेदारों की बढ़ी संख्या को देखते हुए कुल उम्मीदवारों का आँकड़ा 40,000 से अधिक पहुँचने का अनुमान है।

बागी और निर्दलीय उम्मीदवारों की भूमिका

पिछले चुनाव में प्रत्येक वार्ड से औसतन चार से कम उम्मीदवार मैदान में थे, लेकिन इस बार यह औसत पाँच के आसपास पहुँचने का अनुमान है। दोनों प्रमुख दलों में टिकट चाहने वालों की संख्या उपलब्ध सीटों से कहीं अधिक है। ऐसे में जिन्हें टिकट नहीं मिलेगा, वे बागी या निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतर सकते हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब दोनों बड़े दल कुछ वार्डों में आधिकारिक उम्मीदवार उतारने के बजाय निर्दलीयों को समर्थन देने की रणनीति पर भी विचार कर रहे हैं — जो पिछले चुनावों में भी अपनाई गई थी। स्थानीय राजनीतिक समीकरणों और जातीय गणनाओं के आधार पर यह रणनीति पार्टियों को टिकट विवाद से बचने का रास्ता देती है।

क्षेत्रीय दल बदलेंगे समीकरण

बहुजन समाज पार्टी (BSP) बड़ी संख्या में उम्मीदवार उतारने की तैयारी में है। इसके अलावा राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP), नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (NCP), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) (CPI-M) भी अपने-अपने प्रभाव क्षेत्रों में उम्मीदवार उतारने की रणनीति पर काम कर रही हैं। इन दलों की सक्रियता कई पारंपरिक द्विदलीय मुकाबलों को त्रिकोणीय या बहुकोणीय लड़ाइयों में बदल सकती है।

युवा और महिला उम्मीदवारों पर ज़ोर

BJP और कांग्रेस दोनों इस बार युवा उम्मीदवारों को प्राथमिकता दे रही हैं, जिससे पहली बार चुनाव लड़ने वाले दावेदारों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। BJP के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि पार्टी के लिए यह प्राथमिकता है कि नई पीढ़ी वरिष्ठ नेताओं के मार्गदर्शन में आगे बढ़े और जनसेवा के लिए खुद को समर्पित करे।

महिला उम्मीदवारों की भागीदारी भी इस बार बढ़ने के संकेत हैं। पिछले चुनाव में 9,972 महिलाओं ने चुनाव लड़ा था। इस बार महिला दावेदार न केवल आरक्षित वार्डों में, बल्कि सामान्य वार्डों में भी टिकट की माँग कर रही हैं।

पार्टियों की तैयारी और आगे की राह

राजस्थान कांग्रेस के प्रवक्ता स्वर्णिम चतुर्वेदी ने कहा, 'इस बार उम्मीदवारों से बहुत अच्छा रिस्पॉन्स मिला है क्योंकि हमने उनकी उम्मीदवारी रजिस्टर करने के लिए क्यूआर कोड शुरू किए हैं।' यह तकनीकी कदम उम्मीदवारी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुलभ बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

गौरतलब है कि राजस्थान में यह पहला बड़ा शहरी निकाय चुनाव होगा जो 2023 के विधानसभा चुनाव में BJP की वापसी के बाद हो रहा है। ऐसे में दोनों दलों के लिए यह चुनाव स्थानीय पकड़ परखने की कसौटी भी बनेगा। बहुकोणीय मुकाबले में जीत का अंतर कम रहने की संभावना है, जो अंततः मतदाताओं की स्थानीय प्राथमिकताओं पर निर्भर करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस बार निकायों और वार्डों की संख्या में भारी विस्तार ने इसे संरचनात्मक रूप दे दिया है — यानी बहुकोणीय मुकाबला अपवाद नहीं, नियम बनने की राह पर है। दिलचस्प यह है कि दोनों बड़े दल खुद निर्दलीयों को समर्थन देने की रणनीति पर विचार कर रहे हैं, जो पार्टी अनुशासन की खोखली होती परंपरा को उजागर करता है। युवा उम्मीदवारों पर ज़ोर एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन यदि टिकट वितरण में पारदर्शिता नहीं रही तो यही युवा ऊर्जा बागी लहर में बदल सकती है — जो अंततः दोनों दलों के लिए नुकसानदेह साबित होगी।
RashtraPress
28 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजस्थान शहरी निकाय चुनाव 2026 में कितने निकाय और वार्ड शामिल हैं?
इस बार राजस्थान में 309 शहरी स्थानीय निकायों के 10,245 वार्डों में चुनाव होने हैं। पिछले चुनाव में 196 निकायों के 7,500 वार्डों में मतदान हुआ था, यानी निकायों और वार्डों दोनों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
राजस्थान निकाय चुनाव में इस बार सीधा मुकाबला क्यों नहीं होगा?
टिकट की भारी मारामारी, बड़ी संख्या में संभावित बागी और निर्दलीय उम्मीदवार, तथा BSP, RLP, NCP जैसे क्षेत्रीय दलों की सक्रियता के कारण कई वार्डों में मुकाबला त्रिकोणीय या बहुकोणीय होने की संभावना है। दोनों प्रमुख दल भी कुछ वार्डों में निर्दलीयों को समर्थन देने पर विचार कर रहे हैं।
राजस्थान निकाय चुनाव 2026 में कुल कितने उम्मीदवार मैदान में उतर सकते हैं?
अनुमान है कि इस बार 40,000 से अधिक उम्मीदवार मैदान में उतर सकते हैं। तुलना के लिए, पिछले चुनाव में 7,500 वार्डों में 27,462 उम्मीदवार थे। प्रति वार्ड औसत उम्मीदवार संख्या पिछले चुनाव के चार से कम से बढ़कर पाँच के आसपास पहुँचने का अनुमान है।
राजस्थान निकाय चुनाव में महिला और युवा उम्मीदवारों की क्या स्थिति है?
पिछले चुनाव में 9,972 महिलाओं ने चुनाव लड़ा था और इस बार दोनों प्रमुख दल महिलाओं की अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने पर ध्यान दे रहे हैं। महिला दावेदार आरक्षित के साथ-साथ सामान्य वार्डों में भी टिकट माँग रही हैं। BJP और कांग्रेस दोनों युवा उम्मीदवारों को प्राथमिकता दे रही हैं।
राजस्थान निकाय चुनाव में BJP और कांग्रेस की रणनीति क्या है?
BJP प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने युवा नेतृत्व को वरिष्ठ नेताओं के मार्गदर्शन में आगे बढ़ाने पर ज़ोर दिया है। कांग्रेस ने QR कोड के ज़रिए उम्मीदवारी पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू की है। दोनों दल कुछ वार्डों में आधिकारिक उम्मीदवार उतारने के बजाय निर्दलीयों को समर्थन देने की रणनीति पर भी विचार कर रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 20 घंटे पहले
  2. कल
  3. कल
  4. 6 दिन पहले
  5. 1 सप्ताह पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 3 महीने पहले
  8. 6 महीने पहले